जैव विविधता और पर्यावरण
राष्ट्रीय हरित वित्तपोषण संस्थान
- 27 Feb 2025
- 12 min read
प्रिलिम्स के लिये:NaBFID, NABARD, IREDA, InvITs, पंचामृत रणनीति, ग्रीन बॉण्ड, स्वच्छ पर्यावरण उपकर, प्राथमिकता क्षेत्रक ऋण (PSL), ग्रीन मसाला बॉण्ड, COP29 UNFCCC, क्रेडिट रेटिंग। मेन्स के लिये:भारत में एक समर्पित हरित वित्तपोषण संस्थान की आवश्यकता, जलवायु परिवर्तन शमन में वित्त की भूमिका। |
स्रोत: द हिंदू
चर्चा में क्यों?
सरकार विभिन्न स्रोतों से हरित वित्त को एकत्रित करने एवं वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने के क्रम में पूंजी लागत को कम करने हेतु एक राष्ट्रीय हरित वित्तपोषण संस्थान स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
- नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय हरित वित्तपोषण संस्थान हेतु NaBFID /NABARD, IREDA, ग्रीन InvITs और वैश्विक ग्रीन बैंक जैसे मॉडलों का मूल्यांकन किया जा रहा है।
भारत में हरित वित्त की क्या आवश्यकता है?
- जलवायु परिवर्तन संबंधी जोखिम में वृद्धि: जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 2050 तक कुल आर्थिक मूल्य में अनुमानतः 10% की हानि हो सकती है तथा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 18% तक की कमी आ सकती है।
- यह आर्थिक जोखिम विशेष रूप से भारत (जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था को 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है) के लिये चिंताजनक है।
- भारत की शुद्ध-शून्य उत्सर्जन संबंधी महत्त्वाकांक्षाएँ: COP26 UNFCCC में भारत ने पंचामृत रणनीति के तहत वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने की प्रतिज्ञा व्यक्त की, जिसके लिये 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक निवेश की आवश्यकता है।
- वित्तीय संस्थानों के लिये खतरा: बैंक ऊर्जा-कुशल भवनों, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का समर्थन करके जलवायु परिवर्तन के संभावित वित्तीय प्रभाव को कम कर सकते हैं। वित्तीय सेवा क्षेत्र इस क्षति के 72% के लिये ज़िम्मेदार है।
- निवेश घाटा: भारत को वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य लक्ष्य तक पहुँचने के लिये कुल निवेश में 1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर या सालाना 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है।
- फरवरी, 2023 तक भारत का ग्रीन बॉण्ड जारी करने का कुल मूल्य केवल 21 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान 84% था।
भारत में वर्तमान हरित ऊर्जा वित्तपोषण पहल क्या हैं?
- NCEEF: राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण कोष (NCEEF) कोयले पर स्वच्छ पर्यावरण उपकर के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उपक्रमों और अनुसंधान को वित्तपोषित करता है।
- IREDA, NCEEF के वित्त के एक हिस्से का उपयोग करके, 2% की दर पर बैंकों को ऋण देकर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिये रियायती ऋण को संभव बनाता है।
- वैश्विक संस्थाएँ भी IREDA को वित्तपोषण प्रदान करती हैं; उदाहरण के लिये विश्व बैंक ने सौर पार्कों के लिये 100 मिलियन डॉलर का दान दिया है।
- IREDA, NCEEF के वित्त के एक हिस्से का उपयोग करके, 2% की दर पर बैंकों को ऋण देकर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिये रियायती ऋण को संभव बनाता है।
- PSL की मान्यता: पीएसएल मान्यता: अप्रैल 2015 में RBI ने नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के रूप में नामित किया, तथा यह अनिवार्य किया कि बैंक इस उद्देश्य के लिये शुद्ध ऋण का 40% तक अलग रखें।
- सौर, बायोमास, पवन, सूक्ष्म जलविद्युत और गैर-पारंपरिक ऊर्जा उपयोगिताओं के लिये प्रति उधारकर्त्ता 15 करोड़ रुपए तक का ऋण उपलब्ध है।
- ग्रीन बैंक: ग्रीन बैंक पर्यावरणीय दृष्टि से सतत् परियोजनाओं को वित्तपोषित करके स्वच्छ ऊर्जा वित्तपोषण में तेज़ी लाते हैं।
- भारत में, IREDA, SBI और अन्य बैंक नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिये रियायती ऋण प्रदान करते हैं।
- ग्रीन बॉण्ड: ये पर्यावरण के लिये लाभकारी परियोजनाओं के लिये पूंजी जुटाने हेतु बाज़ार आधारित वित्तीय साधन हैं। उदाहरण के लिये, IREDA द्वारा जारी ग्रीन मसाला बॉण्ड।
- क्राउडफंडिंग: यह एक विकेंद्रीकृत वित्तपोषण मॉडल है जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा के लिये छोटे निजी निवेशों का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिये, क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म बेटरवेस्ट का ग्रामीण भारत में मेरागाओ (MeraGao) पावर और बूँद (Boond) इंजीनियरिंग के लिये समर्थन।
भारत में हरित ऊर्जा वित्तपोषण में क्या चुनौतियाँ हैं?
- सीमित अंतर्राष्ट्रीय वित्त: COP29 UNFCCC में, विकसित देशों ने जलवायु शमन हेतु वर्ष 2035 तक प्रतिवर्ष कम से कम 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने का संकल्प लिया, जो कि आवश्यक वित्तपोषण की तुलना में अपर्याप्त है।
- कई विशेषज्ञों का मानना है कि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद के लिये वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की धनराशि जुटाना आवश्यक है।
- उच्च उधार लागत: उच्च ब्याज दरें, लंबी अवधि तथा उधारदाताओं के लिये वित्तीय प्रोत्साहनों की कमी, हरित वित्त को महंगा बना देती है, जिससे परियोजनाएँ प्रायः वित्तीय रूप से अव्यवहारिक हो जाती हैं।
- निधियों का विचलन: NCEEF की स्थापना स्वच्छ ऊर्जा पहलों के लिये की गई थी, लेकिन इसकी अधिकांश निधियों को GST क्षतिपूर्ति और नमामि गंगे जैसी गैर-नवीकरणीय परियोजनाओं में स्थानांतरित कर दिया गया है।
- ग्रीन बैंकों के लिये संस्थागत बाधाएँ: RBI के स्पष्ट दिशानिर्देशों और कानूनी मान्यता की कमी के कारण भारत में अभी तक ग्रीन बैंकों को संस्थागत रूप नहीं दिया जा सका है, जिससे उनकी विश्वसनीयता और निधि संग्रहण पर असर पड़ रहा है।
- अविकसित ग्रीन बॉण्ड मार्केट: ग्रीन बॉण्ड को उच्च क्रेडिट रेटिंग की आवश्यकता होती है, जो कई नवीकरणीय परियोजनाओं में खराब वित्तीय स्वास्थ्य के कारण नहीं होती है। निवेशकों में फंड के उपयोग को लेकर अविश्वास बना रहता है।
आगे की राह
- जलवायु वित्त को बढ़ावा देना: रियायती वित्तपोषण जुटाने के लिये वैश्विक ग्रीन बॉण्ड मार्केट और बहुपक्षीय संस्थाओं (विश्व बैंक, AIIB) जैसे प्लेटफार्मों का लाभ उठाना।
- निवेशकों को आकर्षित करने के लिये कर-मुक्त ग्रीन बॉण्ड योजना शुरू करते हुए हरित बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिये संप्रभु गारंटी और ब्याज दर सब्सिडी प्रदान करना।
- हरित बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र: स्पष्ट विनियमन और विधिक ढाँचे के साथ RBI के तहत हरित बैंकों को संस्थागत बनाने और साथ साथ ही वैश्विक हरित पूंजी को आकर्षित करने के लिये सार्वजनिक-निजी सह-वित्तपोषण को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।
- वैकल्पिक वित्तपोषण तंत्र: निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और हरित वित्तपोषण साधनों से जुड़े कार्बन क्रेडिट बाज़ार विकसित करने के लिये हरित अवसंरचना निवेश ट्रस्टों (ग्रीन इनविट्स) का विस्तार करने की आवश्यकता है।
- सूक्ष्म वित्त पोषण: महिलाओं के नेतृत्व वाले हरित व्यवसायों को समर्थन प्रदान करना तथा न केवल शमन पर ध्यान केंद्रित करने अपितु अनुकूलन में सहायता प्रदान करने के लिये लघु किसानों के लिये संवहनीय जलवायु जोखिम बीमा प्रदान करने की आवश्यकता है।
दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. वर्ष 2070 तक भारत के नेट-ज़ीरों लक्ष्य को प्राप्त करने में हरित वित्त की भूमिका की विवेचना कीजिये। इसके समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं और इनका समाधान किस प्रकार किया जा सकता है? |
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नप्रिलिम्स:प्रश्न. 'हरित जलवायु निधि (ग्रीन क्लाइमेट फण्ड) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2015)
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये: (a) केवल 1 उत्तर: (a) मेन्स:प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (यू.एन.एफ.सी.सी.) के सी.ओ.पी. के 26वें सत्र के प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिये। इस सम्मेलन में भारत द्वारा की गई वचनबद्धताएँ क्या हैं? (2021) प्रश्न. नवंबर, 2021 में ग्लासगो में विश्व के नेताओं के शिखर सम्मेलन सी.ओ.पी. 26 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में, आरंभ की गई हरित ग्रिड पहल का प्रयोजन स्पष्ट कीजिये। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आई.एस.ए.) में यह विचार पहली बार कब दिया गया था? (2021) |