भारत में खाद्य सब्सिडी का पुनर्मूल्यांकन | 29 Mar 2025

प्रिलिम्स के लिये:

घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013, नीति आयोग, बहुआयामी गरीबी

मेन्स के लिये:

भारत में खाद्य सब्सिडी कार्यक्रमों में सुधार की आवश्यकता, भारत में गरीबी की स्थिति, गरीबी उन्मूलन के लिये सरकारी उपाय।

स्रोत: बिज़नेस लाइन

चर्चा में क्यों?

HCES 2023-24 में आय में वृद्धि, निर्धनता में कमी और खाद्य व्यय में सुधार दर्शाया गया है, जिससे NFSA 2013 के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ा है, जिसके तहत वर्ष 2011-12 के आँकड़ों के आधार पर अभी भी 81 करोड़ लोगों को सब्सिडी वाला खाद्यान्न प्रदान करना शामिल है। 

भारत में गरीबी रेखा का अनुमान

  • तेंदुलकर समिति (2009): इस समिति ने न्यूनतम कैलोरी सेवन के आधार पर गरीबी रेखा को परिभाषित किया। वर्ष 2004-05 की कीमतों के अनुसार, इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिये 27 रुपए प्रतिदिन और शहरी क्षेत्रों के लिये 33 रुपए प्रतिदिन  निर्धारित किया गया। इसने गरीबी मापन के लिये आय और बुनियादी आवश्यकताओं पर ज़ोर दिया।
    • यह मीट्रिक भारत के आधिकारिक रूप से गरीबी मूल्यांकन का आधार बना हुआ है।
  • रंगराजन समिति (2014): गरीबी रेखा को संशोधित करते हुए इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिये 32 रुपए प्रतिदिन और शहरी क्षेत्रों के लिये 47 रुपए प्रतिदिन निर्धारित किया। यह संशोधन व्यापक उपभोग पैटर्न तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न सामाजिक-आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए किया गया।
    • वर्ष 2011-12 के लिये गरीबी दर 29.5% अनुमानित की गई, जबकि तेंदुलकर द्वारा 21.9% का अनुमान लगाया था।
  • इस रिपोर्ट को आधिकारिक योजना या गरीबी अनुमान के लिये नहीं अपनाया जाता है।

भारत में खाद्य सब्सिडी कार्यक्रमों का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता क्यों है?

  • बढ़ती खपत: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 
    • वर्ष 2023-24 में ग्रामीण MPCE बढ़कर 4,122 रुपए हो गया (2011-12 की कीमतों पर 2,079  रुपए से), जो 2011-12 स्तर की तुलना में 45% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि शहरी MPCE बढ़कर 6,996  रुपए हो गया (2011-12 की कीमतों पर 3,632  रुपए से), जो 38% की वृद्धि को दर्शाता है।
  • गरीबी के स्तर में कमी: SBI (2025) के एक हालिया अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2024 में भारत का गरीबी अनुपात 4-4.5% होगा, जिसमें लगभग 6.7 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी की स्थिति में होंगे।
    • मुद्रास्फीति-समायोजित तेंदुलकर गरीबी रेखा रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया कि ग्रामीण गरीबी वित्त वर्ष 2012 (वित्त वर्ष 12) में 25.7% से घटकर वित्त वर्ष 2024 (वित्त वर्ष 24) में 4.86% रह गई, जबकि शहरी गरीबी इसी अवधि में 13.7% से घटकर 4.09% हो गई।
    • भारत में अत्यधिक गरीबी दर 2011-12 में 21.9% से घटकर 2024 में 8.7% (12.9 करोड़ लोग) हो जाएगी (विश्व बैंक) । 
    • MPI के अनुसार, वित्त वर्ष 23 में केवल 11.28% आबादी बहुआयामी गरीबी में रह रही थी।
  • NFSA लाभार्थी कवरेज में विसंगति: NFSA 81 करोड़ लोगों (75% ग्रामीण और 50% शहरी आबादी) को सब्सिडी युक्त भोजन प्रदान करता है । 
  • हालाँकि, वर्तमान में गरीबी लगभग 10% है, जो कवरेज वास्तविक आवश्यकता से अधिक है, यह दर्शाता है कि कई प्राथमिकता प्राप्त परिवार (PHH) लाभार्थियों को वर्तमान में सब्सिडी की आवश्यकता नहीं है।
  • खाद्य सब्सिडी की अवसर लागत: सरकार NFSA पर वार्षिक रूप से 2 लाख करोड़ रुपए व्यय करती है। 
  • लाभार्थी कवरेज को युक्तिसंगत बनाने से रोज़गार सृजन, औद्योगिक विकास और सामाजिक बुनियादी ढाँचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिये संसाधन मुक्त हो सकते हैं।
  • शांता कुमार समिति (2015): इसने सब्सिडी को बेहतर ढंग से लक्षित करने के लिये PDS कवरेज को जनसंख्या के 40% तक कम करने की भी सिफारिश की थी।

HCES 2023-24 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

और पढ़ें: HCES 2023-24 के मुख्य निष्कर्ष

भारत में गरीबी की क्या स्थिति है?

और पढ़ें: भारत में गरीबी

अंत्योदय अन्न योजना (AAY) एवं प्राथमिकता प्राप्त परिवार (PHH)

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत लाभार्थियों को AAY और PHH में वर्गीकृत किया गया है।
  • अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार: AAY भूमिहीन मजदूरों, सीमांत किसानों और दैनिक वेतन भोगियों सहित सबसे गरीब लोगों को कवर करता है। प्रत्येक परिवार को NFSA के तहत प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त होता है।
  • प्राथमिकता प्राप्त परिवार (PHH): PHH में सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के आधार पर राज्यों द्वारा पहचानी गई  कमज़ोर आबादी शामिल होती है।
    • प्रत्येक सदस्य को प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त होता है, जो कुल मिलाकर प्रति परिवार लगभग 20 किलोग्राम होता है (औसत आकार: 4.2)।
  • कवरेज: AAY लगभग 9 करोड़ लोगों को कवर करता है, जबकि PHH 72 करोड़ लोगों को कवर करता है, जिससे NFSA के कुल लाभार्थियों की संख्या 81 करोड़ हो जाती है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 क्या है?

पढ़ने के लिये क्लिक करें: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में संशोधन: नीति आयोग

खाद्य सब्सिडी कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है?

  • डेटा-आधारित लक्ष्यीकरण: HCES 2023-24 डेटा का उपयोग करके, वर्तमान गरीबी स्तर के आधार पर NFSA लाभार्थी सूचियों को तर्कसंगत बनाया जा सकता है। 
    • समावेशन और बहिष्करण मानदंड निर्धारित करने से यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी कि केवल ऐसे व्यक्ति ही लाभ प्राप्त करें जिन्हें वास्तव में सहायता की आवश्यकता है।
  • खाद्य सब्सिडी में क्रमिक सुधार: अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के अंतर्गत आने वाले परिवारों के लिये खाद्य सब्सिडी जारी रखते हुए, प्राथमिकता प्राप्त परिवारों (PHH) को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) में स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे उन्हें अधिक लचीलापन मिलेगा।
    • गैर-गरीब परिवारों के लिये सब्सिडी वाले खाद्यान्न पर निर्भरता कम करने के लिये चरणबद्ध योजना लागू करना ।
  • प्रौद्योगिकी-आधारित पारदर्शिता: आधार-संलग्न डेटाबेस और AI-आधारित निगरानी का उपयोग करके रिसाव रोकना, साथ ही कर, वाहन और रोज़गार रिकॉर्ड को एकीकृत कर लाभार्थी सूची को अद्यतन करना।
    • पोषण सुरक्षा की ओर बदलाव: सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, जैसे अनीमिया और स्टंटिंग को दूर करने के लिये पोषक तत्त्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों (फलों, सब्ज़ियों, दालों) की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित करना।
      • विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति (2023) के अनुसार, भारत की लगभग 74% आबादी स्वस्थ आहार का व्यय वहन नहीं कर सकती।
  • स्थानीय खरीद DBT के साथ: लाभार्थियों को DBT-लिंक्ड खातों का उपयोग करके स्थानीय बाज़ारों से खाद्य पदार्थ खरीदने की अनुमति देना, जिससे परिवहन लागत में कमी आएगी और वितरण अधिक प्रभावी होगा, जिससे खाद्य सब्सिडी पर व्यय कम होगा।
  • सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) एवं नीतिगत पुनर्संरेखण: न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित करने के लिये प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु UBI या बेरोज़गारी भत्ता लागू किया जाए। 
    • जैसे-जैसे व्यय शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आवास की ओर बढ़ रहा है, खाद्य सुरक्षा नीतियों को व्यापक सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिये अनुकूलित करना चाहिये, जिससे सुलभ आवश्यक सेवाओं के साथ-साथ सस्ते खाद्य पदार्थों तक पहुँच भी सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

गरीबी स्तर में महत्त्वपूर्ण कमी और घरेलू उपभोग क्षमता में वृद्धि के साथ, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के व्यापक कवरेज का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक हो सकता है। खाद्य सब्सिडी कार्यक्रम के अनुकूलन से संसाधनों का पुनर्विनियोजन किया जा सकता है, जिससे रोज़गार सृजन और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत के लिये एक अधिक सतत् और समावेशी कल्याण प्रणाली का मार्ग प्रशस्त होगा।

दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न:

Q. भारत में खाद्य सब्सिडी कार्यक्रमों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता की जाँच कीजिये। खाद्य वितरण में दक्षता और लक्ष्य निर्धारण बढ़ाने के उपाय सुझाइये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष प्रश्न  

प्रीलिम्स:

प्रश्न. UNDP के समर्थन से ‘ऑक्सफोर्ड निर्धनता एवं मानव विकास नेतृत्व’ द्वारा विकसित ‘बहुआयामी निर्धनता सूचकांक’ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से सम्मिलित है/हैं? (2012)

  1. पारिवारिक स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, संपत्ति और सेवाओं से वंचन
  2.   राष्ट्रीय स्तर पर क्रय शक्ति समता
  3.   राष्ट्रीय स्तर पर बजट घाटे की मात्रा और GDP की विकास दर 

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)


मेन्स:

प्रश्न. उच्च संवृद्धि के लगातार अनुभव के बावजूद भारत के मानव विकास के निम्नतम संकेतक चल रहे हैं। उन मुद्दों का परीक्षण कीजिये, जो संतुलित और समावेशी विकास को पकड़ में नहीं आने दे रहे हैं। (2019)