अपशिष्ट का पृथक्करण और अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र | 25 Feb 2025

प्रिलिम्स के लिये:

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र, घरेलू खतरनाक अपशिष्ट, बायोगैस, बायोसीएनजी, सिंथेटिक गैस, अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (RDF), मीथेन, वृत्तीय अर्थव्यवस्था, ग्रीनहाउस गैस (GHG)

मेन्स के लिये:

पर्यावरण संरक्षण में स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण और अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों का महत्व। 

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने स्रोत पर अपशिष्ट का उचित पृथक्करण के महत्त्व पर ज़ोर दिया तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (SWM नियम, 2016) के अनुसार स्रोत पर अपशिष्ट का पृथक्करण के कार्यान्वयन पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) राज्यों से सवाल पूछे।

  • सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को अपशिष्ट से ऊर्जा निर्मित करने वाले संयंत्रों के सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
  • नोट: NCR में दिल्ली और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ ज़िले शामिल हैं।

और पढ़ें..ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 क्या हैं?

स्रोत पर अपशिष्ट का उचित पृथक्करण क्या है?

  • परिचय: यह घरों, उद्योगों, व्यवसायों और अन्य मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न किसी भी प्रकार के कूड़ा, कचरा या अपशिष्ट सामग्री को संदर्भित करता है।
    • पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को रोकने के लिये इनका उचित प्रबंधन आवश्यक है।
  • स्रोत पर अपशिष्ट का पृथक्करण: यह उचित निपटान, पुनर्चक्रण और प्रबंधन की सुविधा के लिये  उत्पादन स्थल पर अपशिष्ट की पहचान, वर्गीकरण, विभाजन की प्रक्रिया को संदर्भित करता है।
    • यह अपशिष्ट को उसके जैविक, भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर वर्गीकृत करता है
  • SWM नियम, 2016 में प्रावधान: SWM नियम, 2016 अपशिष्ट को तीन श्रेणियों अर्थात बायोडिग्रेडेबल, नॉन-बायोडिग्रेडेबल और घरेलू खतरनाक अपशिष्ट में वर्गीकृत करता है।
    • जैवनिम्नीकरणीय: जैविक अपशिष्ट जिन्हें सूक्ष्म जीवों द्वारा सरल और स्थिर यौगिकों में विघटित किया जा सकता है, जैसे खाद्य अवशेष, गंदे रैपर, कागज़ आदि।
    • गैर-जैवनिम्नीकरणीय: पुनर्चक्रणीय/गैर-पुनर्चक्रणीय वस्तुएँ जैसे प्लास्टिक, काँच, धातु आदि।
  • घरेलू खतरनाक अपशिष्ट: डायपर, नैपकिन, मच्छर निरोधक, सफाई एजेंट आदि।

Waste_Segregation

  • महत्त्व:
    • प्रदूषण को रोकता है: खतरनाक और गैर-खतरनाक अपशिष्ट को पृथक करता है, जिससे प्रदूषण कम होता है।
    • लैंडफिल अपशिष्ट को कम करता है: केवल गैर-पुनर्चक्रणीय अपशिष्ट को ही लैंडफिल में भेजा है।
    • पुनर्चक्रण को बढ़ाता है: संसाधन पुनर्प्राप्ति में सुधार करता है और कच्चे माल के उपयोग को कम करता है। कंपोस्ट निर्माण, पुनर्चक्रण और अपशिष्ट उपचार को सक्षम बनाता है।
    • स्वास्थ्य जोखिम को कम करता है: चिकित्सा और खतरनाक अपशिष्ट से होने वाली बीमारियों को रोकता है।
    • उत्तरदायित्व को बढ़ावा देता है: अपशिष्ट प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।

ठोस अपशिष्ट उत्पादन 

  • CPCB की वर्ष 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उत्पन्न ठोस अपशिष्ट की औसत मात्रा 1,70,338 टन प्रति दिन (TPD) है, जिसमें से 91,512 TPD का उपचार किया जाता है।
  • दिल्ली में प्रतिदिन 11,000 मीट्रिक टन से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जबकि अपशिष्ट उपचार संयंत्र केवल 8,073 मीट्रिक टन ही संसाधित कर सकते हैं।
  • वित्त वर्ष 2014-15 में, भारत ने अपने कुल अपशिष्ट का केवल 18% ही संसाधित किया, जो वित्त वर्ष 2024 में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 78% से अधिक हो गया।

अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र क्या है?

  • परिचय: अपशिष्ट से ऊर्जा (WtE) संयंत्र, नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट (MSW) को विभिन्न प्रौद्योगिकियों जैसे कि पायरोलिसिस, अवायवीय अपघटन आदि के माध्यम से विद्युत्, ऊष्मा या ईंधन के रूप में ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
  • SWM नियम, 2016 में संबंधित प्रावधान: 
    • गैर-पुनर्चक्रणीय अपशिष्ट का उपयोग: 1500 किलोकैलोरी/किग्रा या इससे अधिक कैलोरी मान वाले अपशिष्ट का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिये किया जाना चाहिये तथा उसे लैंडफिल में नहीं निपटाया जा सकता है।
      • उच्च कैलोरी वाले अपशिष्ट को सीमेंट या ताप विद्युत संयंत्रों में सह-प्रसंस्कृत किया जाना चाहिये।
    • RDF का अनिवार्य उपयोग: ईंधन का उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों और ठोस अपशिष्ट आधारित अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (RDF) संयंत्र के 100 किमी. के भीतर स्थित इकाइयों, को अपने ईंधन का कम से कम 5% RDF से प्रतिस्थापित करना होगा ।
      • RDF का निर्माण नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट से गैर-दहनशील पदार्थों को हटाकर किया जाता है, जिससे प्लास्टिक, कागज़, वस्त्र और बायोमास शेष रह जाते हैं।
  • WtE रूपांतरण की विधियाँ:
    • भस्मीकरण: अपशिष्ट का अत्यंत उच्च तापमान पर दहन किया जाता है, जिससे ऊष्मा उत्पन्न होती है और टर्बाइनों के चक्रण हेतु वाष्प उत्पन्न होती है एवं अंततः विद्युत का उत्पादन होता है। 
    • गैसीकरण: जैव ईंधन को बिना दहन के उच्च तापमान पर प्रसंस्कृत कर सिंथेटिक गैस (सिनगैस) का उत्पादन किया जाता है, जो विद्युत उत्पादन या औद्योगिक उपयोग के लिये ईंधन के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।
    • अवायवीय अपघटन: सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन रहित वातावरण में कार्बनिक अपशिष्ट को विघटित करते हैं, जिससे मीथेन युक्त बायोगैस उत्पन्न होती है।
    • किण्वन और आसवन: कार्बनिक बायोमास को किण्वित और आसवित कर इथेनॉल बनाया जाता है, जो इंजनों के लिये एक वैकल्पिक ईंधन है।
    • पायरोलिसिस: यह एक ऊष्मरासायनिक प्रक्रम है जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में उच्च तापमान पर अपशिष्ट को स्वच्छ तरल ईंधन (जैव-तेल, सिंथेटिक गैस और चारकोल) में परिवर्तित करती है।
    • लैंडफिल गैस रिकवरी: लैंडफिल से उत्सर्जित मीथेन और अन्य गैसों को ब्लोअर और वैक्यूम का उपयोग कर कूपों के माध्यम से प्रग्रहण कर लिया जाता है, फिर ऊर्जा उत्पादन के लिये उनका उपचार किया जाता है।
  • महत्त्व:
    • अपशिष्ट का उपयोग: ये संयंत्र अपशिष्ट को ऊष्मा और विद्युत में परिवर्तित करता है, जिससे जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता कम हो जाती है।
    • लैंडफिलिंग में कमी: इसके अतिरिक्त यह लैंडफिल अपशिष्ट और संबंधित पर्यावरणीय जोखिम जैसे उत्सर्जन, भूमि उपयोग और भूजल संदूषण को कम करता है।
    • संसाधन पुनर्प्राप्ति: इसके उपयोग से भस्मीकरण के पश्चात् धातु पुनर्प्राप्ति संभव होता है और वृत्तीय अर्थव्यवस्था में मूल्यवान सामग्रियों की उपस्थिति बनी रहती है।
    • ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी: लैंडफिल से मीथेन उत्सर्जन होता है, जो एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस (GHG) है, जबकि अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में अपशिष्ट का अल्प उत्सर्जन होता है।

SWM मसौदा नियम, 2024

  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार द्वारा SWM मसौदा नियम, 2024 जारी किये गए।
  • प्रमुख प्रावधान:
    • जुर्माने का प्रावधान: इसमें 'सफाई कर्मचारियों' को पृथक्करण नियमों की अनदेखी किये जाने पर असंयोजित अपशिष्ट तथा कूड़ा संग्रहण पर जुर्माना एवं दंड लगाने का अधिकार दिये जाने का प्रावधान है। 
    • ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण: इसमें उत्पन्न अपशिष्ट को चार अलग-अलग श्रेणियों में संग्रहित करने का प्रावधान है अर्थात् गीला अपशिष्ट, सूखा अपशिष्ट, सैनिटरी अपशिष्ट और विशेष देखभाल अपशिष्ट।
    • कृषि अपशिष्ट प्रबंधन: ग्राम पंचायतों को कृषि अपशिष्ट को खुले में जलाने से रोकने के साथ पराली जलाने पर जुर्माना लगाना चाहिये तथा कृषि-अवशेषों के संग्रहण एवं भंडारण की सुविधा प्रदान करनी चाहिये।

निष्कर्ष

स्रोत पर पृथक्करण और अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन के साथ प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, धारणीय शहरी विकास हेतु महत्त्वपूर्ण है। SWM नियम, 2016 से एक रूपरेखा तो मिलती है लेकिन इसके प्रवर्तन में चुनौतियों के साथ अनौपचारिक क्षेत्र के एकीकरण तथा अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों से जुड़ी पर्यावरण संबंधी चिंताओं से इस क्षेत्र में सख्त निगरानी एवं विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रसंस्करण की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है।

दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न:

प्रश्न: भारत की अपशिष्ट प्रबंधन रणनीति के क्रम में अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्रों की भूमिका का विश्लेषण कीजिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है? (2019)

(a) अपशिष्ट उत्पादक को पाँच कोटियों में अपशिष्ट अलग-अलग करने होंगे।
(b) ये नियम केवल अधिसूचित नगरीय स्थानीय निकायों, अधिसूचित नगरों तथा सभी औद्योगिक नगरों पर ही लागू होंगे।
(c) इन नियमों में अपशिष्ट भराव स्थलों तथा अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के लिये सटीक और ब्यौरेवार मानदंड उपबंधित हैं।
(d) अपशिष्ट उत्पादक के लिये यह आज्ञापक होगा कि किसी एक ज़िले में उत्पादित अपशिष्ट, किसी अन्य ज़िले में न ले जाया जाए।

उत्तर: (c)


मेन्स:

प्रश्न. निरंतर उत्पन्न किये जा रहे, फेंके गए ठोस कचरे की विशाल मात्राओं का निस्तारण करने में क्या-क्या बाधाएँ हैं? हम अपने रहने योग्य परिवेश में जमा होते जा रहे ज़हरीले अपशिष्टों को सुरक्षित रूप से किस प्रकार हटा सकते हैं? (2018)

प्रश्न. "जल, सफाई एवं स्वच्छता की आवश्यकता को लक्षित करने वाली नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिये लाभार्थी वर्गों की पहचान को प्रत्याशित परिणामों के साथ जोड़ना होगा।" 'वाश' योजना के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिये। (2017)