इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के संबंध में पर्यावरणीय चिंताएँ | 28 Feb 2025
प्रिलिम्स के लिये:इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम, नेट ज़ीरो 2070, 3जी इथेनॉल उत्पादन, प्रधानमंत्री JI-VAN योजना मेन्स के लिये:जैव ईंधन का पर्यावरणीय प्रभाव, सतत् विकास और इथेनॉल उत्पादन |
स्रोत: द हिंदू
चर्चा में क्यों?
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम का आंध्र प्रदेश में व्यापक स्तर पर विरोध हो रहा है।
- पर्यावरणविद् और किसानों द्वारा इथेनॉल कारखानों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण एवं अत्यधिक जल उपभोग पर चिंता जताई जा रही है।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम क्या है?
- परिचय: EBP कार्यक्रम वर्ष 2001 में पायलट परियोजनाओं के साथ शुरू हुआ था। इसे वर्ष 2003 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 5% इथेनॉल (C₂H₅OH) मिश्रण के साथ लॉन्च किया गया था और वर्ष 2019 तक इसे पूरे देश में (अंडमान एवं निकोबार, लक्षद्वीप को छोड़कर) विस्तारित किया गया, जिसमें 10% तक इथेनॉल मिश्रण की अनुमति दी गई।
- EBP कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 के तहत यह लक्ष्य वर्ष 2030 तक निर्धारित था)। वर्ष 2024 तक इथेनॉल का मिश्रण प्रतिशत 15% था।
- उद्देश्य: EBP का लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन, ईंधन आयात को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
- भारत के ऊर्जा विविधीकरण का समर्थन करना, वैश्विक तेल आपूर्ति व्यवधानों के प्रति लचीलापन बढ़ाना।
- पेरिस समझौते के तहत भारत को नेट ज़ीरो 2070 प्रतिबद्धता हासिल करने में सहायता करना।
- ईबीपी कार्यक्रम "वेस्ट टू वेल्थ" दृष्टिकोण का अनुसरण करता है तथा स्वच्छ भारत मिशन (SBM) और मेक इन इंडिया को समर्थन देता है।
- प्रमुख उपलब्धियाँ: सितंबर, 2024 तक इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 1,600 करोड़ लीटर तक पहुँच गई।
- कच्चे तेल के आयात में कटौती करके EBP कार्यक्रम से 1,06,072 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
- EBP ने CO2 उत्सर्जन में 544 लाख मीट्रिक टन की कमी की है और 181 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल को प्रतिस्थापित किया है।
- इस कार्यक्रम का महत्त्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव पड़ा, तेल विपणन कंपनियों ने डिस्टिलरों को 1,45,930 करोड़ रुपए तथा किसानों को 87,558 करोड़ रुपए वितरित किये।
- कच्चे तेल के आयात में कटौती करके EBP कार्यक्रम से 1,06,072 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
नोट: इथेनॉल एक जैव ईंधन है जो मुख्य रूप से "प्रथम पीढ़ी" (1G) स्रोतों जैसे कि गन्ने का गुड़, जूस, गेहूँ और चावल से उत्पादित होता है, जबकि "द्वितीय पीढ़ी" (2G) स्रोतों में चावल का भूसा, गेहूँ का भूसा, खोई और मकई का चारा जैसे कृषि अवशेष शामिल हैं।
EBP के संबंध में पर्यावरण संबंधी चिंताएँ क्या हैं?
- प्रदूषण बनाम उत्सर्जन में कमी: वर्ष 2025 तक 20% इथेनॉल मिश्रण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये लगभग 1,000 करोड़ लीटर इथेनॉल की आवश्यकता होगी, जिसका उत्पादन बढ़ाकर 1,700 करोड़ लीटर करने की योजना है। उत्पादन में वृद्धि से उत्सर्जन बढ़ सकता है, जिससे वायु, जल और मृदा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- जल की कमी: इथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है, जिसके अंतर्गत अनाज आधारित कारखानों को प्रति लीटर इथेनॉल हेतु 8 से 12 लीटर जल की आवश्यकता होती है। गन्ना और मोलैसेज आधारित उत्पादन से उच्च जल खपत, वनोन्मूलन और औद्योगिक अपशिष्ट बढ़ता है।
- आसवनशालाओं से विनेसे नामक प्रदूषण-युक्त अपशिष्ट जल उत्पन्न होता है, जो यदि अनुपचारित रहा तो जलाशयों को दूषित कर सकता है तथा ऑक्सीजन का क्षरण कर सकता है।
- कृष्णा जैसी नदियों के समीप स्थित कारखानों से कृषि और पेय जल का अन्य दिशा में परिवर्तन हो रहा है। किसानों को जल संसाधनों के समाप्त होने का डर है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होगा।
- औद्योगिक प्रदूषण: इथेनॉल डिस्टिलरीज़ अपनी उच्च प्रदूषण क्षमता के कारण उद्योगों की "लाल श्रेणी" (प्रदूषण सूचकांक कोर 60 और उससे अधिक) के अंतर्गत आती हैं।
- एसीटैल्डिहाइड, फॉर्मेल्डिहाइड और एक्रोलीन जैसे संकटजनक रसायन उत्सर्जित होते हैं, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियों और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
- आंध्र प्रदेश में, कई इथेनॉल कारखानों को सार्वजनिक सुनवाई या उचित उत्सर्जन आकलन के बिना ही पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त है, जो प्रायः मानव बस्तियों के पास स्थित होती हैं।
आगे की राह:
- 3G इथेनॉल को बढ़ावा देना: प्रधानमंत्री जीवन वन योजना के तहत 3G इथेनॉल उत्पादन (अपशिष्ट जल, सीवेज या समुद्री जल से शैवाल द्वारा उत्पादित) को बढ़ाने से खाद्य फसलों के स्थान पर सूक्ष्म शैवाल का उपयोग करके पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सकता है, जिससे खाद्य या मीठे जल के संसाधनों पर दबाव डाले बिना 1G और 2G विधियों के लिये एक स्थायी विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
- पर्यावरण विनियमन: अनिवार्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों (जैसे अपशिष्ट उपचार संयंत्र ) को लागू करना और सामुदायिक चिंताओं को दूर करने के लिये पर्यावरणीय मंजूरी के लिये सार्वजनिक सुनवाई को बहाल करना।
- इथेनॉल संयंत्रों द्वारा भूजल के स्थान पर पुनर्नवीनीकृत या उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग किया जाना अनिवार्य किया जाना चाहिये।
- हरित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करना: पवन ऊर्जा संवर्द्धन और वायु शोधन इकाई (WAYU) जैसे प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के लिये सब्सिडी प्रदान करना, जिससे इथेनॉल निर्माताओं के लिये इसे अधिक किफायती बनाया जा सके।
- निम्न उत्सर्जन वाले इथेनॉल उत्पादन में अनुसंधान और विकास (R&D) पर्यावरणीय क्षति को कम करने में मदद कर सकता है।
दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न: प्रश्न: इथेनॉल उत्पादन को जीवाश्म ईंधन के लिये एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में देखा जाता है। भारत में इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों की आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये। |
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)प्रश्न. नीचे चार ऊर्जा फसलों के नाम दिये गए हैं। इनमें से किसकी खेती इथेनॉल के लिये की जा सकती है? (2010) (a) जट्रोफा उत्तर: (b) प्रश्न. भारत की जैव ईंधन की राष्ट्रीय नीति के अनुसार, जैव ईंधन के उत्पादन के लिये निम्नलिखित में से किनका उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है? (2020)
नीचे दिये गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये: (a) केवल 1, 2, 5 और 6 उत्तर: (a) |