छत्तीसगढ़
वामपंथी उग्रवाद से सर्वाधिक प्रभावित ज़िले
- 02 Apr 2025
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चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों की संख्या 12 से घटकर छह हो गई है, जो माओवाद मुक्त राष्ट्र की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक देश से माओवाद को खत्म करने की सरकार की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।
मुख्य बिंदु
- वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों में कमी:
- वामपंथी उग्रवाद से सर्वाधिक प्रभावित ज़िलों की संख्या 12 से घटकर मात्र 6 रह गई है।
- केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख और केंद्रित विकास के माध्यम से भारत को सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिये प्रतिबद्ध है।
- तीव्र माओवादी विरोधी अभियान:
- छत्तीसगढ़ में उग्रवाद विरोधी अभियानों में तेज़ी देखी गई है।
- वर्ष 2024 में 219 माओवादियों का सफाया किया गया, जबकि 2023 में 22 और 2022 में 30 माओवादियों का सफाया किया गया, जो आतंकवाद विरोधी प्रयासों में तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।
- बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागाँव और सुकमा सहित प्रमुख माओवादी गढ़ उग्रवाद का केंद्र बने हुए हैं।
- माओवादियों के ठिकानों और किलेबंदी को ध्वस्त करने के लिये "लाल गलियारे" में हज़ारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
- सरकार की बहुआयामी रणनीति:
- केंद्र सरकार का लक्ष्य निरंतर सैन्य कार्रवाई और सामाजिक-आर्थिक विकास के माध्यम से 31 मार्च 2026 तक माओवाद का उन्मूलन करना है।
- उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों और अन्य विकासात्मक पहलों सहित बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं।