कोसी मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना | 05 Apr 2025

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार की कोसी मेची अंत:राज्यीय लिंक परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) के अंतर्गत शामिल करने को मंजूरी दी।

मुख्य बिंदु 

  • परियोजना के बारे में:
  • इस परियोजना के तहत कोसी नदी के अतिरिक्त जल को बिहार में महानंदा नदी बेसिन तक प्रवाहित किया जाएगा।
  • इस परियोजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर (EKMC) का पुनर्निर्माण किया जाएगा, और इसे मेची नदी तक विस्तारित किया जाएगा।
  • पूर्वी कोसी मुख्य नहर भारत और नेपाल की संयुक्त कोसी परियोजना (1954) का एक हिस्सा है, जिसे कोसी नदी द्वारा बार-बार अपना मार्ग बदलने की समस्या के समाधान के लिये बनाया गया था।
  • उद्देश्य: 
    • इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिहार में सिंचाई की क्षमता को बढ़ाना है। 
    • विशेष रूप से, यह योजना बिहार के अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार ज़िलों में खरीफ मौसम के दौरान 2,10,516 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधाएँ प्रदान करेगी।
  • केंद्रीय सहायता की मंजूरी:
    • इस परियोजना के लिये 6,282.32 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत निर्धारित की गई है, जिसमें से बिहार को 3,652.56 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता मंजूर की गई है। 
    • यह राशि परियोजना के विकास और इसके विभिन्न घटकों के कार्यान्वयन में सहायता करेगी।
  • समयसीमा:
    • इस परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
    • इस परियोजना के पूरा होने पर बिहार में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)

  • यह वर्ष 2015 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना (कोर योजना) है। केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी 75:25 प्रतिशत में होगी। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और पहाड़ी राज्यों के मामले में यह अनुपात 90:10 रहेगा।
  • जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2020 में PMKSY के तहत परियोजनाओं के घटकों की जियो-टैगिंग हेतु एक मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया।
  • इसके तीन मुख्य घटक हैं- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP) और वाटरशेड डेवलपमेंट। 
    • वर्ष 1996 में AIBP को राज्यों की संसाधन क्षमताओं से अधिक सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। 
  • उद्देश्य:
    • क्षेत्रीय स्तर पर सिंचाई में निवेश का अभिसरण,
    • सुनिश्चित सिंचाई के तहत खेती योग्य क्षेत्र का विस्तार करना (हर खेत को पानी),
    • पानी की बर्बादी को कम करने के लिये ऑन-फार्म जल उपयोग दक्षता में सुधार,
    • ‘जलभृत’ (Aquifers) के पुनर्भरण को बढ़ाने के लिये और पेरी-अर्बन कृषि के लिये उपचारित नगरपालिका आधारित पानी के पुन: उपयोग की व्यवहार्यता की खोज करके स्थायी जल संरक्षण प्रथाओं को शुरू करना और एक परिशुद्ध सिंचाई प्रणाली में अधिक-से-अधिक निजी निवेश को आकर्षित करना।

    कोसी और मेची नदियाँ 

    • कोसी नदी: इसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है। इसका उद्गम हिमालय में समुद्र तल से 7,000 मीटर ऊपर माउंट एवरेस्ट और कंचनजंगा के जलग्रहण क्षेत्र से होता है।
    • कोसी नदी अपने मार्ग को बदलने और पश्चिम की ओर बहने की प्रवृत्ति के लिये प्रसिद्ध है, जो पिछले 200 वर्षों में दरभंगा, सहरसा और पूर्णिया ज़िलों में कृषि क्षेत्र को नष्ट करते हुए 112 किलोमीटर तक चली गई है।
    • चीन, नेपाल और भारत से होकर बहती हुई यह नदी हनुमान नगर के पास भारत में प्रवेश करती है तथा बिहार के कटिहार ज़िले में कुरसेला के पास गंगा नदी में मिल जाती है।
      • कोसी नदी तीन मुख्य धाराओं सन कोसी, अरुण कोसी और तमूर कोसी के संगम से बनती है।
    • सहायक नदियाँ: नदी की कई महत्त्वपूर्ण सहायक नदियाँ हैं, जिनमें त्रिजंगा, भुतही बलान, कमला बलान और बागमती शामिल हैं, जो सभी मैदानी इलाकों से होकर कोसी नदी में मिलती हैं। 

     

    • मेची नदी: यह नेपाल और भारत से होकर बहने वाली एक अंतर-सीमा नदी है। यह महानंदा नदी की एक सहायक नदी है।
      • मेची नदी एक बारहमासी नदी है, जो नेपाल में महाभारत पर्वतमाला में हिमालय की अंतरीय घाटी से निकलती है और फिर बिहार से होकर किशनगंज ज़िले में महानंदा में मिलती है