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भारतीय इतिहास

टैगोर की चीन यात्रा की शताब्दी

  • 01 Apr 2025
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

रबींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, साहित्य में नोबेल पुरस्कार, जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919)

मेन्स के लिये:

राष्ट्र निर्माण में रबींद्रनाथ टैगोर का योगदान, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर टैगोर के विचार

स्रोत: द हिंदू  

चर्चा में क्यों?

1 अप्रैल 2025 को, शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय ने रबींद्रनाथ टैगोर की चीन यात्रा (1924) की 100वीं वर्षगाँठ और भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की मेज़बानी की। 

  • यह कार्यक्रम दक्षिण एशिया के प्राचीनतम चीनी अध्ययन विभाग, विश्वभारती विश्वविद्यालय के चीन भवन में आयोजित किया गया था।

Rabindranath Tagore

रबींद्रनाथ टैगोर कौन थे और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान क्या था?

परिचय:

  • रबींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता में हुआ था। वे एक बंगाली कवि, उपन्यासकार, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार, दार्शनिक और शिक्षाविद् थे। 
  • वे गुरुदेव, कविगुरु और विश्वकवि के नाम से लोकप्रिय थे।
  • टैगोर महात्मा गांधी के अच्छे मित्र थे और मान्यताओं के अनुसार उन्होंने ही उन्हें महात्मा की उपाधि दी थी।
    • महात्मा गांधी पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने टैगोर को “गुरुदेव” कहा और उन्हें “विश्व कवि” की संज्ञा दी।
  • वह अपनी कृति गीतांजलि के लिये साहित्य में नोबेल पुरस्कार (1913) प्राप्त करने वाले पहले गैर-यूरोपीय थे। 

राष्ट्र निर्माण में टैगोर का योगदान

  • राष्ट्रवाद पर विचार: राष्ट्रवाद के बारे में उनका विचार समावेशी और साथ ही आध्यात्मिक था। उनके अनुसार राष्ट्रवाद मानवीय मूल्यों के उत्थान पर आधारित होना चाहिये, न कि घृणा अथवा अति देशभक्ति पर।
    • टैगोर की देशभक्ति नीतिपरक और न्यायसंगत थी, जो सार्वभौमिक मानवतावाद, संस्कृतियों के प्रति सम्मान और अंतर-सभ्यतागत संवाद पर आधारित थी।
    • उन्होंने इस तथ्य पर बल दिया कि भारत का प्राबल्य इसकी एकरूपता या धार्मिक बहुसंख्यकवाद में नहीं अपितु इसकी विविधता और एकता में निहित है।
    • टैगोर का राष्ट्रवाद विश्वव्यापी था, पृथकतावादी नहीं, जो वर्तमान में निरंतर बढ़ते जातीय राष्ट्रवाद के समय में भी प्रासंगिक है।
    • अपनी पुस्तक नेशनलिज्म (1917) में उन्होंने पश्चिमी शैली के आक्रामक राष्ट्रवाद के खिलाफ चेतावनी दी और इसे शांति और वैश्विक सद्भाव के लिये खतरा बताया।
  • भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान: हालाँकि टैगोर एक सक्रिय राजनीतिक आंदोलनकारी नहीं थे, लेकिन उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक नैतिक और बौद्धिक भूमिका निभाई। बंगाल विभाजन (1905) के दौरान, उन्होंने स्वदेशी आंदोलन का समर्थन किया, एकता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के लिये गीतों (आमार सोनार बांग्ला) की रचना की।
  • संगीत, नृत्य और कला में योगदान: टैगोर एक सांस्कृतिक पुनरुत्थानवादी थे जिन्होंने भारत को वैश्विक सौंदर्यशास्त्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
    • उन्होंने 2,000 से अधिक गीतों की रचना की, जिन्हें सामूहिक रूप से रवींद्र संगीत के नाम से जाना जाता है, जो अपनी गीतात्मक गहराई और भावनात्मक समृद्धि के लिये जाने जाते हैं।
    • उनके संगीत में शास्त्रीय रागों, लोक परंपराओं और आध्यात्मिक विषयों का मिश्रण था, जिसमें 'एकला चलो रे' जैसे गीत राष्ट्रवादी प्रतीकवाद का हिस्सा बन गए।
    • उन्होंने रंगमंच, संगीत और शास्त्रीय भारतीय नृत्य को मिलाकर चित्रांगदा, श्यामा और चंडालिका जैसी नृत्य नाटिकाएँ रचीं। 
    • एक चित्रकार के रूप में उन्होंने अमूर्त और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति की शुरुआत की, औपनिवेशिक कलात्मक मानदंडों को चुनौती दी और भारतीय दृश्य पहचान पर बल दिया।
  • साहित्य में योगदान: उन्होंने स्वतंत्रता, पहचान, आध्यात्मिकता और आधुनिकता के विषयों पर काम करते हुए बंगाली गद्य और कविता का आधुनिकीकरण किया। उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
    • कविता: गीतांजलि, बलाका, सोनार तोरी, मानसी
    • उपन्यास: घरे-बैरे, गोरा, चोखेर बाली
    • नाटक: चित्रा, द पोस्ट ऑफिस
    • निबंध: साधना: द रियलाइजेशन ऑफ लाइफ, द रिलीजन ऑफ मैन, नेशनलिज्म।
  • शिक्षा में योगदान: टैगोर ने शिक्षा की कल्पना मन को नियंत्रित करने के लिये नहीं, बल्कि उसे मुक्त करने के साधन के रूप में की थी। वर्ष 1921 में उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर सीखने’ के दर्शन पर आधारित था।
    • विश्वभारती शिक्षा का एक वैश्विक केंद्र था, जिसका आदर्श वाक्य था " यत्र विश्वं भवत्येकनीडम्" (जहाँ विश्व एक घोंसले में मिलता है)।
    • वर्ष 1937 में उन्होंने भारत-चीन सभ्यतागत संबंधों और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिये चीन भवन की स्थापना की।

भारत और चीन के बीच तालमेल के प्रमुख क्षेत्र क्या हैं?

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निष्कर्ष

रबींद्रनाथ टैगोर केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी, सुधारक और वैश्विक विचारक थे जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक भविष्य को नए सिरे से परिभाषित किया। स्वतंत्रता आंदोलन, कला, शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में उनके योगदान ने आधुनिक भारत की सॉफ्ट पावर और नैतिक नेतृत्व की नींव रखी।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न.“रबींद्रनाथ टैगोर के राष्ट्र-निर्माण के प्रयास राजनीतिक सक्रियता से कहीं आगे बढ़ गए और उन्होंने संस्कृति, शिक्षा और नैतिक राष्ट्रवाद को अपनाया।” चर्चा कीजिये।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स

प्रश्न. इनमें से कौन अंग्रेज़ी में अनूदित प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतिकाव्य-'सॉन्स फ्रॉम प्रिजन' से संबद्ध हैं? (2021)

(a) बाल गंगाधर तिलक
(b) जवाहरलाल नेहरू
(c) मोहनदास करमचंद गाँधी
(d) सरोजिनी नायडू

उत्तर: (c)


प्रश्न. आंध्र प्रदेश के मदनपल्ली के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? (2021)

(a) पिंगली वेंकैया ने यहाँ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का डिज़ाइन किया।
(b) पट्टाभि सीतारमैया ने यहाँ से आंध्र क्षेत्र में भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्त्व किया।
(c) रबींद्रनाथ टैगोर ने यहाँ राष्ट्रगान का बांग्ला से अंग्रेज़ी में अनुवाद किया।
(d) मैडम ब्लावात्स्की तथा कर्नल ऑलकाट ने सबसे पहले यहाँ थियोसोफिकल सोसाइटी का मुख्यालय स्थापित किया।

उत्तर: (c)

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