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पूर्वोत्तर राज्यों में AFSPA का विस्तार

  • 03 Apr 2025
  • 2 min read

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया 

केंद्र सरकार ने मणिपुर में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA), 1958 के तहत 'विक्षुब्ध क्षेत्र' की प्रस्थिति को अन्य छह माह के लिये बढ़ा दिया है। इसमें पांच ज़िलों के 13 पुलिस थानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र शामिल नहीं हैं।

  • केंद्र ने नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में AFSPA को 30 सितंबर 2025 तक बढ़ा दिया है।
  • AFSPA: इसे सितंबर 1958 में संसद द्वारा पारित किया गया था और उन पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ती हिंसा की रोकथाम करने हेतु इसका कार्यान्वन किया गया था, जिस पर राज्य सरकारें नियंत्रण करने में असमर्थ थीं।
    • इस अधिनियम में "विक्षुब्ध क्षेत्रों" में सशस्त्र बलों के कर्मियों को विशेष शक्तियाँ प्रदान किये जाने का प्रावधान किया गया है।
    • राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही कुछ क्षेत्रों को "विक्षुब्ध" घोषित करने के लिये अधिसूचना जारी कर सकती हैं, जिससे सशस्त्र बलों को AFSPA के तहत प्राधिकार मिल जाता है।
    • विक्षुब्ध क्षेत्रों में, सशस्त्र बलों के कर्मियों को बल प्रयोग (प्राणहर प्रयास भी) करने, बिना वारंट के गिरफ्तारी करने तथा लोक व्यवस्था बनाए रखने और खतरों से निपटने के लिये बिना वारंट के तलाशी करने का प्राधिकार है।
    • AFSPA के अंतर्गत सशस्त्र बलों के कार्मिकों को अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के लिये विधिक कार्यवाही से संरक्षण प्राप्त है, जब तक कि केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति प्राप्त न कर ली जाए।

और पढ़ें: सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम, 1958 (AFSPA), मणिपुर में हिंसा, नगा विद्रोह

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