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हरियाणा स्टेट पी.सी.एस.

  • 01 Mar 2025
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यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) की खपत में वृद्धि

चर्चा में क्यों?

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने हरियाणा, गुजरात, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में चालू रबी सीज़न (2024-25) के दौरान यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) की खपत में तीव्र वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है।

मुख्य बिंदु

  • यूरिया और DAP की बढ़ती खपत:
    • यूरिया और DAP कृषि उत्पादकता के लिये आवश्यक हैं और भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिये आयात पर निर्भर है।
    • कृषि सचिव ने हरियाणा के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कुछ जिलों में अत्यधिक उर्वरक खपत पर प्रकाश डाला।
    • उन्होंने कहा कि उपयोग अनुमानित मासिक आवश्यकता और पिछले वर्ष के आँकड़ों से अधिक हो गया है, जो असंतुलन को दर्शाता है।
  • यूरिया खपत की प्रवृत्ति:
    • हरियाणा में यूरिया का उपयोग पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में 18% बढ़कर 9,40,549 मीट्रिक टन से बढ़कर 11,07,205 मीट्रिक टन हो गया।
    • सर्वाधिक वृद्धि निम्नलिखित क्षेत्रों में दर्ज की गई:
      • चरखी दादरी – 107%
      • यमुनानगर – 32%
      • सोनीपत – 30%
    • अन्य राज्यों में भी यूरिया की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई:
      • झारखंड – 35%
      • छत्तीसगढ़ – 37%
      • जम्मू और कश्मीर – 24%
      • कर्नाटक – 20%
      • बिहार – 17%
      • गुजरात – 2%
  • DAP उपभोग की प्रवृत्ति:
    • हरियाणा में DAP का उपयोग 18% बढ़कर 3,25,416 मीट्रिक टन हो गया, जबकि पिछले तीन वर्षों में यह औसत 2,75,934 मीट्रिक टन था।
    • सर्वाधिक वृद्धि वाले जिले:
      • चरखी दादरी – 184%
      • महेंद्रगढ़ – 65%
      • यमुनानगर – 55%
      • अंबाला – 48%
      • पंचकूला – 39%
      • रेवाड़ी – 34%
      • झज्जर – 30%
    • अन्य राज्यों में भी DAP के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई:
      • छत्तीसगढ़ – 30%
      • गुजरात– 25%
      • बिहार – 17%
    • उर्वरक के दुरुपयोग पर चिंताएँ:
      • रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने जनवरी में संभावित डायवर्जन की चेतावनी दी थी।
      • हरियाणा के कृषि निदेशक राजनारायण कौशिक ने स्वीकार किया कि यूरिया का उपयोग उद्योगों की ओर किया जा सकता है।
  • उपयोग में वृद्धि को प्रेरित करने वाले कारक:
    • धान की पराली प्रबंधन : किसान अब धान की पराली के प्रबंधन के लिये प्रति एकड़ 25-45 किलोग्राम यूरिया का उपयोग करते हैं।
  • नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P) और पोटेशियम (K)उर्वरक उपयोग: 
  • पिछले वर्ष की 26,000 मीट्रिक टन से बढ़कर इस सीज़न में खपत 66,000 मीट्रिक टन हो गई।
    • चूँकि NPK में DAP की तुलना में नाइट्रोजन की मात्रा कम होती है, इसलिये किसान अतिरिक्त यूरिया का उपयोग करके इसकी भरपाई करते हैं।
  • उच्च नाइट्रोजन वाली गेहूँ की किस्में:
    • डब्ल्यूएच 1270, डीबीडब्ल्यू 187, 303 और 327 जैसी गेहूँ की किस्मों को पुरानी किस्मों की तुलना में 1.5 गुना अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है।
    • अधिक उपज की उम्मीद में किसान अधिक यूरिया का उपयोग करते हैं।
    • ये किस्में अब हरियाणा में अनुमानित 2.50 लाख एकड़ क्षेत्र में फैली हुई हैं।
  • अंतर-राज्यीय उर्वरक आवागमन:
    • रिपोर्टों से पता चलता है कि हरियाणा से उर्वरकों को पंजाब और उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा है।
    • भारतीय किसान यूनियन (चरुणी गुट) के राकेश बैंस ने दावा किया कि कुछ उर्वरकों को प्लाईवुड उद्योग में भी भेजा जा रहा है ।

DAP (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट)

  • DAP भारत में यूरिया के बाद दूसरा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला उर्वरक है।
  • DAP भारत में एक पसंदीदा उर्वरक है, क्योंकि इसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस दोनों होते हैं जो प्राथमिक मैक्रो-पोषक तत्त्व हैं और 18 आवश्यक पौधों के पोषक तत्वों का हिस्सा हैं।
  • उर्वरक ग्रेड DAP में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है। इसे उर्वरक संयंत्रों में नियंत्रित परिस्थितियों में फॉस्फोरिक एसिड के साथ अमोनिया की प्रतिक्रिया करके बनाया जाता है।

यूरिया

  • यूरिया एक सफेद क्रिस्टलीय यौगिक है जिसका उपयोग आमतौर पर कृषि में सिंथेटिक उर्वरक के रूप में किया जाता है।
  • जब यूरिया को मिट्टी या फसलों पर डाला जाता है, तो एंजाइम्स द्वारा इसे अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड में तोड़ दिया जाता है।
  • इसके बाद अमोनिया अमोनियम आयनों में परिवर्तित हो जाता है, जिसे पौधों की जड़ों द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है तथा वृद्धि एवं विकास के लिये उपयोग किया जाता है।


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