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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 28 Mar, 2025
  • 13 min read
प्रारंभिक परीक्षा

विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना के दस वर्ष बाद, बिहार में शिक्षा के एक अन्य प्राचीन केंद्र विक्रमशिला को पुनर्जीवित करने के प्रयास चल रहे हैं, जिसके तहत भागलपुर ज़िले के अंतीचक गाँव में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिये भूमि आवंटित की गई है।

नालंदा विश्वविद्यालय

  • स्थापना: 5 वीं शताब्दी ई. में गुप्त वंश के दौरान, संभवतः कुमारगुप्त प्रथम के अधीन।
  • विरासत: विश्व के सबसे प्राचीन आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक; इसमें बौद्ध दर्शन, तर्कशास्त्र, चिकित्सा और खगोल विज्ञान सहित विभिन्न विषय पढ़ाए जाते थे।
  • विक्रमशिला से संबंध: नालंदा और विक्रमशिला दोनों को पाल राजाओं द्वारा संरक्षण दिया गया था और दोनों में विद्वानों और ज्ञान का आदान-प्रदान होता था।
  • पुनरुद्धार: नालंदा विश्वविद्यालय को वर्ष 2014 में एक अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के रूप में पुनः स्थापित किया गया।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय के बारे में मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला महाविहार की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने 8 वीं शताब्दी के अंत और 9 वीं शताब्दी के प्रारंभ के बीच की थी। 
    • उस काल में यह नालंदा के साथ-साथ अस्तित्व में था और विकसित हुआ।
  • मुख्य विशेषताएँ: विक्रमशिला एकमात्र विश्वविद्यालय था जो तांत्रिक और गुप्त विद्याओं में विशेषज्ञता रखता था। यह तांत्रिकवाद के युग के दौरान फला-फूला, जब बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म दोनों में गुप्त विज्ञान और जादू को अध्ययन के विषय के रूप में शामिल किया गया था।
    • धर्मपाल के शासनकाल के दौरान, विक्रमशिला का सर्वोच्च विकास हुआ और नालंदा के कार्यों को भी यहाँ से नियंत्रित किया जाता था।
    • विक्रमशिला में धर्मशास्त्र, दर्शन, व्याकरण, तत्त्वमीमांसा और तर्कशास्त्र जैसे विषयों की भी शिक्षा दी जाती थी।
    • इस विश्वविद्यालय से कई प्रख्यात विद्वानों नें शिक्षा ग्रहण की, जिनमें अतीसा दीपांकर भी शामिल हैं, जिन्होंने तिब्बत में बौद्ध धर्म की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • पतन: नालंदा की तरह विक्रमशिला का भी पतन 13वीं शताब्दी में हिंदू धर्म के उत्थान और बौद्ध धर्म के पतन सहित बख्तियार खिलजी के आक्रमण के कारण हुआ।
    • इसके अवशेषों में एक बृहद स्तूप, मठवासी कक्ष और एक पुस्तकालय शामिल हैं जहाँ ग्रंथों की प्रतिलिपि बनाई गई और उनका अनुवाद किया गया।

Vikramshila University

पाल राजवंश

  • गोपाल द्वारा स्थापित पाल वंश ने 8वीं से 12वीं शताब्दी की अवधि में बिहार और बंगाल पर शासन किया।
    • "पाल" एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है "संरक्षक"। इसे सम्राटों के नामों में जोड़ा गया, जिससे साम्राज्य का नाम "पाल" पड़ा।
  • गोपाल के शासनकाल में कन्नौज और उत्तर भारत पर नियंत्रण के लिये पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट वंश  के बीच त्रिपक्षीय संघर्ष हुआ।
  • पाल महायान बौद्ध धर्म के धर्मपरायण संरक्षक थे।
  • उनके संरक्षण में एक विशिष्ट पाल कला शैली विकसित हुई, जो पाषाण और धातु की उत्कृष्ट मूर्तियों के लिये जानी जाती है।
    • पाल शैली मुख्य रूप से काँस्य मूर्तियों और तालपत्र चित्रों के माध्यम से प्रसारित हुई, जो बुद्ध और अन्य देवताओं से संबंधित थीं।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारत के इतिहास की निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिये: (2020)

  1. राजा भोज के अधीन प्रतिहारों का उदय 
  2. महेन्द्रवर्मन-प्रथम के अधीन पल्लव प्रभाव की स्थापना 
  3. परांतक-I द्वारा चोल प्रभाव की स्थापना 
  4. गोपाल के द्वारा पाल वंश की स्थापना

उपर्युक्त घटनाओं का सबसे प्रारंभिक समय से सही कालानुक्रमिक क्रम क्या है?

(a) 2 - 1 - 4 - 3
(b) 3 - 1 - 4 - 2
(c) 2 - 4 - 1 - 3
(d) 3 - 4 - 1 - 2

उत्तर: (c)


रैपिड फायर

मेघालय की रेल कनेक्टिविटी पर चिंता

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

खासी दबाव समूहों के वर्षों के विरोध के बाद (जिसमें यह चिंता व्यक्त की गई थी कि रेल संपर्क के कारण मेघालय में बाहरी लोगों का अत्यधिक आवागमन हो सकता है) भारतीय रेलवे ने बर्नीहाट तथा शिलांग के लिये लंबित रेलवे परियोजनाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है।

  • इसके साथ ही शिलांग देश की एकमात्र ऐसी राज्य की राजधानी रह जाएगी जहाँ रेलवे संपर्क नहीं है।
    • मेघालय में केवल एक रेलवे स्टेशन है (वर्ष 2014 में उद्घाटन), जो नॉर्थ गारो हिल्स के मेंदीपाथर में है।
  • इनर लाइन परमिट (ILP) की मांग: दबाव समूह बाहरी लोगों के आगमन को नियंत्रित करने के लिये राज्य में ILP व्यवस्था को लागू करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि स्वदेशी जनजातीय आबादी को हाशिये पर धकेले जाने का डर है। 
    • गारो की जनसंख्या लगभग 10 लाख है, जबकि खासी की जनसंख्या 13-14 लाख के बीच है।
    • ILP भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास स्थित कुछ क्षेत्रों में आवागमन को विनियमित करने का एक प्रयास है। यह अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिज़ोरम और मणिपुर में पहले से ही लागू है।
  • ILP के बारे में और इसकी उत्पत्ति: यह एक अनिवार्य आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ है जो किसी भारतीय नागरिक को सीमित अवधि के लिये संरक्षित क्षेत्र में आंतरिक यात्रा की अनुमति देने के लिये संबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है। 
    • बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन अधिनियम, 1873 के तहत, अंग्रेज़ों ने निर्दिष्ट क्षेत्रों में बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने और उनके ठहराव को विनियमित करने के लिये नियम बनाए। 
      • इसका उद्देश्य "ब्रिटिश नागरिकों" (भारतीयों) को इन क्षेत्रों में व्यापार करने से रोककर क्राउन के अपने वाणिज्यिक हितों की रक्षा करना था।
    • वर्ष 1950 में भारत सरकार ने "ब्रिटिश नागरिक" शब्द के स्थान पर "भारत के नागरिक" से प्रतिस्थापित कर दिया।

North_east_India

और पढ़ें: इनर लाइन परमिट, पूर्वोत्तर भारत


रैपिड फायर

SEBI ने दोगुनी की FPI प्रकटीकरण सीमा

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिये प्रकटीकरण सीमा को 25,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपए कर दिया है। इस प्रकार, इस सीमा को पार करने वाले FPI को अब लाभकारी स्वामित्व और अन्य प्रमुख निवेश विवरणों का खुलासा करना होगा।

FPI हेतु ग्रैन्युलर थ्रेशोल्ड में वृद्धि:

  • उद्देश्य: बाज़ार की संवृद्धि के साथ विनियमों को संरेखित करना क्योंकि वित्त वर्ष 2022-23 से इक्विटी ट्रेडिंग की मात्रा लगभग दोगुनी हो गई है।
    • इसका उद्देश्य व्यापार को सुकर बनाते हुए पूंजी अंतर्वाह को बढ़ाना और मध्यम और लघु FPI के लिये अनुपालन को सरल बनाना है।
  • FPI: ये ऐसी संस्थाएँ हैं जो अपने पोर्टफोलियो को विविध बनाने और प्रतिफल अर्जित करने के लिये विदेशी बाज़ारों में स्टॉक, बॉण्ड, म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) जैसी प्रतिभूतियों और वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश करती हैं।
  • SEBI: भारत का प्रतिभूति बाज़ार नियामक, 1988 में स्थापित किया गया था और वर्ष 1992 में SEBI अधिनियम, 1992 के तहत इसे सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया। 
    • यह स्टॉक एक्सचेंजों, बाज़ार मध्यस्थों और निवेशक संरक्षण की देखरेख करता है, तथा बाज़ार की पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करता है।

और पढ़ें: FPI के FDI में पुनर्वर्गीकरण हेतु RBI ढाँचा, शेयर बाज़ार विनियमन 


रैपिड फायर

आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स 

संसद ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित कर दिया है , जिसका उद्देश्य आपदा प्रबंधन (DM) अधिनियम, 2005 में संशोधन करना है।

DM अधिनियम, 2005 के प्रमुख संशोधन:

  • आपदा प्रबंधन योजनाएँ: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) अब राष्ट्रीय और राज्य कार्यकारी समितियों के स्थान पर योजनाएँ तैयार करेंगे।
  • विस्तारित भूमिका: इसमें जोखिम मूल्यांकन (जलवायु जोखिम), तकनीकी सहायता, राहत मानक निर्धारित करना और आपदा डेटाबेस का अनुरक्षण करना शामिल किया गया है।
  • NDMA को प्रदत्त विनियामक शक्तियाँ: NDMA को पूर्व केंद्रीय अनुमोदन के साथ अधिनियम के तहत विनियम बनाने, अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या और श्रेणियाँ निर्दिष्ट करने का प्राधिकार दिया गया है।
  • आपदा प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण:
    • आपदा डेटाबेस: अनिवार्य राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय डेटाबेस।
    • नगरीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UDMA): राज्य अपनी राजधानियों और प्रमुख शहरों के लिये इनकी स्थापना कर सकते हैं।
    • राज्य आपदा मोचन बल (SDRF): राज्य SDRF का गठन कर सकते हैं और उनके कार्यों को निर्धारित कर सकते हैं।
  • प्रमुख समितियों को सांविधिक दर्जा:
    • राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC): प्रमुख आपदाओं के लिये नोडल निकाय।
    • उच्च स्तरीय समिति (HLC): राज्यों को वित्तीय सहायता की देखरेख करने में सहायता।
  • NDMA नियुक्तियाँ: केंद्रीय अनुमोदन से अधिकारियों, विशेषज्ञों और सलाहकारों की नियुक्ति की जा सकेगी।

और पढ़ें: आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024 


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