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कृषि

भारत में कपास उत्पादन में गिरावट

  • 02 Apr 2025
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

कपास, बीटी कपास, आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसल, व्हाइटफ्लाई, पिंक बॉलवार्म, कस्तूरी कॉटन

मेन्स के लिये:

भारत के कपास उत्पादन में चुनौतियाँ, कृषि में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका

स्रोत:इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों? 

भारत, जो कभी विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक और निर्यातक था, कपास उत्पादन में तीव्र गिरावट का सामना कर रहा है, जिसका मुख्य कारण तकनीकी प्रगति का अभाव और नीतिगत निष्क्रियता है।

भारत में कपास उत्पादन में गिरावट के क्या कारण हैं?

  • प्रारंभिक वृद्धि: 1970 के दशक में सी.टी. पटेल और बी.एच. कटारकी जैसे भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित संकर कपास किस्मों ने पैदावार में उल्लेखनीय सुधार किया है।
    • बीटी (बैसिलस थुरिंजिएंसिस) कपास, जिसे वर्ष 2002-03 में प्रवर्तित किया गया था, में अमेरिकन बॉलवर्म जैसे कीटों से सुरक्षा के लिये बैसिलस थुरिंजिएंसिस जीवाणु के जीन का उपयोग किया गया था। 
      • वर्ष 2013-14 तक इसने भारत के 95% से अधिक कपास क्षेत्र को कवर कर लिया, जिससे उपज दोगुनी होकर 566 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। इससे भारत को वर्ष 2015-16 तक विश्व का शीर्ष कपास उत्पादक और प्रमुख निर्यातक बनने में मदद मिली।
  • सफलता के बाद स्थिरता: बीटी और बोल्गार्ड-II प्रौद्योगिकियों की सफलता के बावजूद, भारत ने वर्ष 2006 के बाद से किसी भी नई आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसल कपास की किस्मों को मंजूरी नहीं दी है।
    • भारतीय संस्थानों द्वारा विकसित व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवार्म प्रतिरोधी कपास जैसे स्वदेशी नवाचार अभी भी नियामक अनिश्चितता में फंसे हुए हैं। 
    • आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) की मंजूरी के बावजूद बीटी बैंगन पर वर्ष 2010 में लगाई गई रोक ने अन्य GM फसलों के क्षेत्र परीक्षणों को रोकने के लिये एक उदाहरण प्रस्तुत किया, जिससे कपास उत्पादन में सुधार के लिये नई प्रौद्योगिकियों के प्रयोग में बाधा उत्पन्न हुई।
  • संक्रमण: भारत में कपास उत्पादन में गिरावट मुख्य रूप से पिंक बॉलवर्म (PBW) के बढ़ते संक्रमण के कारण है। प्रारंभ में, बीटी कपास ने कीट नियंत्रण में प्रभावी भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ, PBW ने बीटी प्रोटीन के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लिया। 
    • यह कीट अब बुवाई के 40-45 दिन बाद ही फसलों को संक्रमित कर देता है तथा बीजकोषों और पुष्पों को नुकसान पहुँचाता है। 
    • बीटी कपास की विशेष कृषि ने इस प्रतिरोध को बढ़ावा दिया है, जिसके कारण कपास लिंट की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में महत्त्वपूर्ण कमी आई है।
  • उत्पादन पर प्रभाव: भारत का कपास उत्पादन, जो वर्ष 2013-14 में 39.8 मिलियन गाँठ तक पहुँच गया था, वर्ष 2024-25 तक घटकर 29.5 मिलियन गाँठ हो गई है, और पैदावार 450 किलोग्राम/हेक्टेयर से नीचे गिर गई, जो चीन जैसे वैश्विक राष्ट्रों (1993 किलोग्राम/हेक्टेयर) की तुलना में काफी कम है।

Cotton_India

कपास उत्पादन में गिरावट के संबंध में चिंताएँ क्या हैं?

  • आयात पर बढ़ती निर्भरता: कपास का आयात वर्ष 2023-24 में 518.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1.04 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 729.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर से घटकर 660.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
    • उत्पादन में गिरावट के कारण भारत की व्यापारिक स्थिति परिवर्तित हो गई, आयात निर्यात से अधिक हो गया, जिससे वैश्विक कपास बाज़ार में इसकी पिछली प्रतिस्पर्द्धात्मक बढ़त समाप्त हो गई।
  • विरोधाभासी व्यापार और तकनीकी नीतियाँ: राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों से स्वदेशी GM नवाचारों में देरी हुई है अथवा उनकी उपेक्षा की गई है।
    • यद्यपि GM फसलों के क्षेत्र परीक्षण अवरुद्ध हैं, तथापि भारत ने वर्ष 2021 में GM  सोयामील के आयात की अनुमति दे दी है।
    • GM फसलों पर रोक और विनियामक स्पष्टता के अभाव से कपास क्षेत्र में नवाचार बाधित हुआ है। विनियामक निर्णय वैज्ञानिक जोखिम मूल्यांकन पर आधारित न होकर जन भावना और विधिक हस्तक्षेप पर केंद्रित हो गए हैं।
  • वैश्विक बाज़ारों में छूटे अवसर: अमेरिका और ब्राज़ील जैसे देश, व्यापक स्तर पर जैवप्रौद्योगिकी को अपनाकर, निर्यात के उस क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर रहे हैं, जिस पर पूर्व में भारत का प्रभुत्व था।
    • घरेलू वस्त्र उद्योग वर्तमान में विदेशों से कपास की खरीद कर रहे हैं, जिससे इनपुट लागत बढ़ रही है और प्रतिस्पर्द्धा कम हो रही है।
  • कपास के तेल में गिरावट: कपास के बीज खाद्य तेल उत्पादन में योगदान देते हैं, जिससे यह सरसों और सोयाबीन के बाद भारत में तीसरा सबसे बड़ा वनस्पति तेल स्रोत बन गया है।
    • कपास उत्पादन में कमी से तेल उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे भारत की खाद्य तेल आयात पर निर्भरता बढ़ जाती है।

नोट: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के अंतर्गत कपास विकास कार्यक्रम का उद्देश्य प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में कपास उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देना है और इसे वर्ष 2014-15 से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

भारत में कपास उत्पादन बढ़ाने के लिये क्या किया जा सकता है?

  • तकनीकी हस्तक्षेप: कीट प्रतिरोधी और उच्च उपज देने वाली GM कपास संकर किस्मों (जैसे, श्‍वेत मक्षी-रोधी और पिंक बॉलवर्म-रोधी किस्में) को शीघ्रता से विनियामक स्वीकृति प्रदान किये जाने की आवश्यकता है।
  • उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS) को बढ़ावा देना: प्रति इकाई क्षेत्र में पौधों की संख्या बढ़ाने और उपज में सुधार करने के लिये कपास उत्पादक राज्यों में HDPS को अपनाने को बढ़ावा देना चाहिये।
  • किसान-केंद्रित विस्तार सेवाएँ: MSP, मौसम, कीट अलर्ट और खरीद लॉजिस्टिक्स पर वास्तविक समय में अपडेट प्रदान करने हेतु कॉट-एली जैसे प्लेटफॉर्मों का विस्तार किये जाने की आवश्यकता है।
  • पश्च फसल और बाज़ार सुधार: वैश्विक बाज़ारों में गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित करने के लिये क्यूआर-कोड ट्रेसेबिलिटी के साथ “कस्तूरी कॉटन” ब्रांडिंग का विस्तार करने की आवश्यकता है।
    • कपास उत्पादकता के लिये पाँच वर्षीय मिशन (बजट 2025-26 में घोषित) को क्रियान्वित करने की आवश्यकता है, जिससे उपज में वृद्धि हो, संधारणीयता सुनिश्चित हो, तथा अतिरिक्त-लंबे स्टेपल कपास की खेती (जो अपनी बेहतर गुणवत्ता, कोमलता और स्थायित्व के लिये जाना जाता है) को बढ़ावा मिले, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो।
    • समग्र क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने के लिये कपास क्लस्टरों से जुड़े कताई, बुनाई और परिधान क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है।

दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न:

प्रश्न. भारत के कपास उत्पादन पर बीटी कपास के प्रभाव की विवेचना कीजिये और इसकी सफलता में अवरोध के कारणों का विश्लेषण कीजिये। 

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न   

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारत की काली कपासी मृदा का निर्माण किसके अपक्षय के कारण हुआ है? (2021)

(a) भूरी वन मृदा
(b) विदरी ज्वालामुखीय चट्टान
(c) ग्रेनाइट और शिस्ट
(d) शेल और चूना-पत्थर

उत्तर: (b)


प्रश्न. निम्नलिखित विशेषताएँ भारत के एक राज्य की विशिष्टताएँ हैंः (2011)

  1. उसका उत्तरी भाग शुष्क एवं अर्द्धशुष्क है। 
  2. उसके मध्य भाग में कपास का उत्पादन होता है। 
  3. उस राज्य में खाद्य फसलों की तुलना में नकदी फसलों की खेती अधिक होती है।

उपर्युक्त सभी विशिष्टताएँ निम्नलिखित में से किस एक राज्य में पाई जाती हैं?

(a) आंध्र प्रदेश
(b) गुजरात
(c) कर्नाटक
(d) तमिलनाडु

उत्तर: (b)


मेन्स:

प्रश्न. भारत में अत्यधिक विकेंद्रीकृत सूती वस्त्र उद्योग के कारकों का विश्लेषण कीजिये। (2013)

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