एथिक्स
स्वास्थ्य देखभाल में करुणा
- 04 Apr 2025
- 10 min read
प्रिलिम्स के लिये:विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र, आयुष्मान भारत, टेली मानस मेन्स के लिये:सार्वजनिक सेवा वितरण में करुणा और नैतिकता की भूमिका, भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुधार |
स्रोत:द हिंदू
चर्चा में क्यों?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने "कंपैशन एंड प्राइमरी हेल्थ केयर (PHC)" शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें करुणा को PHC में सुधार और रोगी-केंद्रित, सम्मानजनक देखभाल के माध्यम से बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने की कुंजी के रूप में रेखांकित किया गया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में करुणा का क्या महत्त्व है?
- परिचय: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में करुणा का तात्पर्य मानवीय पीड़ा की पहचान के साथ-साथ आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में उसके निवारण के लिये प्रेरणा और कार्यवाही से है।
- यह केवल एक नैतिक मूल्य नहीं है, बल्कि एक व्यावहारिक प्रेरक है जो देखभाल की गुणवत्ता, पहुँच और समानता को बढ़ाता है।
- महत्त्व: करुणा सहानुभूति और समानुभूति से भिन्न है। सहानुभूति निष्क्रियता और दया से प्रेरित होती है, जबकि समानुभूति भावनात्मक थकावट का कारण बन सकती है।
- इसके विपरीत, करुणा भावनात्मक संबंध को विचारशील कार्यवाही के साथ एकीकृत करती है, जिससे यह स्वास्थ्य देखभाल में अधिक धारणीय और प्रभावी दृष्टिकोण बन जाता है।
- स्वास्थ्य देखभाल में भूमिका: भारत में मानसिक विकारों की आजीवन व्यापकता 13.7% है, और भारत की 15% वयस्क आबादी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव करती है।
- WHO का अनुमान है कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ प्रति 10000 जनसंख्या पर 2443 दिव्यांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALY) है। मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के कारण वर्ष 2012-2030 के बीच होने वाली आर्थिक क्षति 1.03 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
- भारत में जागरूकता की कमी, सामाजिक बहिष्करण और पेशेवरों की कमी के कारण मानसिक विकार से पीड़ित 70% से 92% लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है।
- अवसाद और चिंता के बढ़ते मामलों के साथ, करुणा स्वास्थ्य सेवा में एक महत्त्वपूर्ण घटक बन गई है। यह सेवाओं को अधिक उत्तरदायी, सम्मानजनक और समग्र बनाकर लोगों पर केंद्रित देखभाल को बढ़ावा देती है।
- इसके अलावा, करुणा रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्द्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक देखभाल सहित संपूर्ण स्वास्थ्य सातत्य को मज़बूत करती है, तथा यह सुनिश्चित करती है कि देखभाल प्रभावी और सहानुभूतिपूर्ण हो।
- करुणा विशेष रूप से दलितों, आदिवासियों, LGBTQ+ व्यक्तियों, दिव्यांग व्यक्तियों और अन्य हाशिये के समूहों के लिये समावेशी देखभाल को बढ़ावा देती है।
करुणामयी स्वास्थ्य सेवा से संबंधित केस स्टडीज़
- घरेलू हिंसा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करती आशा कार्यकर्त्ता:
- मुख्य अभिकर्त्ता: आशा कार्यकर्त्ता प्रवीणा बेन
- नैतिक दृष्टिकोण: आशा कार्यकर्त्ताओं ने घरेलू हिंसा, जो कि एक बेहद संवेदनशील और आक्षिप्त (Stigmatized) मुद्दा है, को संबोधित करने के लिये मातृ स्वास्थ्य से परे अपनी भूमिकाएँ बढ़ाईं।
- उन्होंने निजी रेफरल और आघात-सूचित देखभाल सुनिश्चित कर पीड़ितों की गरिमा और स्वायत्तता को अक्षुण्ण रखा।
- तमिलनाडु के आपदा-मोचन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र:
- नैतिक दृष्टिकोण: तमिलनाडु की स्वास्थ्य प्रणाली आपदा मोचन के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करके पूर्वानुमानित नैतिक शासन का प्रदर्शन करती है।
- इसके अंतरविभागीय समन्वय से संकट के दौरान त्वरित, मानवीय कार्रवाई सुनिश्चित होती है और साथ ही सर्वाधिक सुभेद्य लोगों की सुरक्षा के लिये संसाधन के नैतिक आवंटन को प्राथमिकता दी जाती है।
- नैतिक दृष्टिकोण: तमिलनाडु की स्वास्थ्य प्रणाली आपदा मोचन के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करके पूर्वानुमानित नैतिक शासन का प्रदर्शन करती है।
- जनजातीय क्षेत्रों में नैदानिक प्रयास:
- मुख्य अभिकर्त्ता: डॉ. विदित पांचाल, अमृत क्लिनिक (एनजीओ: बेसिक हेल्थ सर्विसेज)।
- नैतिक दृष्टिकोण: अनुपयुक्त बुनियादी ढाँचे और सीमित सहायता के बावजूद, डॉ. पांचाल ने गंभीर रूप से बीमार टीबी रोगी तुकाराम को दूरवर्ती अस्पताल में रेफर करने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही रोगी का उपचार करने का चयन किया और प्रशासनिक सुविधा की अपेक्षा रोगी की गरिमा और सुविधा को प्राथमिकता दी।
- उन्होंने परोपकार और करुणा के साथ कार्य किया, जीवन के अंतिम समय में देखभाल में सांत्वना प्रदान की और पीड़ा को कम किया।
भारत में करुणामयी स्वास्थ्य उपचार को बढ़ाने के लिये क्या किया जा सकता है?
- करुणा को संस्थागत बनाना: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में स्वास्थ्य देखभाल का जन-केंद्रित होने और इसमें नैतिक प्रावधान की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।
- इस दृष्टिकोण को सुदृढ़ बनाने के लिये, करुणा को दक्षता और प्रभावशीलता के साथ-साथ देखभाल की गुणवत्ता (QoC) के एक महत्त्वपूर्ण आयाम के रूप में एकीकृत किया जाना चाहिये।
- रोगी-प्रदाता संपर्क में सुधार के लिये आयुष्मान भारत के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (HWC) में करुणामयी व्यवहार अनिवार्य किया जाना चाहिये।
- स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों की क्षमता में वृद्धि: स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को आघात-सूचित और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील देखभाल का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये।
- मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं और सहायक नर्स दाइयों को, विशेष रूप से घरेलू हिंसा, दुर्व्यवहार, किशोर स्वास्थ्य और मानसिक संकट संबंधी उपचार करने के दौरान करुणामय वार्ता करने हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिये।
- अंकेक्षण में करुणा मीट्रिक्स का एकीकरण: 15वें वित्त आयोग में परिणाम-आधारित स्वास्थ्य अनुदान की अनुशंसा की गई और इसके साथ संरेखित करते हुए, रोगी के फीडबैक तंत्रों से प्राप्त करुणा स्कोर को परिणामों में एकीकृत किया जा सकता है।
- यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को करुणामय स्वास्थ्य सेवा के लिये प्रोत्साहित किया जाए।
- नीति आयोग के विज़न 2035 में लोगों को प्राथमिकता देने वाली डेटा प्रणालियों पर ज़ोर दिया गया है, जिससे नैतिक डेटा संग्रह और सम्मानजनक सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित होती है।
- पाठ्यक्रम में सुधार: करुणामय नेतृत्व, दुःख परामर्श और कालांत (end-of-life) संचार पर मॉड्यूल प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।
- मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप: टेली मानस में, जो वर्तमान में 20 से अधिक भाषाओं में संचालित है और जिसने 1.8 मिलियन लोगों की सहायता की, प्रथम-स्तरीय प्रत्युत्तरों के लिये सहानुभूति प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल करना चाहिये।
- ऐसी रणनीतियाँ अपनाने की आवश्यकता है जिनसे गृहवीक्षा (Home Visit), मातृ परामर्श और सामुदायिक स्वास्थ्य संवाद को बढ़ावा मिले।
दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. प्राथमिक स्वास्थ्य रक्षण में महत्त्वपूर्ण आयाम के रूप में करुणा के महत्त्व पर चर्चा कीजिये। भारत अपनी स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों में करुणा को किस प्रकार शामिल कर सकता है? |
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नमेन्स:प्रश्न. सामाजिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के क्रम में विशेषकर जरा चिकित्सा एवं मातृ स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में सुदृढ़ और पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल संबंधी नीतियों की आवश्यकता है। विवेचना कीजिये। (2020) |