भारतीय अर्थव्यवस्था
सार्वजनिक व्यय गुणवत्ता सूचकांक
- 25 Feb 2025
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प्रिलिम्स के लिये:भारतीय रिज़र्व बैंक, सार्वजनिक व्यय गुणवत्ता सूचकांक, वैश्विक वित्तीय संकट, राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003, माल और सेवा कर (GST), शून्य-आधारित बजट व्यवस्था मेन्स के लिये:सार्वजनिक व्यय, सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता, राजकोषीय अनुशासन |
स्रोत: IE
चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लोक निधि के आवंटन की कुशलता का आकलन करने के उद्देश्य से सार्वजनिक व्यय गुणवत्ता सूचकांक (QPE) विकसित किया है।
सार्वजनिक व्यय गुणवत्ता सूचकांक क्या है?
- परिचय: QPE सूचकांक एक ऐसा फ्रेमवर्क है जिसके अंतर्गत सरकारी व्यय की दक्षता का आकलन किया जाएगा।
- केवल कुल व्यय पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, सूचकांक के माध्यम से व्यय की संरचना और दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि और विकास पर इसके प्रभाव का विश्लेषण भी किया जाएगा।
- प्रमुख घटक: सूचकांक पाँच प्रमुख संकेतकों पर आधारित है:
सूचक |
यह मापता है: |
महत्त्व |
पूंजीगत व्यय से सकल घरेलू उत्पाद अनुपात |
बुनियादी ढाँचे (सड़क, रेल, बिजली, आदि) के लिये आवंटित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का हिस्सा। |
उच्च अनुपात बेहतर व्यय गुणवत्ता को दर्शाता है। |
राजस्व व्यय से पूंजीगत परिव्यय अनुपात |
वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर व्यय की तुलना बनाम बुनियादी ढाँचे और परिसंपत्ति निर्माण पर व्यय की तुलना। |
निम्नतर अनुपात उत्पादक निवेशों के लिये अधिक धनराशि आवंटित होने का संकेतक है। |
विकास व्यय से सकल घरेलू उत्पाद अनुपात |
शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान एवं विकास, तथा सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे पर व्यय। |
उच्च अनुपात बेहतर आर्थिक उत्पादकता का संकेत देता है। |
कुल सरकारी व्यय के हिस्से के रूप में विकास व्यय |
कुल बजट में विकास क्षेत्रों के लिये समर्पित अनुपात। |
उच्चतर हिस्सा उच्चतर व्यय गुणवत्ता को दर्शाता है। |
कुल व्यय अनुपात में ब्याज भुगतान |
पूर्व की उधारियों का वित्तीय बोझ। |
निम्नतर अनुपात बेहतर राजकोषीय स्वास्थ्य और विकास के लिये अधिक धनराशि का संकेत देता है। |
- मुख्य निष्कर्ष: RBI के QPI सूचकांक ने वर्ष 1991 से भारत के सार्वजनिक व्यय प्रक्षेपवक्र को छह अलग-अलग चरणों में वर्गीकृत किया है।
- वर्ष 1991-1997: प्रारंभिक उदारीकरण के दौरान केंद्र की व्यय गुणवत्ता में मामूली सुधार देखा गया, लेकिन राज्यों को राजकोषीय दबाव और घटते सार्वजनिक निवेश के कारण संघर्ष करना पड़ा।
- वर्ष 1997-2003: वेतन वृद्धि (पाँचवें वेतन आयोग), बढ़ते ब्याज भुगतान तथा राजस्व-भारी व्यय के कारण व्यय की गुणवत्ता में गिरावट आई।
- वर्ष 2003-2008: राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 को वर्ष 2004 में लागू किया गया, जिससे राजकोषीय अनुशासन में सुधार हुआ।
- राज्यों को उच्च कर हस्तांतरण से लाभ हुआ, लेकिन वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (GFC) ने प्रगति को रोक दिया।
- वर्ष 2008–2013: केंद्र के प्रोत्साहन व्यय से शुरू में गुणवत्ता में सुधार हुआ लेकिन बाद में राजकोषीय असंतुलन उत्पन्न हो गया।
- वर्ष 2013-2019: केंद्र को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर (GST) राजस्व बँटवारे से मूल रूप से राज्यों को अधिक लाभ होता था, राज्यों ने विकास व्यय में वृद्धि और 14वें वित्त आयोग से वित्त पोषण के साथ सुधार किया।
- वर्ष 2019–2025: कोविड-19 के दौरान राजकोषीय प्रोत्साहन उपायों के कारण व्यय की गुणवत्ता में अस्थायी गिरावट आई।
- महामारी के बाद हुए सुधार से व्यय दक्षता में वृद्धि हुई, जिसे पूंजीगत व्यय में वृद्धि से बल मिला।
- वर्ष 2024-25 में भारत की QPE 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद अपने उच्चतम स्तर पर होगी, जो बेहतर राजकोषीय प्रबंधन और व्यय दक्षता को दर्शाता है।
सार्वजनिक व्यय क्या है?
- सार्वजनिक व्यय (PE) का तात्पर्य सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, बुनियादी ढाँचे और कल्याण जैसी सामूहिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिये किये गए व्यय से है।
- उद्देश्य: सार्वजनिक व्यय कुशल संसाधन आवंटन सुनिश्चित करता है, आय पुनर्वितरण को बढ़ावा देता है, तथा मुद्रास्फीति और रोज़गार का प्रबंधन करके आर्थिक स्थिरता बनाए रखता है।
- यह बुनियादी ढाँचे, प्रौद्योगिकी और कल्याण में निवेश के माध्यम से विकास तथा समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।
- वर्गीकरण:
- राजस्व व्यय: वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे नियमित व्यय।
- पूंजीगत व्यय: दीर्घकालिक परिसंपत्तियों में निवेश। पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का उच्च हिस्सा सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार करता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास होता है।
- हाल ही के सार्वजनिक व्यय: आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, सरकारी पूंजीगत व्यय में वार्षिक आधार पर 8.2% की, जबकि राज्य के राजस्व व्यय में वर्ष-दर-वर्ष (YoY) 12% की वृद्धि हुई।
- केंद्रीय बजट 2025-26 में वित्त वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय (GDP का 3.1%) के लिये 11.21 लाख करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं।
- चुनौतियाँ: वेतन, पेंशन और सब्सिडी (राजस्व व्यय) और कल्याण (जैसे मुफ्त बिजली) पर अत्यधिक व्यय वित्तीय स्थिरता को कम कर सकता है।
- अत्यधिक PE से राजकोषीय घाटा और ऋण बोझ में वृद्धि होने से विकास के लिये उपलब्ध धन में कमी आती है।
- उच्च बजट घाटा से लोक वित्त पर दबाव पड़ता है, जिससे सरकार की निवेश करने की क्षमता सीमित हो जाती है।
- उच्च राजस्व व्यय से निवेशकों का विश्वास कमज़ोर हो सकता है, जिससे समग्र आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
आगे की राह
- शून्य-आधारित बजट (ZBB) और प्रदर्शन-आधारित बजट को प्राथमिकता देने से कुशल एवं जवाबदेह धन आवंटन सुनिश्चित होता है।
- स्वास्थ्य, शिक्षा एवं बुनियादी ढाँचे जैसे उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये जिससे आर्थिक विकास को गति मिलने के साथ सामाजिक कल्याण में सुधार हो सकता है।
- राजकोषीय विवेकशीलता सुनिश्चित करते हुए आवश्यकता-आधारित आवंटन के क्रम में राज्यों तथा स्थानीय सरकारों को धन का अंतरण बढ़ाना चाहिये।
- घाटे के वित्तपोषण को कम करने, आत्मनिर्भर परियोजनाओं को बढ़ावा देने तथा घरेलू एवं विदेशी निवेश को आकर्षित करने जैसे पहलू दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता के लिये आवश्यक हैं।
- राजस्व व्यय में भ्रष्टाचार को कम करने के लिये जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी के साथ वित्तीय समावेशन के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का विस्तार करना चाहिये।
दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न: प्रश्न: राजकोषीय दक्षता का आकलन करने में सार्वजनिक व्यय गुणवत्ता सूचकांक के महत्त्व पर चर्चा कीजिये। इससे भारत में सरकारी खर्च को बेहतर बनाने में किस प्रकार मदद मिल सकती है? |
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)प्रिलिम्सप्रश्न: निम्नलिखित में से किसको/किनको भारत सरकार के पूँजी बजट में शामिल किया जाता है?
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये (a) केवल 1 उत्तर: (d) प्रश्न: साल-दर-साल लगातार घाटे का बजट रहा है। घाटे को कम करने के लिये सरकार द्वारा निम्नलिखित में से कौन-सी कार्रवाई/कार्रवाइयां की जा सकती है/हैं?
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये: (a) केवल 1 उत्तर: (c) मेन्स:प्रश्न 1. पूंजीगत बजट और राजस्व बजट के बीच अंतर बताइये। इन दोनों बजटों के घटकों की व्याख्या कीजिये। (2021) प्रश्न 2. उदारीकरण के बाद की अवधि के दौरान बजट बनाने के संदर्भ में सार्वजनिक व्यय प्रबंधन भारत सरकार के लिये एक चुनौती है। स्पष्ट कीजिये। (2019) |