प्रारंभिक परीक्षा
ट्रामजात्रा उत्सव
कोलकाता अपने सुप्रसिद्ध ट्राम के 150 वर्ष पूरा होने और इस विश्वास को बनाए रखने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन करेगा कि परिवहन का यह गैर-प्रदूषणकारी साधन फरवरी 2023 में पूरी तरह विलुप्त नहीं होगा।
ट्रामजात्रा उत्सव:
- इतिहास:
- ट्रामजात्रा (ट्राम की यात्रा) एक चलता-फिरता ट्राम कार्निवाल है जिसे वर्ष 1996 में मेलबर्न और कोलकाता के उत्साही लोगों द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया था।
- वर्तमान समय में कोलकाता एकमात्र भारतीय शहर है जहाँ ट्राम अभी भी चलती है, कोलकाता में इसके लगभग दो दर्जन से अधिक मार्ग थे।
- वर्तमान में चलित मार्गों की संख्या घटकर केवल 2 रह गई है।
- इसलिये वर्ष 2023 का आयोजन ट्राम को संरक्षित करने के लिये पश्चिम बंगाल सरकार को प्रभावित करने के संदर्भ में अधिक प्रयास होगा।
- परिचय:
- ट्रामजात्रा अनिवार्य रूप से ट्रामियों, कलाकारों, पर्यावरणविदों और ट्राम-प्रेमी समुदायों का एक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग है।
- थीम 2022: विरासत, स्वच्छ वायु और हरित गतिशीलता
- उद्देश्य:
- इसके तहत हरित गतिशीलता और कोलकाता की ट्राम विरासत पर ध्यान देने के साथ जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और सतत् विकास उद्देश्यों के बारे में लोगों, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को शिक्षित करना है।
स्रोत: द हिंदू
प्रारंभिक परीक्षा
बेपोर की उरु परंपरा
हाल ही में ज़िला पर्यटन संवर्धन परिषद, कोझिकोड ने प्रसिद्ध बेपोर उरु (नाव) के लिये भौगोलिक संकेतक (GI टैग) की मांग की है।
- बेपोर के उरु केरल और खाड़ी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है।
बेपोर के उरु:
- परिचय:
- बेपोर के उरु, केरल में कुशल कारीगरों और बढ़ई द्वारा दस्तकारी की गई एक लकड़ी से बनी एक ढो (जहाज़ / नौकायन नाव / नौकायन पोत) है।
- बेपोर के उरु बेहतरीन किस्म की लकड़ी से बने होते हैं और वह भी किसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किये बिना।
- उरु को बनाने के लिये उपयोग की जाने वाली लकड़ी की कटाई अभी भी पारंपरिक तरीके से की जाती है जिसके लिये विशेष कुशलता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
- प्रत्येक उरु को बनाने में 1-4 वर्ष का समय लगता है और इसे हाथों से बनाया जाता है।
- इस पारंपरिक हस्तकला का इतिहास 2000 वर्षों पुराना है जो आज भी चलन में हैं।
- उरु-निर्माण में शामिल समुदाय:
- उरु-निर्माण से जुड़े प्रमुख लोग ओडायी और खलासी (Odayis and Khalasis) हैं।
- ओडायी :
- वे जहाज़ निर्माण के तकनीकी पक्षों का प्रबंधन करते हैं।
- उनके परिवार का नाम ओडम से प्रेरित है (एक प्रकार का छोटा जहाज़ जिसे पहले मालाबार तट और लक्षद्वीप के बीच व्यापार में उपयोग किया जाता था)।
- खलासी:
- उन्हें मप्पिला खलासी भी कहा जाता है क्योंकि उनमें से अधिकांश मप्पिला मुसलमान हैं।
- वे केवल पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके पूरे उरुस को जल में लॉन्च करने के अपने कौशल और विशेषज्ञता के लिये विश्व प्रसिद्ध हैं।
- खलासी को जहाज़ निर्माण उद्योग में अग्रणी माना जाता है, वे इन जहाज़ों के पहले प्रमुख संरक्षकों में से थे, साथ ही अरब व्यापारी विशेष रूप से उनके प्रति आसक्त थे ।
- ओडायी :
- उरु-निर्माण से जुड़े प्रमुख लोग ओडायी और खलासी (Odayis and Khalasis) हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)प्रश्न. निम्नलिखित में से किसे 'भौगोलिक संकेत' का दर्जा प्रदान किया गया है? (2015)
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये: (a) केवल 1 उत्तर: C व्याख्या:
अतः विकल्प (C) सही है। प्रश्न: भारत ने वस्तुओं के भौगोलिक संकेतक(पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 को किसके दायित्वों का पालन करने के लिये अधिनियमित किया? (2018) (a) अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन उत्तर:(d) व्याख्या:
अतः विकल्प (d) सही है। |
स्रोत : द हिंदू
प्रारंभिक परीक्षा
पेंशन प्रशासन रक्षा प्रणाली
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने पेंशन प्रशासन रक्षा प्रणाली- स्पर्श (System for Pension Administration Raksha- SPARSH), के हितधारकों से इसे उपयोगकर्त्ताओं हेतु और अधिक अनुकूल बनाने का आग्रह किया है।
- वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना भी सेवा की समान अवधि (भले ही सेवानिवृत्ति की तिथि कुछ भी हो) के लिये समान रैंक के सैन्य अधिकारियों को समान पेंशन का भुगतान करने का प्रावधान करती है।
स्पर्श (SPARSH) योजना
- परिचय:
- यह रक्षा पेंशन की स्वीकृति एवं संवितरण के स्वचालन हेतु एक एकीकृत प्रणाली है।
- यह वेब-आधारित प्रणाली पेंशन दावों को संसाधित करती है और किसी बाह्य मध्यस्थ पर भरोसा किये बिना सीधे रक्षा पेंशनरों के बैंक खातों में पेंशन जमा करती है।
- पेंशनरों के लिये उनकी पेंशन संबंधी जानकारी को देखने, सेवाओं तक पहुँच प्राप्त करने और शिकायत दर्ज करने (यदि कोई हो) के लिये एक पेंशनभोगी पोर्टल उपलब्ध है।
- उद्देश्य:
- स्पर्श (SPARSH) सेवा केंद्रों की स्थापना की परिकल्पना करता है ताकि उन पेंशनभोगियों को अंतिम बिंदु तक कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके जो स्पर्श पोर्टल तक सीधे पहुँचने में असमर्थ हो सकते हैं।
- स्पर्श को रक्षा पेंशनरों को केंद्र में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है, जिन्हें एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उनके पेंशन खाते के बारे में पूरी तरह से पारदर्शी जानकारी प्रदान की जाएगी।
- इसका उद्देश्य पेंशन स्वीकृति और संवितरण प्रक्रिया में वर्तमान चुनौतियों का समाधान करना है जैसे कि-
- साइलो (silos) में मौज़ूद विकेंद्रीकृत समाधान।
- प्रसंस्करण में मैनुअल हस्तक्षेप।
- पेंशनरों के प्रश्नों आदि के समाधान के लिये केंद्रीकृत सूचना का अभाव।
- लाभ:
- यह पेंशनरों को उनके अनुरोधों के त्वरित कार्यवाही और घोषणाओं पर हस्ताक्षर करने के लिये सक्षम सेवाओं का उपयोग करने का विकल्प प्रदान करता है, जिससे उनका अनुभव वास्तव में कागज रहित और परेशानी मुक्त हो जाता है।
- यह पेंशन शुरू होने की तारीख से अंतिम पात्र लाभार्थी को देय पेंशन की समाप्ति की तारीख तक पेंशनभोगी की घटनाओं और हकदारियों का पूरा इतिहास रखता है।
स्रोत: पी.आई.बी.
प्रारंभिक परीक्षा
रबी की फसलें
उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में पश्चिमी विक्षोभ की असामान्य कमी के कारण रबी की फसल खतरे में है।
- इस क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा और नमी की कमी है, जो सर्दियों के मौसम में गेहूँ उगाने के लिये महत्त्वपूर्ण है।
अन्य कारक:
- कई सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण अक्तूबर, 2022 के पहले दो हफ्तों में इस क्षेत्र में लगातार बारिश ने इस विरोधाभास को जन्म दिया।
- इसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में जारी ला नीना और गर्म आर्कटिक क्षेत्र के संभावित प्रभावों ने भी योगदान दिया है।
- अक्तूबर की शुरुआत में पश्चिमी विक्षोभ से अत्यधिक वर्षा होती है - इसके अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान जो आर्कटिक, भूमध्यसागरीय और पश्चिम एशियाई क्षेत्रों से नमी लाकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सर्दियों में वर्षा करवाते हैं।
- नवंबर, 2022 में पश्चिमी विक्षोभ की कमी और दिसंबर, 2022 में उनकी पूर्ण अनुपस्थिति के कारण अक्तूबर, 2022 की शुरुआत में कम वर्षा हुई।
रबी की फसल
- इन फसलों को लौटते मानसून और पूर्वोत्तर मानसून के मौसम के दौरान(अक्तूबर) बोया जाता है, जिन्हें रबी या सर्दियों की फसल कहा जाता है।
- इन फसलों की कटाई सामान्यतः गर्मी के मौसम में अप्रैल और मई के दौरान होती है।
- इन फसलों पर वर्षा का अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है।
- रबी की प्रमुख फसलें गेहूँ, चना, मटर, जौ आदि हैं।
- बीजों के अंकुरण के लिये गर्म जलवायु और फसलों के विकास हेतु ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है।
भारत में उगाई जाने वाली फसलों के प्रकार:
- खरीफ की फसलें :
- दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में बोई जाने वाली फसलें खरीफ या मानसून की फसलें कहलाती हैं।
- ये फसलें मौसम की शुरुआत में मई के अंत से लेकर जून की शुरुआत तक बोई जाती हैं और अक्तूबर से शुरू होने वाली मानसूनी बारिश के बाद काटी जाती हैं।
- ये फसलें वर्षा के पैटर्न पर निर्भर करती हैं।
- चावल, मक्का, दालें जैसे उड़द, मूंग दाल और बाजरा प्रमुख खरीफ फसलों में से हैं।
- इन्हें बढ़ने के लिये अधिक पानी और गर्म मौसम की आवश्यकता होती है।
- जायद फसलें:
- बुवाई और कटाई: मार्च-जुलाई (रबी और खरीफ के बीच)
- जायद की महत्त्वपूर्ण फसलों में मौसमी फल, सब्जियाँ, चारा फसलें आदि शामिल हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्नप्रश्न. भारत में पिछले पांँच वर्षों में खरीफ फसलों की खेती के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये (2019)
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? (a) केवल 1 और 3 उत्तर: (a) प्रश्न. निम्नलिखित फसलों पर विचार कीजिये: (2013)
उपर्युक्त में से कौन-सी खरीफ फसलें हैं? (a) केवल 1 और 4 उत्तर: C |
स्रोत: डाउन टू अर्थ
विविध
Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 15 दिसंबर, 2022
एन. कोटिश्वर
सर्वोच्च न्यायालय समिति ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह को जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में इस समिति की सिफारिश को केंद्र सरकार की मंज़ूरी मिलने के पश्चात राष्ट्रपति की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी। उक्त समिति ने जम्मू कश्मीर के पूर्व चीफ जस्टिस पंकज मित्थल को सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस नियुक्त करने संबंधी भी सिफारिश की है। जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के चीफ जस्टिस अली मोहम्मद मागरे 8 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उच्च न्यायालय के जस्टिस ताशी रबस्तान को कार्यवाहक चीफ जस्टिस बनाया गया। अतः अब राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से चीफ जस्टिस की नियुक्ति कर दी जाएगी। 1 मार्च, 1963 को जन्मे जस्टिस एन. कोटिश्वर को वर्ष 2008 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया था गुवाहाटी उच्च न्यायालय के तत्कालीन चीफ जस्टिस अजय लांबा के सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 2020 में कोटिश्वर सिंह को कार्यवाहक चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन
ब्रिटेन, फ्राँस और संयुक्त अरब अमीरात ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता हेतु समर्थन व्यक्त किया है। भारत दिसंबर 2022 के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। ब्रिटेन की स्थायी प्रतिनिधि डेम बारबरा के अनुसार सुरक्षा परिषद को विश्व के लिये अधिक प्रतिनिधित्त्व वाली संस्था बनाने और स्थायी तथा अस्थायी श्रेणियों में परिषद के विस्तार की आवश्यकता है। फ्राँस के स्थायी प्रतिनिधि निकोलस डी रिबिरे ने कहा कि उनका देश नई ताकतों के उभार और सुरक्षा परिषद में स्थायी की ज़िम्मेदारी उठाने की सक्षमता पर गौर करते हुए सुरक्षा परिषद के विस्तार का समर्थन करता है। अतः फ्राँस भी जर्मनी,ब्राज़ील, भारत और जापान की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अतंर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में बहुपक्षवाद के रुझान के बारे में आयोजित खुली बहस में संयुक्त अरब अमीरात ने भी संयुक्त राष्ट्र में भारत की उपस्थिति के महत्त्व का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिये प्रमुख वैश्विक संस्था है। सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख संकट प्रबंधक निकाय है, जिसे शांति बनाए रखने के लिये संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों हेतु बाध्यकारी दायित्त्व लागू करने का अधिकार है।