मध्य प्रदेश Switch to English
अखिल भारतीय पुलिस निशानेबाज़ी चैंपियनशिप
चर्चा में क्यों?
24 से 29 मार्च 2025 मध्य प्रदेश के इंदौर में 18वीं अखिल भारतीय पुलिस निशानेबाज़ी (खेल) चैंपियनशिप का आयोजन किया गया।
मुख्य बिंदु
- चैंपियनशिप के बारे में:
- यह चैंपियनशिप इंदौर के रेवती रेंज में आयोजित की गई।
- चैंपियनशिप की देखरेख अखिल भारतीय पुलिस खेल नियंत्रण बोर्ड (AIPSCB) द्वारा की गई।
- यह चैंपियनशिप केंद्रीय आयुध एवं युद्ध कौशल विद्यालय (CSWT), सीसुबल, इंदौर द्वारा 24 से 29 मार्च 2025 तक आयोजित की गई थी।
- इससे पहले यह आयोजन वर्ष 2019 में पुणे (महाराष्ट्र) में हुआ था।
- इस चैंपियनशिप में देशभर से 600 पुरुष एवं महिला निशानेबाज़ो की भागीदारी शामिल थी।
- इसमें 17 स्पर्द्धाएँ आयोजित की गई हैं, जिनमें 204 पदकों के लिये प्रतिस्पर्द्धाएँ संपन्न हुईं।
- भाग लेने वाली टीमें:
- चैंपियनशिप में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और विभिन्न राज्य पुलिस बलों की टीमों नए भी भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- असम पुलिस, हरियाणा पुलिस, केरला पुलिस, राजस्थान पुलिस, छत्तीसगढ़ पुलिस, तमिलनाडु पुलिस, पंजाब पुलिस, तेलंगाना पुलिस।
- केंद्रीय बल: रेलवे सुरक्षा बल (RPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), असम राइफल्स (AR), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सशस्त्र सीमा बल (SSB)।
- चैंपियनशिप में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और विभिन्न राज्य पुलिस बलों की टीमों नए भी भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:


मध्य प्रदेश Switch to English
राष्ट्रीय डेफ शूटिंग चैंपियनशिप
चर्चा में क्यों?
दूसरी राष्ट्रीय डेफ शूटिंग, टेबल टेनिस और टेनिस चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश के खिलाड़ी कुशाग्र सिंह राजावत ने दो पदक जीते।
- यह चैंपियनशिप 20 से 24 मार्च 2025 तक अहमदाबाद (गुजरात) में आयोजित की गई।
मुख्य बिंदु
- कुशाग्र सिंह राजावत का प्रदर्शन:
- निशानेबाज़ कुशाग्र सिंह राजावत ने इस चैंपियनशिप में 50 मीटर रायफल 3-पोजीशन स्पर्द्धा में स्वर्ण पदक एवं 50 मीटर रायफल प्रोन स्पर्द्धा में रजत पदक अर्जित किया।
- उनकी इस उपलब्धि में शूटिंग अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक जोयदीप कर्माकर और सहायक प्रशिक्षक वैभव शर्मा का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने उनके प्रशिक्षण में मार्गदर्शन प्रदान किया।
- बैडमिंटन में भी पदक:
- इस चैंपियनशिप में बैडमिंटन खिलाड़ी कु. गौरांशी शर्मा ने बैडमिंटन सिंगल्स में कांस्य पदक जीता।


बिहार Switch to English
बक्सर और पश्चिम चंपारण में SEZ
चर्चा में क्यों?
बिहार के उद्योग मंत्री ने बक्सर और पश्चिम चंपारण में स्पेशल इकॉनोमिक ज़ोन (SEZ) स्थापित करने की घोषणा की।
मुख्य बिंदु
- मुद्दे के बारे में:
- केंद्र सरकार ने इनके गठन को नवंबर 2024 तक मंजूरी प्रदान की थी।
- ये ज़ोन बक्सर के नवानगर और पश्चिम चंपारण के कुमारबाग में स्थापित किये जाएंगे।
- इनकी स्थापना से इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ने की उम्मीद है, जिससे रोज़गार सृजन और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र
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परिचय:
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) किसी देश के भीतर ऐसे क्षेत्र हैं जो प्रायः शुल्क मुक्त (राजकोषीय रियायत) होते हैं और यहाँ मुख्य रूप से निवेश को प्रोत्साहित करने तथा रोज़गार पैदा करने के लिये अलग-अलग व्यापार और वाणिज्यिक कानून होते हैं।
- SEZ इन क्षेत्रों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिये भी बनाए गए हैं, जिससे व्यापार करने में आसानी होती है।
- भारत में SEZ:
- एशिया का पहला निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (Export Processing Zones- EPZ) वर्ष 1965 में कांडला, गुजरात में स्थापित किया गया था।
- इन EPZs की संरचना SEZ के समान थी, सरकार ने वर्ष 2000 में EPZ की ढाँचागत और नौकरशाही चुनौतियों के निवारण के लिये विदेश व्यापार नीति के तहत SEZ की स्थापना शुरू की।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम वर्ष 2005 में पारित किया गया और वर्ष 2006 में SEZ नियमों के साथ लागू हुआ।
- वर्तमान में 379 SEZs अधिसूचित हैं, जिनमें से 265 चालू हैं। लगभग 64% SEZ पाँच राज्यों - तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित हैं।
- अनुमोदन बोर्ड सर्वोच्च निकाय है और इसका नेतृत्व वाणिज्य विभाग (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय) के सचिव द्वारा किया जाता है।
- भारत की मौजूदा SEZ नीति का अध्ययन करने के लिये वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बाबा कल्याणी के नेतृत्व वाली समिति का गठन किया गया था और नवंबर 2018 में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं।
- इसे विश्व व्यापार संगठन (WTO) को अनुकूल बनाने और अधिकतम क्षमता का उपयोग करने तथा SEZs के संभावित उत्पादन को अधिकतम करने हेतु वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को लाने की दिशा में SEZ नीति का मूल्यांकन करने के व्यापक उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया था।
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राजस्थान Switch to English
कर्रा रोग का फैलाव
चर्चा में क्यों?
राजस्थान के पशुपालन मंत्री ने जैसलमेर ज़िले में कर्रा रोग के प्रसार को रोकने के लिये विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की।
मुख्य बिंदु
- मुद्दे के बारे में:
- कर्रा रोग (बॉटूलिज्म) का प्रसार राजस्थान के पश्चिमी ज़िलों – जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा और फलौदी में देखा गया है। ये ज़िले शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र हैं, जहाँ पशुपालन मुख्य रूप से आजीविका का आधार है।
- हाल ही में इस रोग के कारण जैसलमेर में 36 और फलौदी में 2 पशुओं की मृत्यु हो गई।
- इस बैठक का उद्देश्य रोग की रोकथाम, पशुपालकों को जागरूक करने और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना था।
- कर्रा रोग
- यह रोग मुख्य रूप से हरे चारे तथा कैल्शियम और फास्फोरस की कमी के कारण होता है।
- इसके चलते पशु मृत पशुओं की हड्डियाँ खाने लगते हैं, जिससे बॉटूलिज्म रोग के कीटाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और संक्रमण फैलता है।
- रोगग्रस्त पशु में मुख से लार टपकना, अगले पैरों में जकड़न होना और जीभ का लकवाग्रस्त होकर मुँह से बाहर लटक जाना इस रोग के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं।
- इससे बचाव के लिये पशुपालकों को पोषक तत्त्वों से भरपूर आहार देने की सलाह दी जाती है।


राजस्थान Switch to English
राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक, 2024
चर्चा में क्यों?
21 मार्च, 2025 को राजस्थान विधानसभा ने "राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक, 2024" को ध्वनिमत से पारित कर दिया है।
मुख्य बिंदु
- विधेयक के बारे में:
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मुख्य प्रावधान
- मासिक पेंशन: सभी पात्र लोकतंत्र सेनानियों को ₹20,000 मासिक पेंशन दी जाएगी।
- चिकित्सा सहायता: प्रत्येक लाभार्थी को ₹4,000 मासिक चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी।
- निःशुल्क परिवहन सुविधा: सरकारी परिवहन सेवाओं में लोकतंत्र सेनानियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी।
- आश्रितों को लाभ: लोकतंत्र सेनानियों की मृत्यु के पश्चात उनके पति/पत्नी को जीवनकाल तक सम्मान राशि एवं चिकित्सा सहायता दी जाएगी।
- राष्ट्रीय उत्सवों पर विशेष आमंत्रण: लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।
- महत्त्व
- यह विधेयक लोकतंत्र की रक्षा करने वालों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- इससे उन परिवारों को आर्थिक और सामाजिक बल मिलेगा, जो आपातकाल के दौरान सबसे अधिक प्रभावित हुए थे।
- यह पहल लोकतंत्र की रक्षा के लिये भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने का कार्य भी करेगी।
आपातकाल क्या है?
- परिचय:
- यह किसी देश के संविधान या कानून के अंतर्गत कानूनी उपायों और धाराओं को संदर्भित करता है जो सरकार को असाधारण स्थितियों, जैसे युद्ध, विद्रोह या अन्य संकटों, जो देश की स्थिरता, सुरक्षा या संप्रभुता तथा भारत के लोकतंत्र के लिये खतरा उत्पन्न करते हैं, पर त्वरित एवं प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाता है।
- संविधानिक प्रावधान:
- ये प्रावधान संविधान के भाग XVIII के अंतर्गत अनुच्छेद 352 से अनुच्छेद 360 में उल्लिखित हैं।
- भारतीय संविधान में आपातकालीन प्रावधान जर्मनी के वीमर संविधान से प्रेरित हैं।
- आपातकाल के प्रकार:
- राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352)
- राज्य आपातकाल (अनुच्छेद 356)
- वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)

