पर्सपेक्टिव: भारत का प्रगतिशील AI इकोसिस्टम | 24 Feb 2025

प्रिलिम्स के लिये:

AI एक्शन समिट, भारत AI मिशन, घरेलू AI इन्फ्रास्ट्रक्चर, जनरेटिव AI संबंधी चुनौतियाँ, AI गवर्नेंस, फाउंडेशनल AI मॉडल, भारत के लिये AI 2030, यूपीआई और AI, डिजीलॉकर, केंद्रीय बजट 2025-26 

मेन्स के लिये:

AI में भारत की प्रगति, भारत में AI संबंधी चुनौतियाँ 

चर्चा में क्यों?

विशेष रूप से पेरिस में आयोजित AI एक्शन समिट, 2025 में प्रधानमंत्री के अभिभाषण के पश्चात्, लोक कल्याण और राष्ट्रीय विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उन्नयन करने में भारत की प्रगति ने ध्यान आकर्षित किया है।  

  • देश नीतिपरक AI प्रथाओं को बढ़ावा देने, आधारभूत मॉडल विकसित करने और डेटा एक्सेस में सुधार करने में महत्त्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। AI में इसके प्रयासों को प्रौद्योगिकी में वैश्विक सहयोग और  सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जाता है ।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक्शन समिट, 2025

  • AI एक्शन समिट एक वैश्विक मंच है जिसमें विश्व के विभिन्न नेता, नीति निर्माता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि AI विनियमन, नैतिकता और समाज में इसकी भूमिका पर चर्चा करने हेतु शामिल होते हैं।
  • पेरिस में AI एक्शन शिखर सम्मेलन, ब्लेचली पार्क शिखर सम्मेलन (UK 2023) और सियोल शिखर सम्मेलन (दक्षिण कोरिया 2024) के बाद तीसरा शिखर सम्मेलन है।
    • ब्लेचली पार्क घोषणा (28 देश): इसमें सुरक्षित, मानव-केंद्रित और उत्तरदायित्वपूर्ण AI की वकालत की गई।
    • सियोल शिखर सम्मेलन (27 राष्ट्र): अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की पुष्टि की गई और AI सुरक्षा संस्थानों के एक नेटवर्क का प्रस्ताव रखा गया।

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और पढ़ें: पेरिस AI शिखर सम्मेलन 2025, कुछ प्रमुख AI टूल 

विभिन्न क्षेत्रों के विकास हेतु भारत किस प्रकार AI का उन्नयन कर रहा है?

  • भारत का AI मिशन: भारत 10,372 करोड़ रुपए के बजट के साथ भारत AI मिशन के माध्यम से अपने AI इकोसिस्टम का उन्नयन कर हा है। इस मिशन के अंतर्गत AI विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPU) तक पहुँच में सुधार, AI-रेडी डेटा सेट विकसित करना और AI एप्लिकेशन विकास का समर्थन करना शामिल है।
    • भारत AI मिशन के अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर छात्रों के लिये फेलोशिप प्रदान कर और समग्र देश में डेटा लैब स्थापित कर कुशल कार्यबल का निर्माण किये जाने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इन प्रयोगशालाओं का उद्देश्य AI से संबंधित नौकरियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के उद्देश्य से युवाओं को डेटा वैज्ञानिक और एनोटेटर के रूप में प्रशिक्षित करना है।
    • इस मिशन में विभिन्न चरणों में स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करने की पहल शामिल है, जिसमें प्रारंभिक चरण से लेकर परिपक्व चरण तक AI क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है।
    • सरकार इंडिया AI मिशन के तहत भारतीय संदर्भ और पूर्वाग्रहों को दृष्टिगत रखते हुए अपना स्वयं का लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) भी विकसित कर रही है।
      • वर्ष 2025 के अंत तक भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं, भाषाओं और संस्कृतियों को पूरा करने के लिये समर्पित एक घरेलू कम्प्यूटेशनल AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किये जाने की उम्मीद है।
      • सरकार इस पहल के लिये अनेकों डेवलपर्स के संपर्क में है, जिसमें प्रारंभिक निधि कृषि, अधिगम अशक्तता और जलवायु परिवर्तन में AI-आधारित ऐप्स को आवंटित की जा रही है।
  • घरेलू GPU और आधारभूत AI प्लेटफॉर्म का विकास: भारत ओपन-सोर्स या लाइसेंस प्राप्त चिपसेट का उपयोग कर 3 से 5 वर्षों के भीतर अपना स्वयं का GPU विकसित करने की योजना बना रहा है।
    • सरकार AI विकास के लिये 18,000 उच्च स्तरीय GPU-आधारित कंप्यूटिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराएगी, जिनमें से 10,000 पहले से ही उपलब्ध हैं।
    • GPU की खरीद भारत AI मिशन के तहत की गई है, इस मिशन के लिये 2025-26 के केंद्रीय बजट में 2,000 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं।
    • एक सर्व सुविधा केंद्र की शुरुआत की जाएगी, जहाँ स्टार्टअप और शोधकर्त्ता 150 रुपए प्रति घंटे की दर पर उच्च-स्तरीय GPU का उपयोग कर सकेंगे, जिसमें अंतिम उपयोगकर्त्ताओं को 40% सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
      • इससे AI विकास के लिये, विशेष रूप से छोटी संस्थाओं और शिक्षाविदों के लिये, कम्प्यूटेशनल पावर तक संवहनीय पहुँच उपलब्ध होगी।
    • NVIDIA के साथ भारत के सहयोग का उद्देश्य डेटा केंद्रों की स्थापना के माध्यम से AI कंप्यूटिंग क्षमताओं को बढ़ाना है।
  • AI एक्शन समिट: भारत और फ्राँस की सह-अध्यक्षता में आयोजित AI एक्शन समिट, 2025 में महत्त्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं। इनमें 400 मिलियन यूरो के निवेश से जनहित AI के लिये एक फाउंडेशन की स्थापना और ऊर्जा-कुशल AI विकास सुनिश्चित करने के लिये सतत् AI के लिये गठबंधन शामिल है।
  • सुरक्षित और नैतिक AI: भारत अपने G-20 प्रेसीडेंसी के दौरान नैतिक AI प्रथाओं पर ज़ोर देकर, ऊर्जा-कुशल समाधानों को बढ़ावा देने और समावेशी विकास को बढ़ावा देकर AI में वैश्विक नेता के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।
    • AI फॉर इंडिया 2030 जैसी पहलों के माध्यम से, भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल अपने सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को आगे बढ़ा रही है, बल्कि ज़िम्मेदार AI विनिमय पर वैश्विक संवाद में भी योगदान दे रही है।
    • वॉटरमार्किंग, डीप फेक संसूचन और मशीन अनलर्निंग जैसे मुद्दों पर शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से परियोजनाएँ परिचालन में हैं।
      • मशीन अनलर्निंग (MUL) नामक तकनीक AI प्रणालियों को उद्देश्यपूर्ण रूप से कुछ डेटा, विशेष रूप से संवेदनशील, अप्रचलित, पूर्वाग्रही या गलत डेटा को हटाने की अनुमति देती है।
  • उत्कृष्टता केंद्र: सरकार ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा और स्मार्ट मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर कई AI उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किये हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य भारत के AI पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाना है।
    • कृषि, स्वास्थ्य और सतत् शहरों के लिये अन्य AI केंद्रों के अलावा, 500 करोड़ रुपए के परिव्यय से शिक्षा में AI के लिये एक नया उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा।
    • सरकार वैश्विक साझेदारों के सहयोग से युवाओं को प्रासंगिक उद्योग कौशल से सुसज्जित करने के लिये पाँच राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केंद्रों की भी योजना बना रही है।
  • AI अवसंरचना का विकास: भारत वैश्विक स्तर पर अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना समाधानों का विस्तार कर रहा है, 18-19 देश आधार  के समान बायोमेट्रिक पहचान प्लेटफॉर्म अपना रहे हैं।
    • UPI का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है, यहाँ तक कि पेरिस में भी खरीदारी और टिकटिंग के लिये, तथा ब्राज़ील जैसे देश भी इसी प्रकार की डिजिटल भुगतान प्रणालियाँ विकसित कर रहे हैं।
    • भारत डेटा स्टोरेज (जैसे, डिजिलॉकर), स्वास्थ्य सेवा (जैसे, डिजिटल मिशन), और AI जैसे क्षेत्रों में अपने डिजिटल समाधान वैश्विक भागीदारों के साथ साझा कर रहा है, विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों को लक्षित कर रहा है।

भारत के समक्ष जनरेटिव AI से संबंधित चुनौतियाँ क्या हैं? 

और पढ़ें: AI व्यवधान संबंधी चुनौतियाँ

AI के क्षेत्र में भारत के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?

  • कंप्यूटेशनल एक्सेस: एक प्रमुख चुनौती बड़े AI मॉडलों से जुड़ी उच्च कंप्यूटेशनल लागत है। जैसे-जैसे मॉडल बढ़ते हैं, वैसे-वैसे व्यय भी बढ़ता जाता है, जिससे भारत में उन्हें व्यापक रूप से अपनाना, विशेष रूप से अनुमान लगाने जैसे कार्यों के लिये, अप्राप्य हो जाता है। उदाहरण के लिये, जनरेटिव AI के बढ़ते उपयोग के कारण वर्ष 2023 और वर्ष 2025 के बीच कंप्यूटिंग की औसत लागत 89% बढ़ने की उम्मीद है।
  • डेटा उपलब्धता: एक और चुनौती विशेष रूप से भारतीय अनुप्रयोगों के लिये AI-तैयार डेटा सेट की कमी है। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और विकसित करने की क्षमता सीमित हो जाती है।
  • विदेशी मॉडलों पर निर्भरता: भारत वर्तमान में विदेशों में विकसित AI मॉडलों पर निर्भर है, जिससे घरेलू तकनीकों का पूरी तरह से लाभ उठाने की क्षमता सीमित हो जाती है। GPT-4 जैसे स्वामित्व मॉडल के लिये लाइसेंसिंग की आवश्यकता होती है, जिससे भारत बाहरी मूल्य निर्धारण और नीतिगत परिवर्तनों पर निर्भर हो जाता है। इस निर्भरता के कारण लागत में वृद्धि हो सकती है और AI अनुप्रयोगों पर नियंत्रण कम हो सकता है।
  • बुनियादी ढाँचा: एक महत्त्वपूर्ण चुनौती आवश्यक AI कंप्यूटिंग शक्ति तक पहुँच बनाने में निहित है। भारत महत्त्वपूर्ण AI चिप्स और GPU के लिये NVIDIA जैसी विदेशी कंपनियों पर निर्भर है, जो AI समाधानों को बढ़ाने में सीमाएँ पैदा करता है। आयातित हार्डवेयर पर यह निर्भरता AI प्रौद्योगिकियों के विकास और परिनियोजन में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
  • विविधता: भारत की विशाल भाषायी, सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता के कारण सभी क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने वाले AI समाधान तैयार करना चुनौतीपूर्ण है। राज्यों में उच्चारण, बोलियों और भाषाओं में भिन्नता के कारण प्रभावी AI अनुप्रयोगों को विकसित करने में जटिलता आती है, विशेष रूप से वाक् पहचान और अनुवाद जैसे क्षेत्रों में। उदाहरण के लिये, देश भर में प्रभावी होने के लिये AI मॉडल को 22 आधिकारिक भाषाओं और कई बोलियों को समायोजित करने की आवश्यकता है।
  • नैतिक मुद्दे: नैतिक चिंताएँ और AI का संभावित दुरुपयोग, जैसे कि डीपफेक या गलत सूचना, महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं। तीव्र प्रगति और दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए, यह सुनिश्चित करना कि AI का उपयोग ज़िम्मेदारी और नैतिक रूप से किया जाए, एक बड़ी चुनौती है। 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित भारत की पहल क्या हैं?

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आगे की राह

  • लागत-प्रभावी मॉडल का विकास करना: उच्च कंप्यूटेशनल लागतों को संबोधित करने के लिये, भारत लागत प्रभावी AI मॉडल और बुनियादी ढाँचे के विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। भारत सरकार 40% सब्सिडी के साथ 100 रुपये प्रति घंटे से कम लागत वाला एक किफायती स्वदेशी AI मॉडल लॉन्च करने की योजना बना रही है , जिससे यह स्टार्टअप और शोधकर्त्ताओं के लिये सुलभ हो सके।
  • डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करना: AI-तैयार डेटासेट के लिये एकीकृत प्लेटफॉर्म बनाकर डेटा उपलब्धता को बढ़ाया जा सकता है। इंडिया AI डेटासेट प्लेटफॉर्म इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जो AI नवाचार के लिये उच्च गुणवत्ता वाले गैर-व्यक्तिगत डेटासेट तक सहज पहुँच प्रदान करता है। 
  • संप्रभुता की रक्षा: विदेशी मॉडलों पर निर्भरता कम करने के लिये एक संप्रभु आधारभूत AI मॉडल विकसित करना महत्त्वपूर्ण है। इंडिया AI मिशन का लक्ष्य ऐसा मॉडल बनाना है, जो भारत की विविध भाषायी और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके। 
  • बुनियादी ढाँचे का विकास: कम्प्यूटेशनल बुनियादी ढाँचे की सीमाओं को दूर करने के लिये, भारत को अपनी स्वयं की AI कंप्यूटिंग शक्ति के निर्माण में निवेश करने की आवश्यकता है। सरकार AI अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिये अगले 18-24 महीनों के भीतर 10,000 GPU खरीदने की योजना बना रही है।
  • समावेशी मॉडल: भारत के भाषायी, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य में विविधता को संबोधित करने के लिये स्थानीय संदर्भों के अनुरूप AI समाधानों की आवश्यकता है। भारत के लिये AI 2030 पहल देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने की जरूरतों को पूरा करने के लिये समावेशी और ज़िम्मेदार AI अपनाने पर ज़ोर देती है।
  • नैतिक AI: AI के नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए मज़बूत दिशानिर्देश और रूपरेखा स्थापित करना आवश्यक है। नीति आयोग द्वारा तैयार भारत का सभी के लिये उत्तरदायी AI ढाँचा AI शासन के लिये एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। 

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न 1. विकास की वर्तमान स्थिति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है? (2020)

  1. औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना 
  2.  सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना 
  3.  रोगों का निदान 
  4.  टेक्स्ट-से-स्पीच (Text-to-Speech) में परिवर्तन 
  5.  विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1, 2, 3 और 5
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: (b)


मेन्स:

प्रश्न. कृत्रिम बुद्धि (ए.आई.) की अवधारणा का परिचय दीजिये। ए.आई. क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में ए.आई. के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं?