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भारतीय राजव्यवस्था

भारतीयों के लिये दोहरी नागरिकता पर विमर्श

  • 02 Apr 2025
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये:

नागरिकता, भारत की विदेशी नागरिकता, विप्रेषण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, अनुच्छेद 9, भारत को जानें (नो इंडिया) कार्यक्रम

मेन्स के लिये:

प्रवासी भारतीयों की भूमिका, भारत के लिये दोहरी नागरिकता, नागरिकता पर संवैधानिक प्रावधान

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

भारतीयों के लिये दोहरी नागरिकता पर पुनः विमर्श शुरू हो गया है। चूँकि विश्व में भारत का प्रवासी समुदाय सबसे बृहद है, इसलिये इस पर पुनः चर्चा की जा रही है कि क्या केवल ओवरसीज़ सिटिजनशिप ऑफ़ इंडिया (OCI) के स्थान पर वास्तविक दोहरी नागरिकता भारत की उभरती हुई प्रवासी नीति और वैश्विक परिवर्तनों के साथ बेहतर रूप से सुमेलित होगी।

नोट: दोहरी नागरिकता से व्यक्तियों को अनेक देशों में विधिक प्रस्थिति प्राप्त होती है, जिससे उन्हें पासपोर्ट, राजनीतिक भागीदारी, वीज़ा छूट और रोज़गार के अधिकार प्राप्त होते हैं।

भारतीयों के लिये दोहरी नागरिकता पर विमर्श क्या है?

पक्ष में तर्क

  • सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय: 3.5 करोड़ से ज़्यादा भारतीय विदेश में निवास करते हैं (लगभग 40 भारतीयों में से एक)। भारत वैश्विक स्तर पर विप्रेषण का शीर्ष प्राप्तअकर्त्ता है, जिसे वर्ष 2024 में 129 बिलियन अमरीकी डॉलर प्राप्त हुआ, जो 42 बिलियन अमरीकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) अंतर्वाह से कहीं अधिक है।
  • OCI की सीमाएँ: OCI वास्तविक दोहरी नागरिकता नहीं है। इसके अंतर्गत राजनीतिक अधिकार (जैसे, मतदान, राजकीय पद धारण करना) नहीं प्रदान किये जाते अथवा कृषि भूमि के स्वामित्व की अनुमति नहीं प्रदान की जाती। 
    • इसे अधिकार से अधिक विशेषाधिकार के रूप में देखा जाता है, तथा इसे एकपक्षीयता रूप से रद्द किया जा सकता है, जिससे इसकी सुरक्षा कम हो जाती है।
    • विदेशों में रहने वाले कई भारतीयों के अनुसार OCI दर्जे के तहत वह द्वितीय श्रेणी के नागरिक हैं, जिससे भारत के साथ उनका संबंध कमज़ोर होता है।
  • नीतिगत परिवर्तन बिंदु: जन्मसिद्ध नागरिकता को समाप्त करने की अमेरिकी नीति जैसे उपाय प्रवासियों के प्रति अधिक क्लिष्ट होते वैश्विक परिवेश को दर्शाते हैं, जिससे दोहरी नागरिकता की आवश्यकता बढ़ रही है। 
    • इसके अतिरिक्त, कई भारतीय विदेशी देशों में अधिकार सुरक्षित करने के लिये अपनी नागरिकता का त्याग कर रहे हैं, जो भावनात्मक रूप से कठिन कदम है, जिसका समाधान वास्तविक दोहरी नागरिकता से किया जा सकता है।
  • रणनीतिक सहभागिता: वैश्विक स्तर पर एकीकृत भारतीय नागरिकता भारत की सॉफ्ट पावर और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव को सुदृढ़ बनाती है, जबकि दोहरी नागरिकता से अधिक प्रवासी निवेश, राजनीतिक विषयों  और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे वैश्विक भारतीय समुदाय को राष्ट्रीय परिसंपत्ति के रूप में स्थापित करने के सरकार के उद्देश्य को समर्थन मिल सकता है।
  • तुलनात्मक रुझान: अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, फ्राँस और जर्मनी सहित कई देश विशेष सुरक्षा उपायों के साथ दोहरी नागरिकता की अनुमति देते हैं। 
    • उचित विधिक ढाँचे के साथ भारत भी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किये बिना इस प्रकार कर सकता है।

विपक्ष में तर्क

  • संवैधानिक प्रतिबंध: भारतीय संविधान (अनुच्छेद 9) के अंतर्गत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। विदेशी राष्ट्रीयता प्राप्त करने से भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
  • लोकतांत्रिक वैधता: नागरिकता स्वाभाविक रूप से अविभक्त निष्ठा से जुड़ी हुई है। किसी दूसरे राज्य का नागरिक होते हुए भी भारत में दोहरी नागरिकता रखना या पद धारण करना लोकतांत्रिक संप्रभुता का उल्लंघन है।
  • राजनीतिक करणवाद: विशेषज्ञ एक "कंप्रडर वर्ग" (ऐसे व्यक्ति जो भारत के प्रति वास्तविक निष्ठा के बिना व्यक्तिगत या आर्थिक लाभ के लिये दोहरी राष्ट्रीयता का समुपयोजन करते हैं) के बारे में चेतावनी देते हैं।
    • दोहरी नागरिकता से प्रवासी लॉबिंग या वित्तपोषण के माध्यम से घरेलू राजनीति में बाहरी प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है।
  • सुरक्षा और सामरिक चिंताएँ: भारत के सख्त नागरिकता ढाँचे के पीछे मूल तर्क विभाजन के बाद नागरिकों को स्पष्ट रूप से सीमांकित करना था।
    • दोहरी नागरिकता की अनुमति देने से सुरक्षा-संवेदनशील मामलों में कानूनी अस्पष्टताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषकर यदि व्यक्ति विदेश में संवेदनशील व्यवसायों में शामिल हो।
  • पर्याप्त मौजूदा ढाँचा: विशेषज्ञों का तर्क है कि OCI कार्यक्रम राजनीतिक अधिकारों के बिना प्रवासी समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करता है, संप्रभुता बनाए रखता है तथा FDI और धन प्रेषण जैसे माध्यमों से आर्थिक सहयोग और योगदान को सक्षम बनाता है, जिससे दोहरी नागरिकता अनावश्यक हो जाती है।

Citizenship

दोहरी नागरिकता के मुद्दे पर मध्यमार्गी सुधार क्या हैं?

  • OCI फ्रेमवर्क को बढ़ाना: अधिक कानूनी स्थिरता और अधिकार प्रदान करना (जैसे, कुछ श्रेणियों के लिये भूमि स्वामित्व, सरल व्यावसायिक नियम)। OCI स्थिति को रद्द करने या अस्वीकार करने में उचित प्रक्रिया और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
  • सहभागिता तंत्र: भारत स्थानीय शासन स्तर, जैसे पंचायतों, पर OCI के लिये सीमित राजनीतिक भागीदारी की अनुमति देने पर विचार कर सकता है।
    • पंचायत स्तर पर OCI ज्ञान के आदान-प्रदान, निवेश और विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, तथा स्थानीय शासन में सुधार के लिये वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं।
    • इससे राष्ट्रीय चुनावों में मतदान का अधिकार दिये बिना भी प्रवासी समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। इस तरह का मॉडल संवैधानिक सुरक्षा उपायों के साथ प्रवासी समुदाय के समावेश को संतुलित करता है।
    • इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्तर पर, राजनीतिक मताधिकार का विस्तार किये बिना ग्लोबल इंडियन नेटवर्क ऑफ नॉलेज (Global-INK) जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रवासी सलाहकार परिषदों को संस्थागत रूप दिया जाना चाहिये।
  • सांस्कृतिक पहचान कार्यक्रम: ट्रेसिंग द रूट्स (विदेश मंत्रालय की पहल जो भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) को भारत में अपने पूर्वजों का पता लगाने में मदद करती है), भारत को जानो कार्यक्रम, तथा प्रवासी युवाओं के लिये छात्रवृत्ति योजनाओं जैसे कार्यक्रमों के कवरेज़ का विस्तार करना ताकि वे भारतीय विरासत के साथ अपने संबंध को मज़बूत कर सकें।
  • चयनात्मक दोहरी नागरिकता: यदि कभी इसे लागू किया जाए, तो इसे रणनीतिक साझेदार देशों के नागरिकों तक सीमित रखना, तथा उच्च पदों और संवेदनशील भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से बाहर रखना।

निष्कर्ष

जैसे-जैसे विश्व एक-दूसरे से अधिक एकीकृत होते जा रहे हैं, नागरिकता के प्रति भारत का दृष्टिकोण भी विकसित होना चाहिये। OCI अधिकारों को बढ़ाने और मध्यम मार्ग सुधारों को अपनाने से प्रवासी समुदाय के साथ गहन जुड़ाव को बढ़ावा मिल सकता है। एक व्यावहारिक, चरणबद्ध दृष्टिकोण वैश्विक वास्तविकताओं को अपनाते हुए राष्ट्रीय हितों में संतुलन बनाए रखता है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न: भारत में दोहरी नागरिकता को रोकने वाली बाधाओं की जाँच कीजिये। क्या भारत को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिये? अपने दृष्टिकोण का औचित्य सिद्ध कीजिये। 

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत के संदर्भ मे निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)

  1. भारत में केवल एक ही नागरिकता और एक ही अधिवास है।
  2.  जो व्यक्ति जन्म से नागरिक हो, केवल वही राष्ट्राध्यक्ष बन सकता है।
  3.  जिस विदेशी को एक बार नागरिकता दे दी गई है, किसी भी परिस्थिति में उसे इससे वंचित नहीं किया जा सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3

उत्तर: (a)


प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. आधार कार्ड का प्रयोग नागरिकता या अधिवास के प्रमाण के रूप में किया जा सकता है।
  2.  एक बार जारी होने के पश्चात् इसे निर्गत करने वाला प्राधिकरण आधार संख्या को निष्क्रिय या लुप्त नहीं कर सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों 
(d) न तो 1 और न ही 2 

उत्तर: (d)

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