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कृषि

कृषि क्षेत्र का मशीनीकरण

  • 03 Apr 2025
  • 15 min read

प्रिलिम्स के लिये:

कृषि, संशोधित ब्याज अनुदान योजना, कृषि मशीनीकरण पर उप मिशन (SMAM), बागवानी फसलें, ICAR 

मेन्स के लिये:

भारत में कृषि क्षेत्र का मशीनीकरण, इसकी स्थिति, स्वीकरण के लाभ और चुनौतियाँ, प्रमुख कृषि पहल और उनके कार्यान्वयन की स्थिति, कृषि संबंधित कार्यक्रम और आगे की राह

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

भारत में कृषि क्षेत्र के मशीनीकरण में, जो एक समय में मुख्यतः ट्रैक्टरों के उपयोग पर आधारित था, वर्तमान में आमूलचूल परिवर्तन हो रहे हैं। आधुनिक कृषि मांगों को पूरा करने के लिये स्मार्ट मशीनरी, स्वचालन और सटीक उपकरणों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

कृषि क्षेत्र का मशीनीकरण क्या है?

  • कृषि क्षेत्र के मशीनीकरण के अंतर्गत उत्पादकता में सुधार, दक्षता में वृद्धि, तथा कृषि कार्यों में शारीरिक श्रम पर निर्भरता कम करने के लिये हार्वेस्टर और आधुनिक उपकरणों जैसी मशीनों का उपयोग करना शामिल है।
  • कृषि क्षेत्र के मशीनीकरण में उभरती प्रौद्योगिकियाँ:
    • परिशुद्ध कृषि: परिशुद्ध कृषि में मृदा और जलवायु स्थितियों के आधार पर संसाधन उपयोग (जल, उर्वरक, पीड़कनाशी) को अनुकूलित करने के लिये GPS, IoT, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाता है।
    • कृषि में ड्रोन: ड्रोन का उपयोग फसल निगरानी, पीड़कनाशी के छिड़काव और उपज अनुमान के लिये किया जाता है। वैश्विक ड्रोन आयात में भारत की हिस्सेदारी 22% है। 
      • ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को किराये की सेवाएँ प्रदान करने, मशीनीकरण और ग्रामीण रोज़गार को बढ़ावा देने के लिये 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराना है।
    • स्वायत्त मशीनरी: चालक रहित ट्रैक्टर और रोबोट हार्वेस्टर मानव की न्यूनतम आवश्यकता के साथ बीजारोपण, छिड़काव और कटाई जैसे कार्य करते हैं।
    • कृषि रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: कृषि क्षेत्र में रोबोटों के उपयोग से बुवाई, सिंचाई, निराई और कटाई में स्वंयचालित क्रिया सक्षम हुई है, जिससे लागत कम हुई है और दक्षता में वृद्धि हुई है। 
  • कृषि क्षेत्र के मशीनीकरण का स्तर: भारत में कृषि क्षेत्र के मशीनीकरण का कुल स्तर लगभग 47% है। पंजाब और हरियाणा में 40-45% मशीनीकरण है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में मशीनीकरण नगण्य है।
    • गेहूँ और चावल जैसी अनाज फसलों में लगभग 50-60% योगदान मशीनीकरण का है, जबकि बागवानी में मशीनों का उपयोग कम है।
    • वैश्विक स्तर: वैश्विक स्तर पर, विकसित देशों में मशीनीकरण का स्तर 90% से अधिक है, जबकि अविकसित क्षेत्र, विशेष रूप से अफ्रीका और दक्षिण एशिया, वर्तमान में भी शारीरिक श्रम पर निर्भर हैं। विकासशील देशों में चीन (60%) और ब्राज़ील (75%) अग्रणी हैं।

कृषि क्षेत्र के मशीनीकरण का मुख्य महत्त्व क्या है?

  • इनपुट बचत: ICAR की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि क्षेत्र में मशीनों का उपयोग करने से बीज और उर्वरकों पर 15-20% की बचत होती है, जिससे इनपुट लागत कम हो जाती है, जबकि फसल की गहनता 5-20% बढ़ जाती है। 
  • उच्च दक्षता: इससे श्रम दक्षता में भी सुधार होता है और कृषि कार्य समय में 15-20% की कटौती होती है, जिससे कृषि में उत्पादकता और संधारणीयता बढ़ती है।

Impact_Of_Mechnization_on_Farm_Yield

  • भूमि का कुशल उपयोग: रोटावेटर और सबसॉइलर जैसे उन्नत जुताई उपकरण सघन मृदा को भुरभुरा बना कर कठोर भूमि को कृषि योग्य बनाते हैं, इसी प्रकार यंत्रीकृत सिंचाई से जल का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है, तथा शुष्क या असमान भूभाग भी उत्पादक कृषि भूमि में परिवर्तित हो जाती है।

भारत में कृषि क्षेत्र के मशीनीकरण की क्या आवश्यकता है?

  • खाद्य की बढ़ती मांग: भारत की जनसंख्या वर्ष 2048 तक 1.6 बिलियन होने और वर्ष 2050 तक वैश्विक खाद्य मांग में 60% की वृद्धि (FAO) होने की उम्मीद के साथ, सीमित भूमि, जल अभाव, मानसून पर निर्भरता और अल्प मशीनीकरण संधारणीय कृषि विकास के समक्ष चुनौतियाँ हैं।
  • अल्प कुशल कृषि: भारत की 46.1% आबादी कृषि में संलग्न है, लेकिन सकल घरेलू उत्पाद (आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25) में इसका योगदान केवल 16% है, जो अक्षमताओं को उजागर करता है। मशीनीकरण की सहायता से उत्पादकता बढ़ाकर, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करके और संधारणीयता सुनिश्चित करके इस अंतराल को कम किया जा सकता है।
  • श्रम अभाव और नगरीकरण: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्ष 2050 तक भारत की 50% से अधिक आबादी नगरों में निवास करेगी, जिससे कृषि श्रम की उपलब्धता कम हो जाएगी। अन्य क्षेत्रों में उभरते अवसर और मनरेगा जैसी योजनाओं से कार्यबल का प्रवास और अधिक तीव्र हो गया है। कृषि उत्पादकता को बनाए रखने के लिये मशीनीकरण आवश्यक है।
  • सिंचाई संबंधी चुनौतियाँ: भारत की केवल 53% कृषि योग्य भूमि ही सिंचाई के अंतर्गत है, अतः वर्षा आधारित कृषि जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील बनी हुई है। मशीनीकरण से समय पर बुवाई और कटाई सुनिश्चित होती है, जिससे कार्यकुशलता बढ़ती है और जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में फसल की क्षति कम होती है।

Smart_Farms

कृषि मशीनीकरण में वैश्विक रुझान

  • कनाडा और अमेरिका: यहाँ इनमें 95% मशीनीकरण है, तथा ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और जुताई उपकरणों में भारी पूंजी निवेश किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में अब एक किसान 144 लोगों को भोजन उपलब्ध कराता है, जबकि वर्ष 1960 में यह संख्या 26 थी। सरकारी सहायता में कम ब्याज वाले ऋण, प्रत्यक्ष सब्सिडी और मूल्य समर्थन शामिल हैं।
  • फ्राँस: यहाँ मशीनीकरण 99% है, यहाँ 680,000 उच्च मशीनीकृत जोत हैं और कृषि उपकरण बाज़ार का मूल्य 6.3 बिलियन यूरो है। किसानों को यूरोपीय संघ से 50% आय के बराबर सब्सिडी मिलती है, जो निर्यात और मशीनरी आयात को सहायता प्रदान करती है।
  • जापान: यहाँ मशीनीकरण उच्च है, प्रति हेक्टेयर 7 HP ट्रैक्टर की शक्ति है, जो अमेरिका और फ्राँस के समतुल्य है। यह घरेलू कृषि की सुरक्षा के लिये सब्सिडी और उच्च आयात शुल्क प्रदान करता है।

भारत में कृषि मशीनीकरण में क्या चुनौतियाँ हैं?

  • लघु एवं खंडित भूमि जोत: भारत में औसत कृषि आकार 1.16 हेक्टेयर है (यूरोपीय संघ में 14 हेक्टेयर और अमेरिका में 170 हेक्टेयर की तुलना में), छोटे किसानों के लिये मशीनीकरण आर्थिक रूप से अव्यवहारिक बना हुआ है।
    • लघु, खंडित जोतों के लिये मशीनरी की कमी मशीनीकरण को सीमित करती है। 
    • लघु जोतों (<2 हेक्टेयर) में पावर टिलर का उपयोग किया जाता है; मध्यम जोतों (2-10 हेक्टेयर) में 30-50 HP ट्रैक्टर और रोटावेटर का उपयोग किया जाता है; वृहद् जोतों (>10 हेक्टेयर) में कंबाइन हार्वेस्टर और लेजर लैंड लेवलर जैसे उन्नत उपकरण अपनाए जाते हैं।
  • वित्तीय बाधाएँ: कृषि मशीनरी महँगी हैं, और सीमित वित्तीय पहुँच के कारण छोटे किसान इसे वहन करने में संघर्ष करते हैं। यद्यपि 90% ट्रैक्टरों को वित्तपोषित किया जाता है, लेकिन सख्त ऋण मानदंड और उच्च लागत के कारण मशीनीकरण कठिन हो जाता है।
  • उपकरण की निम्न गुणवत्ता: भारतीय किसानों के पास उन्नत मशीनरी तक सीमित पहुँच है, और उपलब्ध अधिकांश उपकरण निम्न गुणवत्ता के हैं, जिससे उच्च परिचालन लागत और अक्षमता होती है।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ: पर्वतीय कृषि (कृषि योग्य भूमि का 20%) और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भौगोलिक चुनौतियों, उपयुक्त उपकरणों की कमी और कमज़ोर नीतिगत समर्थन के कारण मशीनीकरण कम है।

आगे की राह

  • भूमि चकबंदी और कस्टम हायरिंग: कुशल मशीनीकरण के लिये भूमि चकबंदी को प्रोत्साहित करना और छोटे किसानों को कम्बाइन हार्वेस्टर और चावल ट्रांसप्लांटर जैसी महँगी मशीनरी उपलब्ध कराने के लिये कस्टम हायरिंग केंद्रों (CHC) को मज़बूत करना।
  • प्रौद्योगिकी और वित्तीय पहुँच: कम मशीनीकरण वाले क्षेत्रों में कृषि मशीनरी बैंकों की स्थापना करते हुए कृषि मशीनरी अपनाने के लिये सब्सिडी, कम ब्याज दर पर ऋण और कर प्रोत्साहन सुनिश्चित करना।
  • अनुसंधान एवं विकास, मानकीकरण एवं प्रशिक्षण: किसान-उद्योग सहयोग को बढ़ावा देना, गुणवत्ता मानकों एवं परीक्षण को लागू करना, तथा कुशल मशीनरी उपयोग एवं रखरखाव के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • समावेशी मशीनीकरण: सभी क्षेत्रों में मशीनीकरण के लाभ को बढ़ाने के लिये पर्वतीय, वर्षा आधारित और बागवानी कृषि के लिये विशिष्ट मशीनरी का विकास करना।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न: भारत में कृषि मशीनीकरण की चुनौतियों पर चर्चा कीजिये और इसे बढ़ावा देने के लिये उठाए गए सरकारी पहलों का मूल्यांकन कीजिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष प्रश्न  

प्रिलिम्स

प्रश्न . जलवायु-अनुकूल कृषि (क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर) के लिये भारत की तैयारी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-

  1. भारत में ‘जलवायु-स्मार्ट ग्राम (क्लाइमेट-स्मार्ट विलेज)’ दृष्टिकोण, अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान कार्यक्रम-जलवायु परिवर्तन, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा (सी.सी.ए.एफ.एस.) द्वारा संचालित परियोजना का एक भाग है।
  2.   सी.सी.ए.एफ.एस. परियोजना, अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान हेतु परामर्शदात्री समूह (सी.जी.आई.ए.आर.) के अधीन संचालित किया जाता है, जिसका मुख्यालय प्राँस में है।
  3.   भारत में स्थित अंतर्राष्ट्रीय अर्धशुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (आई.सी.आर.आई.एस.ए.टी.), सी.जी.आई.ए.आर. के अनुसंधान केंद्रों में से एक है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2           
(b)  केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर:(d)


प्रश्न. भारत में, निम्नलिखित में से किन्हें कृषि में सार्वजनिक निवेश माना जा सकता है? (2020) 

  1. सभी फसलों के कृषि उत्पाद के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करना
  2.  प्राथमिक कृषि साख समितियों का कंप्यूटरीकरण
  3.  सामाजिक पूँजी विकास
  4.  कृषकों को निशुल्क बिजली की आपूर्ति
  5.  बैंकिंग प्रणाली द्वारा कृषि ऋण की माफी
  6.  सरकारों द्वारा शीतागार सुविधाओं को स्थापित करना

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1,2 और 5
(b) केवल 1,3, 4 और 5
(c) केवल 2, 3 और 6
(d) 1, 2, 3, 4, 5 और 6

उत्तर: (c)

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