राजस्थान
गंभीरी नदी
- 26 Mar 2025
- 5 min read
चर्चा में क्यों?
राजस्थान उच्च न्यायालय ने घाना पक्षी अभयारण्य को जलापूर्ति करने वाली गंभीरी नदी के बाढ़ क्षेत्र में कथित अतिक्रमण के मामले पर संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है।
मुख्य बिंदु
- मुद्दे के बारे में:
- न्यायालय ने इस मामले में मुख्य सचिव, संभागीय आयुक्त (भरतपुर), प्रमुख राजस्व सचिव, ज़िला कलेक्टर (करौली) और एसपी (करौली) को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
- याचिकाकर्त्ता द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया गया।
- याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि पांचना बाँध का पानी गंभीरी नदी के माध्यम से घाना पक्षी अभयारण्य तक पहुँचता है, जो अतिक्रमण के कारण बाधित हो रहा है।
- इसके अतिरिक्त करौली ज़िले के सनेंट गाँव की लगभग 230 बीघा भूमि, जो नदी के प्रवाह क्षेत्र का हिस्सा है, पर वर्षों से अतिक्रमण किया जा रहा है। इससे पक्षी विहार का जैविक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
- गंभीरी नदी
- गंभीरी नदी, जिसे उटंगन नदी के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान की एक महत्त्वपूर्ण मौसमी नदी है, जो मुख्यतः वर्षा ऋतु में प्रवाहित होती है।
- यह नदी राजस्थान के पूर्वोत्तर भाग में प्रवाहित होती है।
- यह नदी करौली ज़िले में हिंडौन के निकट अरावली पहाड़ियों से उद्गमित होती है और दक्षिण से उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है।
- यह राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाते हुए आगरा में यमुना नदी में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 288 किलोमीटर है।
- इसकी मुख्य सहायक नदियाँ – सेसा, खेर और पार्वती हैं।
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान:
- परिचय:
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान अथवा केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के भरतपुर में स्थित एक आर्द्रभूमि और पक्षी अभयारण्य है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण पक्षी विहारों में से एक है।
- चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) को वर्ष 1981 में भारत के पहले रामसर स्थलों के रूप में मान्यता दी गई थी।
- वर्तमान में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और लोकटक झील (मणिपुर), मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
- यह अपनी समृद्ध पक्षी विविधता और जल पक्षियों की बहुलता के लिये प्रसिद्ध है। यह उद्यान पक्षियों की 365 से अधिक प्रजातियों का घर है, जिसमें कई दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियाँ शामिल हैं, जैसे कि साइबेरियाई क्रेन।
- उत्तरी गोलार्द्ध के दूर-दराज़ के क्षेत्रों से विभिन्न प्रजातियाँ प्रजनन हेतु अभयारण्य में आती हैं। साइबेरियन क्रेन उन दुर्लभ प्रजातियों में से एक है जिसे यहाँ देखा जा सकता है।
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान अथवा केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के भरतपुर में स्थित एक आर्द्रभूमि और पक्षी अभयारण्य है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण पक्षी विहारों में से एक है।
- पशु वर्ग:
- इस क्षेत्र में सियार, सांभर, नीलगाय, जंगली बिल्लियाँ, लकड़बग्घे, जंगली सूअर, साही और नेवला जैसे जानवर देखे जा सकते हैं।
- वनस्पति वर्ग:
- प्रमुख वनस्पति प्रकार उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन हैं जो शुष्क घास के मैदान के साथ मिश्रित बबूल निलोटिका प्रभुत्त्व वाले क्षेत्र हैं।
- नदियाँ:
- गंभीर और बाणगंगा नदियाँ इस राष्ट्रीय उद्यान से होकर बहती हैं।