कृषि
भारतीय कृषि में AI क्रांति
- 27 Feb 2025
- 11 min read
प्रिलिम्स के लिये:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रोजेक्ट फार्म वाइब्स, पर ड्रॉप मोर क्रॉप, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एग्रीस्टैक इनिशिएटिव, पीएम-वाणी मेन्स के लिये:सतत् कृषि और जलवायु लचीलेपन में AI, डिजिटल कृषि मिशन |
स्रोत: द हिंदू
चर्चा में क्यों?
माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन सत्य नडेला ने हाल ही में महाराष्ट्र के बारामती में प्रोजेक्ट फार्म वाइब्स (PFV) के माध्यम से कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला, जिससे संसाधनों की खपत कम होने के साथ-साथ फसल की उपज में 40% की वृद्धि हुई है।
प्रोजेक्ट फार्म वाइब्स क्या है?
- परिचय: प्रोजेक्ट फार्म वाइब्स, जिसे माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च द्वारा कृषि विकास ट्रस्ट, बारामती (महाराष्ट्र) के साथ मिलकर विकसित किया गया है, कृषि-केंद्रित प्रौद्योगिकियों का एक ओपन-सोर्स AI सूट है, जो डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि के साथ कृषि को बदल रहा है, शोधकर्त्ताओं और किसानों को सशक्त बना रहा है।
- प्रयुक्त प्रौद्योगिकियाँ:
- कृषि के लिये एज़्योर (Azure) डेटा प्रबंधक: क्षेत्र की स्थितियों के समग्र दृश्य के लिये उपग्रह, मौसम और सेंसर डेटा को एकत्रित करता है।
- फार्म वाइब्स.AI: परिशुद्ध कृषि अनुशंसाओं के लिये मृदा की नमी, तापमान, आर्द्रता और pH का विश्लेषण करने के लिये AI का उपयोग करता है।
- एग्रीपायलट.AI: सतत् कृषि के लिये वास्तविक समय, कार्यवाही योग्य जानकारी प्रदान करता है और स्थानीय भाषाओं में व्यक्तिगत सिफारिशें तैयार करता है।
- प्रभाव: फसल उत्पादन में 40% की वृद्धि, तथा अधिक स्वस्थ एवं लचीली फसलें।
- सटीक, AI-निर्देशित स्पॉट निषेचन के माध्यम से उर्वरक लागत में 25% की कमी।
- 50% कम जल खपत, सतत् सिंचाई को बढ़ावा।
- फसल-उपरांत अपव्यय में 12% की कमी, लाभप्रदता में सुधार।
- रासायनिक अपवाह, मृदा अपरदन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वनों की कटाई में कमी आई, जिससे पर्यावरणीय लाभ हुआ।
AI भारतीय कृषि में किस प्रकार क्रांति ला रहा है?
- स्मार्ट सिंचाई: भारतीय कृषि में जल की कमी एक बड़ी चुनौती है। AI सिंचाई कार्यक्रम को अनुकूलित करने के लिये मृदा नमी और जलवायु विश्लेषण के माध्यम से इस मुद्दे को संबोधित कर रहा है।
- "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" योजना के अंतर्गत AI-एकीकृत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली, जल दक्षता में सुधार करती है।
- ICAR द्वारा विकसित IoT-आधारित सिंचाई समाधान, जो वास्तविक समय क्षेत्र की स्थितियों के आधार पर जल आपूर्ति को स्वचालित करता है, जिससे अपव्यय कम होता है।
- कीट एवं खरपतवार नियंत्रण: राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली, जो कीटों की गतिविधि पर नजर रखने और वास्तविक समय पर अलर्ट प्रदान करने के लिये AI का लाभ उठाती है।
- स्वचालित खरपतवार का पता लगाना, जहाँ AI-संचालित कंप्यूटर दृष्टि फसलों से खरपतवारों को पृथक करती है और केवल आवश्यक होने पर ही खरपतवारनाशकों का प्रयोग करती है, जिससे रसायनों का उपयोग कम हो जाता है।
- कृषि में AI का आर्थिक प्रभाव: कृषि बाज़ार में वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मूल्य वर्ष 2023 में 1.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और वर्ष 2028 तक 23.1% की CAGR के साथ इसके 4.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर पहुँचने का अनुमान है, जो परिशुद्ध कृषि, ड्रोन एनालिटिक्स और श्रम प्रबंधन में प्रगति से प्रेरित होगा।
- किसान ई-मित्र, एक AI-संचालित चैटबॉट है जो पीएम किसान सम्मान निधि योजना के बारे में किसानों के प्रश्नों में सहायता करता है।
कृषि क्षेत्र में AI को अपनाने में क्या चुनौतियाँ हैं?
- जागरूकता का अभाव: अनेक किसानों, विशेष रूप से ग्रामीण भारत में, AI-आधारित साधनों का उपयोग करने के लिये डिजिटल साक्षरता का अभाव है, जो बृहद स्तर पर इस प्रौद्योगिकी के अंगीकरण में बाधा उत्पन्न करता है।
- उच्च कार्यान्वयन लागत: ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसर और स्वचालित सिंचाई प्रणाली जैसे AI समाधानों के लिये महत्त्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होती है।
- लघु और सीमांत किसान, जो भारत के कृषक समुदाय में 85% का हिस्सा हैं, सामर्थ्य के अभाव में संघर्ष करते हैं।
- बुनियादी ढाँचे का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी से AI-संचालित प्लेटफॉर्मों तक पहुँच बाधित होती है।
- देश के 5,97618 आवासित गाँवों में से 25067 गाँवों में मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
- डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता: सटीक पूर्वानुमान के लिये AI वास्तविक समय और ऐतिहासिक डेटा पर निर्भर करता है। अपूर्ण या गलत कृषि डेटा AI की प्रभावशीलता को सीमित करता है।
- सीमित अनुकूलन: अधिकांश AI मॉडल भारत की विविध कृषि-जलवायु स्थितियों के अनुरूप नहीं हैं।
- क्षेत्र-विशिष्ट AI समाधान विकसित करने के लिये और अधिक शोध की आवश्यकता है।
आगे की राह
- डेटा फ्रेमवर्क: AgriStack पहल और भारत डिजिटल इकोसिस्टम फॉर एग्रीकल्चर (IDEA) का उपयोग कृषि डेटा प्रबंधन के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में किया जा सकता है, जिससे निर्बाध डेटा एकीकरण के माध्यम से सटीक पूर्वानुमान संभव हो सकेगा।
- भारतीय कृषि के लिये क्षेत्र-विशिष्ट AI समाधान विकसित करने हेतु राष्ट्रीय AI उत्कृष्टता केंद्रों का उपयोग किया जाना चाहिये।
- डिजिटल अवसंरचना: प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (पीएम-वाणी) और भारतनेट परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट ग्रामीण कनेक्टिविटी को बढ़ा सकते हैं, जिससे किसानों को AI-संचालित प्लेटफॉर्मों तक पहुँच प्राप्त हो सकेगी।
- कौशल और जागरूकता: राष्ट्रीय कृषि ई-गवर्नेंस योजना (NeGPA) का उद्देश्य किसानों को AI अनुप्रयोगों के बारे में शिक्षित करना है, जबकि फ्यूचर स्किल्स प्राइम कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि के लिये AI और उभरती प्रौद्योगिकियों में पेशेवरों को पुनः कौशल प्रदान किया जाता है।
- वित्तीय सहायता: कृषि में नवाचार को बढ़ावा देते हुए डिजिटल कृषि मिशन (2021-2025) के तहत, कृषि-तकनीक स्टार्टअप और किसान सहकारी समितियों को रियायती ऋण प्रदान किया जाना चाहिये।
दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. चर्चा कीजिये कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारतीय कृषि को किस प्रकार रूपांतरित कर रही है। कृषि में AI अपनाने से संबंधित मुख्य लाभ और चुनौतियाँ क्या हैं? |
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नप्रिलिम्स:प्रश्न. जलवायु-अनुकूल कृषि (क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर) के लिये भारत की तैयारी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये- (2021)
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? (a) केवल 1 और 2 उत्तर: (d) मेन्स:प्रश्न. भारत में स्वतंत्रता के बाद कृषि में आई विभिन्न प्रकारों की क्रांतियों को स्पष्ट कीजिये। इन क्रांतियों ने भारत में गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा में किस प्रकार सहायता प्रदान की है? (2017) |