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उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 05 Apr 2025
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इथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश प्रथम राज्य बना

चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश ने इथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। पिछले आठ वर्षों में राज्य ने अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 2 बिलियन लीटर प्रति वर्ष कर दिया है और भविष्य में इसे 2.5 बिलियन लीटर प्रति वर्ष तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्य बिंदु

  • लाभ:
    • इथेनॉल उत्पादन की बढ़ोतरी ने गन्ना किसानों को बेहतर मूल्य और आय में वृद्धि हुई है।
    • इथेनॉल उत्पादन से प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना हो रही है, जिससे हज़ारों लोगों को रोज़गार मिल रहा है। इससे ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं।
    • इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने से पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही, वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (नेट जीरो एमिशन) का लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
    • गोंडा ज़िले में एशिया का सबसे बड़ा इथेनॉल प्लांट स्थापित किया गया है और गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिल में भी इथेनॉल उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है। 
  • बायोफ्यूल नीति-2022
    • राज्य सरकार इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) को बढ़ावा देने के लिये एक सुनियोजित बायोफ्यूल नीति-2022 तैयार की। इस नीति का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण को स्वच्छ बनाना है।
    • यह नीति राज्य को जैव ईंधन के प्रमुख हब में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

इथेनॉल के बारे में:

  • परिचय:
    • इथेनॉल, जिसे एथिल एल्कोहल के नाम से भी जाना जाता है, एक जैव ईंधन है जो विभिन्न स्रोतों जैसे गन्ना, मक्का, चावल, गेहूँ एवं बायोमास से उत्पादित होता है।
    • गुड़, चीनी निर्माण का एक उपोत्पाद है, जो आमतौर पर इथेनॉल (निर्जल एल्कोहल) तथा रेक्टिफाइड स्पिरिट के उत्पादन का मुख्य स्रोत है। गुड़ को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
      • A श्रेणी गुड़: प्रारंभिक शर्करा क्रिस्टल निष्कर्षण से प्राप्त एक मध्यवर्ती उपोत्पाद, जिसमें 80-85% शुष्क पदार्थ (DM) होता है।
      • B श्रेणी गुड़: A श्रेणी गुड़ के समान DM सामग्री लेकिन कम चीनी के साथ ही कोई स्वतः क्रिस्टलीकरण नहीं होता है।
      • C श्रेणी गुड़ (ब्लैकस्ट्रैप गुड़, ट्रेकल): चीनी प्रसंस्करण का अंतिम उप-उत्पाद, जिसमें विशेष मात्रा में सुक्रोज़ (लगभग 32% से 42%) होता है। यह क्रिस्टलीकृत नहीं होता है और इसका उपयोग तरल या सूखे रूप में एक वाणिज्यिक फीड घटक के रूप में किया जाता है।
    • उत्पादन प्रक्रिया में खमीर द्वारा शर्करा का किण्वन अथवा एथिलीन हाइड्रेशन जैसी पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से किण्वन शामिल है।
    • इथेनॉल 99.9% शुद्ध एल्कोहल है जिसे स्वच्छ ईंधन विकल्प बनाने के लिये पेट्रोल के साथ मिश्रित किया जा सकता है।
  • इथेनॉल के गुण:
    • इथेनॉल एक स्वच्छ, रंगहीन तरल है जिसमें शराब जैसी गंध एवं तीक्ष्ण स्वाद होता है।
    • यह जल एवं अधिकांश कार्बनिक विलायकों में पूर्णतः घुलनशील है।
    • अपने शुद्ध रूप में इसका क्वथनांक 78.37 डिग्री सेल्सियस और गलनांक -114.14 डिग्री सेल्सियस होता है।
    • इथेनॉल एक ज्वलनशील पदार्थ है और इसका दहन तापमान गैसोलीन की तुलना में कम होता है।
  • इथेनॉल के अनुप्रयोग:
    • पेय पदार्थ: इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जो मादक पेय पदार्थों में पाया जाता है। इसका सेवन बीयर, वाइन एवं स्पिरिट जैसे विभिन्न रूपों में किया जाता है।
    • औद्योगिक विलायक: विभिन्न प्रकार के पदार्थों में विलय होने की अपनी क्षमता के कारण, इथेनॉल का उपयोग फार्मास्यूटिकल्स, इत्र तथा अन्य उत्पादों के निर्माण में विलायक के रूप में किया जाता है।
    • चिकित्सा एवं प्रयोगशाला उपयोग: इथेनॉल का उपयोग चिकित्सा एवं प्रयोगशाला में एंटीसेप्टिक, कीटाणुनाशक तथा परिरक्षक के रूप में किया जाता है।
    • रासायनिक फीडस्टॉक: यह विभिन्न रसायनों के उत्पादन के लिये फीडस्टॉक के रूप में कार्य करता है।
    • ईंधन: इसका उपयोग जैव ईंधन के रूप में किया जाता है और साथ ही इथेनॉल-मिश्रित ईंधन का उत्पादन करने के लिये इसे प्राय: गैसोलीन के साथ मिलाया जाता है।


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