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जैव विविधता और पर्यावरण

भारत में वायु प्रदूषण

  • 04 Apr 2025
  • 17 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA), PM 10, PM 2.5, ओज़ोन (O3), अमोनिया (NH3), लेड (Pb), ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)। 

मेन्स के लिये:

वायु प्रदूषण से उत्पन्न चुनौतियाँ और उनसे निपटने के उपाय।

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

भारत में वायु प्रदूषण एक सतत् सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है, जो प्रतिवर्ष लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। यह केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि एक बहुआयामी चुनौती है जो स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और विकास को प्रभावित करती है। 

वायु प्रदूषण  

  • वायु प्रदूषण, रासायनिक, भौतिक या जैविक कारकों द्वारा वायु का संदूषण है जो इसकी प्राकृतिक संरचना को बदल देता है। 
  • प्रमुख स्रोतों में दहन, वाहन, उद्योग और अग्नि शामिल हैं। 
  • वायु प्रदूषक जैसे PM, CO, O₃, NO₂, और SO₂ श्वसन संबंधी बीमारियों और उच्च मृत्यु दर का कारण बनते हैं। 

Air_Pollutants

भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति और प्रभाव क्या है?

  • भारत में वायु प्रदूषण: IQAir की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत 5 वाँ सबसे प्रदूषित देश है, जिसका औसत PM2.5 स्तर 50.6 µg/m³ है, जो WHO की सुरक्षित सीमा (5 µg/m³) से 10 गुना अधिक है।
    • दिल्ली सबसे प्रदूषित राजधानी बनी हुई है, जबकि बर्नीहाट (असम-मेघालय सीमा) विश्व का सबसे प्रदूषित शहर है।
    • वैश्विक प्रदूषण सूची में भारत शीर्ष पर है, जहाँ शीर्ष 10 में से 6 शहर तथा शीर्ष 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 13 शहर भारत के हैं।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर 99% आबादी प्रदूषित वायु में साँस लेती है, तथा निम्न और मध्यम आय वाले देश इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। 

Air_Pollution_Data

  • वायु प्रदूषण का प्रभाव:
    • स्वास्थ्य प्रभाव: वर्ष 2021 में, वायु प्रदूषण के कारण वैश्विक स्तर पर 8.1 मिलियन मौतें हुईं, जिसमें भारत (2.1 मिलियन) और चीन (2.3 मिलियन) सबसे अधिक प्रभावित हुए (स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2024)।
    • आर्थिक क्षति: वायु प्रदूषण उत्पादकता न्यून करके, उपभोक्ता गतिविधि को कम करके, स्वास्थ्य लागत में वृद्धि करके और परिसंपत्ति दक्षता को कम करके सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को कम करता है। 
    • सौर दक्षता में कमी: वायु प्रदूषण विकिरण को अवरुद्ध करके सौर ऊर्जा दक्षता को कम करता है, जबकि बढ़ता तापमान फोटोवोल्टिक प्रदर्शन को कम करता है। 
      • वर्ष 2041-2050 तक भारत की सौर पैनल दक्षता में 2.3% तक की गिरावट आ सकती है, जिससे कम से कम 840 GWh विद्युत् की वार्षिक हानि हो सकती है।
    • पर्यावरणीय क्षरण: वायु प्रदूषण ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि करके जलवायु परिवर्तन को तीव्र करता है, अम्लीय वर्षा और विषाक्त पदार्थों के निर्माण के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करता है, और जैवविविधता को खतरा पहुँचाता है। 
      • यह अत्यधिक नाइट्रोजन जमाव के कारण पौधों को कमज़ोर बनाता है तथा ओज़ोन प्रदूषण के कारण प्रकाश संश्लेषण को बाधित करके फसल की पैदावार को कम करता है।

वायु प्रदूषण के कारण क्या हैं?

और पढ़ें: वायु प्रदूषण के कारण

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये क्या उपाय किये गए हैं?

भारत में वायु प्रदूषण से निपटने में क्या चुनौतियाँ हैं?

  • विविध स्रोत: वायु प्रदूषण उद्योगों, वाहनों, बायोमास दहन, विनिर्माण और पराली दहन जैसे मौसमी कारकों से उत्पन्न होता है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • कमज़ोर निगरानी और नीतिगत अंतराल: भारत को वायु गुणवत्ता निगरानी और नीतिगत अंतराल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। 
    • जबकि BS-VI मानदंड और PMUY स्वच्छ ईंधन को प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन में कमी है। 
    • चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों की कमी के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये FAME का प्रयास असफल हो रहा है।
  • वित्तीय एवं तकनीकी बाधाएँ: सीमित वित्तपोषण, पुरानी प्रदूषण नियंत्रण तकनीकें, तथा संसाधनों का कम उपयोग प्रगति को धीमा कर रहे हैं।
    • NCAP का लक्ष्य वर्ष 2026 तक PM 2.5 में 40% की कमी लाना है, लेकिन इसके क्रियान्वयन और वित्तपोषण संबंधी चुनौतियाँ हैं, क्योंकि बजट अत्यल्प है (यह चीन के वायु प्रदूषण नियंत्रण व्यय का 1% से भी कम)।
  • प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता: भारत स्मॉग टावरों और AI डैशबोर्ड जैसे उच्च तकनीक समाधानों पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि बायोमास के दहन, अप्रचलित औद्योगिक प्रक्रियाओं और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों जैसे प्रमुख प्रदूषण स्रोतों की अनदेखी कर रहा है।
  • व्यवहारिक एवं सामाजिक बाधाएँ: हरित प्रौद्योगिकियों के प्रति जनता का प्रतिरोध, ठोस ईंधन पर निर्भरता तथा वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूकता में कमी से प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है।
    • इसके अतिरिक्त, वास्तविक कार्यान्वयन की तुलना में अनुसंधान पर अधिक ध्यान केंद्रित करने से प्रभावी नीति कार्यान्वयन में विलंब होता है।
  • समन्वय और ऋतुनिष्ठ चुनौतियाँ: अप्रभावी अंतर-राज्यीय सहयोग और ऋतु विशिष्ट प्रदूषण वृद्धि (जैसे: पराली दहन, सर्दियों में कुहासा, आँधी-अंधड़) से प्रवर्तन की प्रक्रिया जटिल होती है। 
    • सम-विषम योजना और निर्माण प्रतिबंध जैसी स्थानीय नीतियों से अस्थायी राहत प्राप्त होता है, लेकिन इनका दीर्घकालिक प्रभाव नहीं होता।

आगे की राह

  • विकेंद्रीकृत और डेटा-संचालित शासन: नगर निकायों, शहरी योजनाकारों और सामुदायिक नेताओं का सशक्तीकरण कर स्थानीय शासन का सुदृढ़ीकरण करना आवश्यक है। 
    • लक्षित हस्तक्षेपों के लिये केवल परिवेशी वायु निगरानी पर निर्भर रहने के स्थान पर वास्तविक समय में उत्सर्जन ट्रैकिंग का उपयोग किया जाना चाहिये।
  • तकनीकी और संरचनात्मक सुधार: AI डैशबोर्ड और स्मॉग टावर जैसे नवाचारों को प्रणालीगत सुधारों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता है, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा और नगरीय क्षेत्रों में कोयले के उपयोग को प्रतिबंधित करना।
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख लेना: भारत, चीन की तरह स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में तेज़ी लाकर, ब्राज़ील की तरह अपशिष्ट प्रबंधन करने वालों को औपचारिक पुनर्चक्रण प्रणालियों में एकीकृत करके तथा कैलिफोर्निया की तरह प्रदूषण जुर्माने को हरित पहलों में पुनर्निवेशित करके वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख ले सकता है।
  • क्षेत्र-विशिष्ट प्रदूषण नियंत्रण:
    • वाहन उत्सर्जन: सार्वजनिक परिवहन में सुधार करने, वाहन स्क्रैपिंग नीतियों का कार्यान्वन करने और EV बुनियादी ढाँचे का संवर्द्धन करने की आवश्यकता है।
    • औद्योगिक प्रदूषण: उत्सर्जन मानदंडों को अधिक कठोर करने, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, और कोयला आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किये जाने की आवश्यकता है
    • निर्माण एवं बायोमास दहन: धूल नियंत्रण संबंधी दिशा-निर्देश कार्यान्वित करने, अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार लाने, तथा फसल अवशेषों के लिये विकल्पों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
  • व्यवहार परिवर्तन: जागरूकता बढ़ाने, प्रदूषण निगरानी में स्थानीय समुदायों को शामिल किये जाने, तथा रिपोर्टिंग तंत्र और संधारणीय प्रथाओं के समर्थन के माध्यम से सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिये।

अन्य देशों में वायु प्रदूषण संबंधी सर्वोत्तम अभ्यास

  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (चीन): चीन ने चरणबद्ध तरीके से कोयले का उपयोग समाप्त कर, उत्सर्जन हेतु सख्त मानदंडों का कार्यान्वन कर और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश कर प्रदूषण स्तर को कम किया। 
  • समुदाय-प्रेरित अपशिष्ट प्रबंधन (ब्राज़ील): ब्राज़ील ने अनौपचारिक अपशिष्ट श्रमिकों को औपचारिक पुनर्चक्रण प्रणालियों में एकीकृत किया, जिससे अपशिष्ट पृथक्करण में सुधार हुआ और लैंडफिल उत्सर्जन में कमी आई। 
  • प्रदूषण राजस्व पुनर्निवेश (कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका): कैलिफोर्निया की कैप-एंड-ट्रेड प्रणाली के अंतर्गत प्रदूषण जुर्माने का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा और सुविधावंचित समुदायों में पुनर्निवेशित करने के लिये किया जाता है। 
  • कोयला प्रतिबंध और अल्प उत्सर्जन अंचल (लंदन, यूनाइटेड किंगडम): लंदन ने कोयले पर प्रतिबंध लगाकर और संकुलन मूल्य निर्धारण लागू करके वायु प्रदूषण को कम किया। 

निष्कर्ष:

आगामी समय में भारत में वायु की स्वच्छता प्रभावी स्थानीय शासन, डेटा-संचालित नीतियों और सामुदायिक भागीदारी पर निर्भर करती है। वायु प्रदूषण का नगरीय नियोजन, लोक स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के हिस्से के रूप में निराकरण किया जाना चाहिये। स्वच्छ वायु प्राप्त करने के लिये सुदृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक समाधान और संधारणीय परिवर्तन के लिये सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता होती है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न: 

प्रश्न. भारत में वायु प्रदूषण को गंभीर बनाने वाले कारकों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये। समस्या का प्रभावी समाधान करने के उपायों का सुझाव दीजिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-से कारण/कारक बेंज़ीन प्रदूषण उत्पन्न करते हैं ? (2020)

  1. स्वचालित वाहन (automobile) द्वारा निष्कासित पदार्थ 
  2. तंबाकू का धुआँ 
  3. लकड़ी का जलना 
  4. रोगन किये गए लकड़ी के फर्नीचर का उपयोग 
  5. पॉलियूरिथेन से निर्मित उत्पादों का उपयोग

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये :

(a) केवल 1, 2 और 3 
(b) केवल 2 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4 
(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: (a)


प्रश्न. प्रदूषण की समस्याओं का समाधान करने के संदर्भ में जैवोपचारण (बायोरेमीडिएशन) तकनीक के कौन-सा/से लाभ है/हैं ? (2017)

  1. यह प्रकृति में घटित होने वाली जैवनिम्नीकरण प्रक्रिया का ही संवर्धन कर प्रदूषण को स्वच्छ करने की तकनीक है। 
  2. कैडमियम और लेड जैसी भारी धातुओं से युक्त किसी भी संदूषक को सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से जैवोपचारण द्वारा सहज ही और पूरी तरह उपचारित किया जा सकता है। 
  3. जैवोपचारण के लिये विशेषतः अभिकल्पित सूक्ष्मजीवों को सृजित करने हेतु आनुवंशिक इंजीनियरी (जेनेटिक इंजीनियरिंग) का उपयोग किया जा सकता है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये :

(a) केवल 1 
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3 
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)


मेन्स:

प्रश्न. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) द्वारा हाल ही में जारी किये गए संशोधित वैश्विक वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देशों (ए.क्यू.जी.) के मुख्य बिंदुओं का वर्णन कीजिये। विगत 2005 के अद्यतन से, ये किस प्रकार भिन्न हैं? इन संशोधित मानकों को प्राप्त करने के लिये, भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में किन परिवर्तनों की आवश्यकता है? (2021)

प्रश्न. भारत सरकार द्वारा शुरू किये गए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एन.सी.ए.पी.) की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? (2020)

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