आपदा जोखिम एवं तन्यकता आकलन रूपरेखा (DRRAF) | 27 Feb 2025

प्रिलिम्स के लिये:

दूरसंचार सेवा प्रदाता, दूरसंचार विभाग (DoT), आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI),  

मेन्स के लिये:

दूरसंचार क्षेत्र को मज़बूत करने के लिये DRRAF की सिफारिशें, भारत में दूरसंचार क्षेत्र के प्रमुख चालक, भारत में दूरसंचार क्षेत्र से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ।

स्रोत: पी.आई.बी.

चर्चा में क्यों?

दूरसंचार विभाग (DoT) ने आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) के साथ मिलकर आपदा जोखिम एवं तन्यकता आकलन रूपरेखा (DRRAF) पर एक रिपोर्ट जारी की है। 

यह रिपोर्ट राष्ट्रीय एवं उप-राष्ट्रीय आपदा जोखिम एवं तन्यकता आकलन पर CDRI के अध्ययन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ भारत के दूरसंचार क्षेत्र की तन्यकता/लचीलेपन को बढ़ाना है।

दूरसंचार अवसंरचना की स्थिति

  • वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में दूरसंचार क्षेत्र का 15% योगदान है और अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह 2.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (6.2% CAGR) तक पहुँच जाएगा।
  • वैश्विक स्तर पर बुनियादी ढाँचे हेतु आपदा जोखिम बढ़ रहे हैं और UN INFORM जोखिम सूचकांक (2024-25) में शामिल 191 देशों में से भारत 35वें स्थान पर है।
    • UN INFORM जोखिम सूचकांक मानवीय संकटों एवं आपदाओं के संदर्भ में एक वैश्विक तथा ओपन सोर्स जोखिम मूल्यांकन उपकरण है।
  • भारत भूकंप (58% भूमि क्षेत्र), बाढ़ (12%), भूस्खलन (15%), और वनाग्नि (10%) के प्रति अत्यधिक सुभेद्य है, जबकि इसकी 5,700 किमी. तटरेखा चक्रवात और सुनामी प्रवण है।

आपदा जोखिम एवं तन्यकता आकलन रूपरेखा (DRRAF) क्या है?

  • परिचय: CDRI, दूरसंचार विभाग और NDMA द्वारा विकसित DRRAF सभी कनेक्टिविटी स्तरों और क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक सिस्टम-स्केल कार्यप्रणाली पर आधारित है।
    • इसका उद्देश्य ‘वर्ष 2027 तक सभी के लिये प्रारंभिक चेतावनी (EW4All)’ पहल के साथ संरेखित करते हुए बुनियादी ढाँचे की क्षति, वित्तीय घाटे को कम करना और आपातकालीन कनेक्टिविटी और सेवा बहाली में सुधार करना है।
    • इसके अंतर्गत 5 प्रमुख आयामों में आपदा प्रतिरोधक्षमता के उपायों के मूल्यांकन और प्रस्ताव किया गया है:
      • तकनीकी योजना एवं डिज़ाइन: दूरसंचार बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण।
      • परिचालन एवं अनुरक्षण: सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करना।
      • नीति, संस्थाएँ एवं प्रक्रियाएँ (PIP): आपदा प्रतिरोधक्षमता को शासन व्यवस्था में एकीकृत करना।
      • वित्तीय व्यवस्था: जोखिम-साझाकरण तंत्र को बढ़ावा देना।
      • विशेषज्ञता: क्षेत्रीय क्षमता और ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ाना।
    • यह हितधारकों को लक्षित प्रतिरोधक्षमता उपायों के माध्यम से आपदा जोखिमों की पहचान करने और उनका समाधान करने में सहायता करता है। 

DRRAF

  • फ्रेमवर्क की मुख्य विशेषताएँ:
    • राज्य स्तर: अध्ययन में 5 राज्यों (असम, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड और गुजरात) में दूरसंचार क्षेत्र में आपदा जोखिमों का आकलन किया गया है।
      • अध्ययन के अनुसार असम और उत्तराखंड में 100% दूरसंचार अवसंरचना भूकंप  के प्रति सुभेद्य है।
      • असम में 83% टावर तथा ओडिशा और तमिलनाडु में 57% टावर चक्रवातों से प्रभावित हैं।
      • असम के 43% टावर बाढ़ के संपर्क में हैं, इसके बाद तमिलनाडु (33%), ओडिशा और गुजरात का स्थान है।
    • राष्ट्रीय स्तर पर: 0.77 मिलियन दूरसंचार टावरों के राष्ट्रीय मूल्यांकन में पाया गया कि 75% टावर वज्रपात के संपर्क में हैं, इसके बाद चक्रवात (57%), भूकंप (27%), और बाढ़ (17%) का स्थान आता है।
    • आपदा जोखिम और लचीलापन सूचकांक (DRRI): खतरों की तीव्रता, आवृत्ति, अवधि और स्थानिक सीमा के आधार पर विभिन्न इलाकों (पर्वत, मैदान, तट) में दूरसंचार टावर भेद्यता का आकलन करने के लिये एक नया सूचकांक ( DRRI) विकसित किया गया है। 
  • दूरसंचार अवसंरचना के लिये चुनौतियाँ:
    • संरचनात्मक भेद्यता: दूरसंचार टावर, विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में, तीव्र पवनों और चक्रवातों से क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। 
      • ओवरहेड फाइबर ऑप्टिक केबल भूमिगत नेटवर्क की तुलना में अधिक नाजुक होते हैं।
    • विद्युत व्यवधान: लंबे समय तक विद्युत कटौती और बैकअप जनरेटर के लिये ईंधन की कमी से नेटवर्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
    • समुद्र के नीचे केबलों को खतरा: समुद्र के नीचे केबल लैंडिंग स्टेशनों के क्षतिग्रस्त होने से राष्ट्रीय कनेक्टिविटी बाधित हो सकती है, जिसकी मरम्मत के लिये विशेष उपकरण और समय की आवश्यकता होती है।

और पढ़ें: भारत में दूरसंचार क्षेत्र से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

लचीले दूरसंचार बुनियादी ढाँचे के लिये रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें क्या हैं?

  • तकनीकी योजना एवं डिजाइन को बढ़ाना: दूरसंचार टावरों की नेटवर्क अतिरेकता, समुद्री केबल सुरक्षा और भूकंपीय लचीलेपन को मज़बूत करना।
    • सड़कों में सामान्य नलिकाओं का उपयोग करके अंतर-संचालनीयता, डेटा केंद्रों के लिये पावर बैकअप और फाइबर ऑप्टिक केबल सुरक्षा में सुधार करना।
  • बहु-खतरा सूचना भंडार का विकास करना:  आपदा प्रभाव डेटा संग्रहण को बढ़ाना, उप-ज़िला स्तर पर बहु-खतरा क्षेत्र मानचित्र विकसित करना, तथा निर्बाध सेवा के लिये महत्त्वपूर्ण दूरसंचार अवसंरचना की पहचान करना।
  • जोखिम-सूचित शासन: आपदा पूर्वानुमान में सुधार, सुदृढ़ भवन संहिताओं को लागू करना तथा शिकायत निवारण के लिये संचार साथी पोर्टल को उन्नत करना।
  • जोखिम-साझाकरण उपकरणों का विकास: आपदा ट्रिगर्स के आधार पर पूर्वनिर्धारित भुगतान प्रदान करके दूरसंचार ऑपरेटरों की वित्तीय अनुकूलता हेतु पैरामीट्रिक बीमा शुरू करना, जिससे तेज़ी से वसूली सुनिश्चित हो सके।
  • जोखिम-साझाकरण उपकरणों का विकास: आपदा ट्रिगर्स के आधार पर पूर्व निर्धारित भुगतान प्रदान करके दूरसंचार ऑपरेटरों की वित्तीय स्थिरता में सुधार करने के लिये पैरामीट्रिक बीमा को लागू करना, ताकि शीघ्र पुनर्प्राप्ति की गारंटी सुनिश्चित हो सके।
  • हितधारक सहयोग को बढ़ाना: ज्ञान-साझाकरण मंच, निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा आपात स्थितियों के दौरान समावेशिता सुनिश्चित करने के लिये अंतिम छोर तक सम्पर्कता और सूचना तक पहुँच को बढ़ावा देना।

अधिक पढ़ें: भारत के दूरसंचार क्षेत्र में सुधार के लिये क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं?  

दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न:

प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं के प्रति भारत के दूरसंचार क्षेत्र की कमज़ोरियों पर चर्चा कीजिये तथा इसकी तन्यकता में वृद्धि हेतु उपाय सुझाइये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारत में निम्नलिखित में से कौन दूरसंचार, बीमा, बिजली आदि क्षेत्रों में स्वतंत्र नियामकों की समीक्षा करता है? (2019)

  1. संसद द्वारा गठित तदर्थ समितियाँ
  2.  संसदीय विभाग से संबंधित स्थायी समितियाँ
  3.  वित्त आयोग
  4.  वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग
  5.  नीति आयोग

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 3, 4 और 5
(d) केवल 2 और 5

उत्तर: a


प्रश्न.  भारत में ‘पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर’ पदबंध किसके प्रसंग में प्रयुक्त किया जाता है? (2020)

(a) डिजिटल सुरक्षा अवसंरचना
(b) खाद्य सुरक्षा अवसंरचना
(c) स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा अवसंरचना
(d) दूरसंचार और परिवहन अवसंरचना

उत्तर: (a)


प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा/से भारत सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ योजना का/के उद्देश्य है/हैं?  (2018)

  1. भारत की अपनी इंटरनेट कंपनियों का गठन, जैसा कि चीन ने किया। 
  2.  एक नीतिगत ढाँचे की स्थापना जिससे बड़े आँकड़े एकत्रित करने वाली समुद्रपारीय बहु-राष्ट्रीय कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा सके कि वे हमारी राष्ट्रीय भौगोलिक सीमाओं के अंदर अपने बड़े डेटा केंद्रों की स्थापना करें। 
  3.  हमारे अनेक गाँवों को इंटरनेट से जोड़ना तथा हमारे बहुत से विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों एवं प्रमुख पर्यटक केंद्रों में वाई-फाई की सुविधा प्रदान करना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)