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कोसी मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार की कोसी मेची अंत:राज्यीय लिंक परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) के अंतर्गत शामिल करने को मंजूरी दी।
मुख्य बिंदु
- परियोजना के बारे में:
- इस परियोजना के तहत कोसी नदी के अतिरिक्त जल को बिहार में महानंदा नदी बेसिन तक प्रवाहित किया जाएगा।
- इस परियोजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर (EKMC) का पुनर्निर्माण किया जाएगा, और इसे मेची नदी तक विस्तारित किया जाएगा।
- पूर्वी कोसी मुख्य नहर भारत और नेपाल की संयुक्त कोसी परियोजना (1954) का एक हिस्सा है, जिसे कोसी नदी द्वारा बार-बार अपना मार्ग बदलने की समस्या के समाधान के लिये बनाया गया था।
- उद्देश्य:
- इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिहार में सिंचाई की क्षमता को बढ़ाना है।
- विशेष रूप से, यह योजना बिहार के अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार ज़िलों में खरीफ मौसम के दौरान 2,10,516 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधाएँ प्रदान करेगी।
- केंद्रीय सहायता की मंजूरी:
- इस परियोजना के लिये 6,282.32 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत निर्धारित की गई है, जिसमें से बिहार को 3,652.56 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता मंजूर की गई है।
- यह राशि परियोजना के विकास और इसके विभिन्न घटकों के कार्यान्वयन में सहायता करेगी।
- समयसीमा:
- इस परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- इस परियोजना के पूरा होने पर बिहार में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
- यह वर्ष 2015 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना (कोर योजना) है। केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी 75:25 प्रतिशत में होगी। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और पहाड़ी राज्यों के मामले में यह अनुपात 90:10 रहेगा।
- इससे ढाई लाख अनुसूचित जाति और दो लाख अनुसूचित जनजाति के किसानों सहित लगभग 22 लाख किसानों को लाभ होगा।
- जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2020 में PMKSY के तहत परियोजनाओं के घटकों की जियो-टैगिंग हेतु एक मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया।
- इसके तीन मुख्य घटक हैं- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP) और वाटरशेड डेवलपमेंट।
- वर्ष 1996 में AIBP को राज्यों की संसाधन क्षमताओं से अधिक सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
- उद्देश्य:
- क्षेत्रीय स्तर पर सिंचाई में निवेश का अभिसरण,
- सुनिश्चित सिंचाई के तहत खेती योग्य क्षेत्र का विस्तार करना (हर खेत को पानी),
- पानी की बर्बादी को कम करने के लिये ऑन-फार्म जल उपयोग दक्षता में सुधार,
- ‘जलभृत’ (Aquifers) के पुनर्भरण को बढ़ाने के लिये और पेरी-अर्बन कृषि के लिये उपचारित नगरपालिका आधारित पानी के पुन: उपयोग की व्यवहार्यता की खोज करके स्थायी जल संरक्षण प्रथाओं को शुरू करना और एक परिशुद्ध सिंचाई प्रणाली में अधिक-से-अधिक निजी निवेश को आकर्षित करना।
कोसी और मेची नदियाँ
- कोसी नदी: इसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है। इसका उद्गम हिमालय में समुद्र तल से 7,000 मीटर ऊपर माउंट एवरेस्ट और कंचनजंगा के जलग्रहण क्षेत्र से होता है।
- कोसी नदी अपने मार्ग को बदलने और पश्चिम की ओर बहने की प्रवृत्ति के लिये प्रसिद्ध है, जो पिछले 200 वर्षों में दरभंगा, सहरसा और पूर्णिया ज़िलों में कृषि क्षेत्र को नष्ट करते हुए 112 किलोमीटर तक चली गई है।
- चीन, नेपाल और भारत से होकर बहती हुई यह नदी हनुमान नगर के पास भारत में प्रवेश करती है तथा बिहार के कटिहार ज़िले में कुरसेला के पास गंगा नदी में मिल जाती है।
- कोसी नदी तीन मुख्य धाराओं सन कोसी, अरुण कोसी और तमूर कोसी के संगम से बनती है।
- सहायक नदियाँ: नदी की कई महत्त्वपूर्ण सहायक नदियाँ हैं, जिनमें त्रिजंगा, भुतही बलान, कमला बलान और बागमती शामिल हैं, जो सभी मैदानी इलाकों से होकर कोसी नदी में मिलती हैं।
- मेची नदी: यह नेपाल और भारत से होकर बहने वाली एक अंतर-सीमा नदी है। यह महानंदा नदी की एक सहायक नदी है।
- मेची नदी एक बारहमासी नदी है, जो नेपाल में महाभारत पर्वतमाला में हिमालय की अंतरीय घाटी से निकलती है और फिर बिहार से होकर किशनगंज ज़िले में महानंदा में मिलती है


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बोधगया मंदिर
चर्चा में क्यों?
बिहार में बोधगया मंदिर अधिनियम (BTA), 1949 को निरस्त करने की मांग को लेकर कई बौद्ध भिक्षु महाबोधि महाविहार (बोधगया मंदिर) में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- मुद्दे के बारे में:
- यह विरोध अखिल भारतीय बौद्ध मंच (AIBF) की अगुवाई में विभिन्न बौद्ध समूहों द्वारा किया जा रहा है।
- उनका विरोध इस एक्ट के तहत बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (BTMC) में हिंदू धर्मावलंबियों को भी सदस्य बनाए जाने के प्रावधान से है।
- बौद्ध भिक्षुओं का कहना है कि मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध समुदाय के हाथों में होना चाहिये।
- बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC)
- बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 के तहत 1953 में बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर के प्रबंधन के लिये BTMC की स्थापना की गई।
- इस समिति में बौद्ध समुदाय के चार और हिंदू समुदाय के चार सदस्य हैं।
- अधिनियम के अनुसार, गया के ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) समिति के पदेन अध्यक्ष हैं।
- बोधगया मंदिर
- बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्थल है।
- यह भगवान बुद्ध के जीवन और विशेष रूप से ज्ञान प्राप्ति से संबंधित है।
- महाबोधि मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद 260 ईसा पूर्व में कराया था।
- यह पूरी तरह से ईंटों से निर्मित सबसे शुरुआती बौद्ध मंदिरों में से एक है।
- इसे वर्ष 2002 से यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।
- चीनी तीर्थयात्री ह्वेन त्सांग ने इस मंदिर का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है।
- वर्तमान मंदिर संरचना का निर्माण गुप्त शासकों द्वारा 5वीं या 6वीं शताब्दी ईस्वी में कराया गया था।

