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राजस्थान स्टेट पी.सी.एस.

  • 04 Apr 2025
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मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना

चर्चा में क्यों?

हाल ही में राजस्थान सरकार ने एक घोषणा की है कि अब उपभोक्ताओं को 150 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलेगी। इसके लिये, पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने के नियमों में बदलाव किये गए हैं।

मुख्य बिंदु

  • योजना के बारे में:
    • राजस्थान में मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना के तहत अब तक 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है, जिससे प्रदेश के 1.04 करोड़ लाभार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। 
    • कितुं अब पीएम सूर्य घर योजना के तहत अपने घरों की छत पर सोलर प्लांट लगाने पर उपभोक्ता 150 यूनिट निशुल्क बिजली उपभोग कर सकेंगे। 
    • इस योजना के तहत 150 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ता अपने घरों में निःशुल्क सौर संयंत्र स्थापित करवा सकते हैं।

  • उद्देश्य: 

    • लाभार्थी परिवारों को सस्ती और सुलभ सौर ऊर्जा से जोड़कर उन्हें अतिरिक्त लाभ प्रदान करना है।
  • प्रावधान 
    • प्रति माह 150 यूनिट से कम बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को नजदीकी सबस्टेशनों या उपयुक्त स्थानों पर स्थापित सामुदायिक सौर संयंत्रों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से 150 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी। 
    • 150 यूनिट से अधिक खपत करने वाले परिवारों को 1.1 किलोवाट के रूफटॉप सोलर प्लांट की स्थापना के माध्यम से 150 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी। 
    • प्रत्येक रूफटॉप सोलर प्लांट की लागत 50,000 रुपए (मीटरिंग को छोड़कर) है, जिसमें से 33,000 रुपए केंद्रीय वित्तीय सहायता से और 17,000 रुपए तक राज्य द्वारा प्रदान किये जाते हैं

पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना

  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा फरवरी 2024 में शुरू की गई पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य छतों पर सौर पैनल संस्थापित कर एक करोड़ घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है।
  • इस योजना का परिव्यय 75,021 करोड़ रुपए है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 तक लागू किया जाना है। 
    • इसके अंतर्गत प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान की जाती है तथा संस्थापना लागत के लिये 40% तक सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे संपूर्ण देश में सौर ऊर्जा को व्यापक रूप से अपनाने को बढ़ावा मिलता है।
  • पात्रता: भारतीय नागरिक, मकान मालिक, वैध बिजली कनेक्शन, परिवार द्वारा सौर पैनल से संबंधित किसी अन्य सब्सिडी का लाभ न उठाया गया हो। 
    • कार्यान्वयन: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन एजेंसी (NPIA) और राज्य स्तर पर राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों (SIA) द्वारा किया जाता है।
  • प्रमुख प्रावधान: 
    • केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA): राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से छत पर सौर पैनल स्थापित करने के लिये आवासीय उपभोक्ताओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
    • आदर्श सौर ग्राम: इसके तहत प्रति ज़िले एक आदर्श सौर ग्राम का निर्माण करना एवं सौर ऊर्जा अपनाने को बढ़ावा देना शामिल है।
    • प्रत्येक ज़िले में सर्वाधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाले गाँव को एक करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है।
    • 5,000 (या विशेष राज्यों में 2,000) से अधिक आबादी वाले गाँव चयन के पात्र हैं और ज़िला स्तरीय समिति (DLC) द्वारा पहचान किये जाने के छह महीने बाद नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाता है।


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बेरोज़गार युवा अब आकांक्षी युवा कहलाएंगे

चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बेरोज़गार युवाओं को स्वरोज़गार और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से ‘आकांक्षी युवा’ का दर्जा देने का निर्णय लिया है। 

मुख्य बिंदु

  • मुद्दे के बारे में:
    • राज्य मंत्री के अनुसार, सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के बेरोज़गार युवा सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियों के लिये अपनी आकांक्षाओं को उच्च स्तर तक पहुंचाएँ और वे सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण कराकर नौकरी की तलाश में सक्रिय रूप से शामिल हों। 
    • यह कदम उन युवाओं को प्रेरित करने के लिये है, जो अपनी क्षमताओं के आधार पर स्वरोज़गार की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।
    • राज्य के रोज़गार पोर्टल पर मध्य प्रदेश में बेरोज़गार युवाओं की संख्या संख्या 29.37 लाख से अधिक दिखाई गई है।
    • राज्य सरकार आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के माध्यम से आकांक्षी युवाओं को रोज़गार से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
    • उन्होंने यह भी बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से मध्य प्रदेश को 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्ताव मिला है, जिससे 21 लाख युवाओं के लिये रोज़गार सृजन की उम्मीद है।

बेरोज़़गारी क्या है?

  • परिचय:
    • बेरोज़गारी उस स्थिति को संदर्भित करती है जहाँ काम करने में सक्षम व्यक्ति सक्रिय रूप से रोज़गार की तलाश कर रहे हैं लेकिन उपयुक्त नौकरियाँ प्राप्त करने में असमर्थ हैं।
    • बेरोज़गार व्यक्ति वह है जो श्रम शक्ति का हिस्सा है और साथ ही उसके पास अपेक्षित कौशल भी होता है लेकिन वर्तमान में उसके पास लाभकारी रोज़गार का अभाव है।
    • मूल रूप से एक बेरोज़गार व्यक्ति वह होता है जो काम करने में सक्षमता के साथ-साथ काम करने का इच्छुक भी होता है और सक्रिय रूप से रोज़गार की तलाश में होता है।
  • बेरोज़़गारी का मापन:
    • बेरोज़़गारी दर = [बेरोज़गार श्रमिकों की संख्या/कुल श्रम बल] x 100
    • यहाँ, 'कुल श्रम शक्ति' में नियोजित व्यक्तियों के साथ-साथ बेरोज़गार भी शामिल हैं। जो लोग न तो नियोजित हैं और न ही बेरोज़गार हैं, उदाहरण के लिये– छात्र, उन्हें श्रम शक्ति का हिस्सा नहीं माना जाता है।
      • देश में बेरोज़गारी की गणना आमतौर पर सूत्र का उपयोग करके की जाती है:
  • बेरोज़़गारी के प्रकार:
    • संरचनात्मक बेरोज़गारी: कार्यबल के पास मौजूद कौशल एवं उपलब्ध पदों की आवश्यकताओं के बीच के अंतराल में निहित बेरोज़गारी का यह रूप श्रम बाज़ार के प्रणालीगत मुद्दों पर प्रकाश डालता है।
    • चक्रीय बेरोज़गारी: यह व्यापार चक्र का परिणाम है, जहाँ मंदी के दौरान बेरोज़गारी बढ़ती है और आर्थिक विकास के साथ घटती है, जो व्यापक आर्थिक स्थितियों के लिये नौकरी की उपलब्धता की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
    • घर्षणात्मक बेरोज़गारी/संक्रमणकालीन बेरोज़गारी: इसे संक्रमणकालीन बेरोज़गारी भी कहा जाता है, जो नौकरियों के बीच प्राकृतिक संक्रमण से उत्पन्न होती है, यह प्रकार उस अस्थायी अवधि को दर्शाता है जो व्यक्ति नए रोज़गार के अवसरों की तलाश में व्यतीत होते हैं।
    • अल्परोज़गार: अल्परोज़़गारी, हालाँकि पूर्ण बेरोज़़गारी नहीं है, यह अवधारणा उन पदों पर कार्यरत व्यक्तियों से संबंधित है जो अपने कौशल का कम उपयोग करते हैं या अपर्याप्त कार्य घंटे प्रदान करते हैं, जिससे आर्थिक अक्षमता की भावना उत्पन्न होती है।
    • छिपी हुई बेरोज़गारी: ऐसे व्यक्तियों को संदर्भित करता है जो निराशा अथवा अन्य कारकों के कारण सक्रिय रूप से रोज़गार की तलाश नहीं कर रहे हैं, लेकिन स्थिति में सुधार होने पर संभावित रूप से नौकरी बाज़ार में प्रवेश कर सकते हैं।
    • प्रच्छन्न बेरोज़गारी: यह इसलिये उत्पन्न होती है क्योंकि कारखाने में अथवा भूमि पर आवश्यकता से अधिक मज़दूर काम करते हैं। अतः श्रम की प्रति इकाई उत्पादकता कम होगी।


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