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ecDNA चुनौतीपूर्ण आनुवंशिकी सिद्धांत

  • 11 Dec 2024
  • 7 min read

स्रोत: द हिंदू

हाल ही में नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि एक्स्ट्राक्रोमोसोमल DNA (ecDNA), आनुवंशिक सामग्री का एक पहले से अनदेखा घटक, कैंसर की प्रगति और दवा प्रतिरोध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

  • ये निष्कर्ष आनुवांशिकी की पारंपरिक समझ को चुनौती देते हैं और कैंसर को समझने और उसका इलाज करने के लिये नए रास्ते खोलते हैं।

ecDNA क्या है और यह पारंपरिक आनुवंशिक सिद्धांतों को कैसे चुनौती देता है?

  • परिचय: ecDNA एक प्रकार का DNA है जो कोशिकाओं के नाभिक में गुणसूत्रों के बाहर मौजूद होता है।
    • DNA किसी जीव के विकास, कार्य और प्रजनन के लिये महत्त्वपूर्ण आनुवंशिक जानकारी संग्रहीत करता है। यूकेरियोटिक कोशिकाओं में यह गुणसूत्रों में कुंडलित होता है। 
    • मनुष्य में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं, जिन पर जीन होते हैं जो प्रोटीन को कूटबद्ध करते हैं और लक्षणों का निर्धारण करते हैं।
  • गठन: ecDNA का निर्माण तब होता है जब क्रोमोथ्रिप्सिस (गुणसूत्रों का टूटना और पुनर्व्यवस्थित होना) या DNA प्रतिकृति में त्रुटियों जैसी प्रक्रियाओं के कारण DNA के कुछ हिस्से गुणसूत्रों से अलग हो जाते हैं, जिससे गोलाकार संरचनाएँ बनती हैं जो नाभिक के भीतर स्वतंत्र रूप से मौजूद रहती हैं।
  • महत्त्व: ecDNA सामान्यतः कैंसर कोशिकाओं में पाया जाता है, जहाँ इसमें ऑन्कोजीन की कई प्रतियाँ हो सकती हैं, जो ट्यूमर के विकास, आनुवंशिक विविधता और दवा प्रतिरोध में योगदान करती हैं।
  • आनुवंशिकी के पारंपरिक नियम को चुनौतियाँ: आनुवंशिकी के पारंपरिक सिद्धांत मुख्य रूप से मेंडेलियन वंशानुक्रम और वंशानुक्रम के गुणसूत्र सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसे ecDNA द्वारा निम्नलिखित तरीकों से चुनौती दी जाती है:
  • यादृच्छिक जीन वितरण में व्यवधान:  पारंपरिक आनुवंशिकी में यह माना जाता है कि कोशिका विभाजन के दौरान जीन यादृच्छिक रूप से और स्वतंत्र रूप से वितरित होते हैं। ecDNA इस सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए कई जीनों के समूह बनाता है, जिन्हें अक्षुण्ण पैकेज के रूप में पारित किया जाता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को विश्वसनीय रूप से लाभप्रद आनुवंशिक संयोजन प्राप्त करने की अनुमति मिलती है।
  • ऑन्कोजीन की सुगम वंशानुक्रम: ecDNA क्लस्टर में प्राय: ऑन्कोजीन (कैंसर के विकास को बढ़ावा देने वाले जीन) और अन्य विनियामक तत्त्व होते हैं जो ट्यूमर के अस्तित्व का समर्थन करते हैं। यह समूहीकरण सुनिश्चित करता है कि कैंसर कोशिकाएँ गैर-यादृच्छिक, उद्देश्य-संचालित तरीके से लाभकारी लक्षणों को विरासत में ले सकती हैं और बढ़ा सकती हैं, जिससे उपचार के प्रति उनकी अनुकूलन क्षमता और प्रतिरोध बढ़ जाता है।
  • अनुकूल आनुवंशिक संयोजनों का संरक्षण: अर्धसूत्री विभाजन के दौरान गुणसूत्र क्रॉसिंग ओवर और पुनर्संयोजन से गुजरते हैं, जिससे आनुवंशिक विविधता होती है। इसके विपरीत, ecDNA पुनर्संयोजन के बिना विशिष्ट लाभकारी संयोजनों को संरक्षित करता है, जिससे ट्यूमर की प्रगति के लिये महत्त्वपूर्ण लक्षण बनाए रखता है।

ecDNA कैंसर और दवा प्रतिरोध में कैसे योगदान देता है?

  • ecDNA ऑन्कोजीन की कई प्रतियाँ ले जा सकता है, जिससे कैंसर को बढ़ावा देने वाले जीन में वृद्धि होती है और ट्यूमर का विकास होता है। 
    • यह जीनोम के अन्य भागों से विनियामक तत्त्व (प्रवर्धक) ले सकता है, जिससे असामान्य जीन गतिविधि उत्पन्न होती है जो कैंसर को बढ़ावा देती है।
  • ecDNA की गैर-मेंडेलियन वंशागति ट्यूमर के भीतर आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करती है, जिससे लक्षित उपचार जटिल हो जाता है।
  • लक्ष्य को बदलकर या कैंसर कोशिकाओं को दवाइयों को बाहर करने में सहायता करने वाले जीन की मात्रा बढ़ाकर, ecDNA कीमोथेरेपी की प्रभावशीलता में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
    • यह कैंसर कोशिकाओं को शीघ्रता से नए उत्परिवर्तन विकसित करने में सहायता करता है, जिससे ट्यूमर को उपचार का प्रतिरोध करने और दवाओं के अनुकूल होने में सहायता प्राप्त होती है।

लक्षणों की वंशागति पर मेंडल के आनुवंशिकी के नियम

  • प्रभुत्व का नियम: प्रभावी लक्षण सदैव उपस्थित होने पर अभिव्यक्त होते हैं; अप्रभावी लक्षण केवल तभी प्रकट होते हैं जब दोनों जीन प्रतियाँ अप्रभावी हों।
  • पृथक्करण का नियम: युग्मक निर्माण के दौरान प्रत्येक माता-पिता अपनी एक जीन प्रतिलिपि संतान को देते हैं।
  • स्वतंत्र वर्गीकरण का नियम: विभिन्न लक्षणों के जीन स्वतंत्र रूप से विरासत में मिलते हैं, जब तक कि वे एक ही गुणसूत्र पर निकट स्थित न हों।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न   

प्रिलिम्स:

प्रश्न.  निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: 

  1. भावी माता-पिता के अंड या शुक्राणु उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तन किये जा सकते हैं।   
  2. व्यक्ति का जीनोम जन्म से पूर्व प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था में संपादित किया जा सकता है।   
  3. मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं को एक शूकर के भ्रूण में अंतर्वेशित किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 2
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

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