बेरोज़गार युवा अब आकांक्षी युवा कहलाएंगे | 04 Apr 2025

चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बेरोज़गार युवाओं को स्वरोज़गार और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से ‘आकांक्षी युवा’ का दर्जा देने का निर्णय लिया है। 

मुख्य बिंदु

  • मुद्दे के बारे में:
    • राज्य मंत्री के अनुसार, सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के बेरोज़गार युवा सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियों के लिये अपनी आकांक्षाओं को उच्च स्तर तक पहुंचाएँ और वे सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण कराकर नौकरी की तलाश में सक्रिय रूप से शामिल हों। 
    • यह कदम उन युवाओं को प्रेरित करने के लिये है, जो अपनी क्षमताओं के आधार पर स्वरोज़गार की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।
    • राज्य के रोज़गार पोर्टल पर मध्य प्रदेश में बेरोज़गार युवाओं की संख्या संख्या 29.37 लाख से अधिक दिखाई गई है।
    • राज्य सरकार आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के माध्यम से आकांक्षी युवाओं को रोज़गार से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
    • उन्होंने यह भी बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से मध्य प्रदेश को 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्ताव मिला है, जिससे 21 लाख युवाओं के लिये रोज़गार सृजन की उम्मीद है।

बेरोज़़गारी क्या है?

  • परिचय:
    • बेरोज़गारी उस स्थिति को संदर्भित करती है जहाँ काम करने में सक्षम व्यक्ति सक्रिय रूप से रोज़गार की तलाश कर रहे हैं लेकिन उपयुक्त नौकरियाँ प्राप्त करने में असमर्थ हैं।
    • बेरोज़गार व्यक्ति वह है जो श्रम शक्ति का हिस्सा है और साथ ही उसके पास अपेक्षित कौशल भी होता है लेकिन वर्तमान में उसके पास लाभकारी रोज़गार का अभाव है।
    • मूल रूप से एक बेरोज़गार व्यक्ति वह होता है जो काम करने में सक्षमता के साथ-साथ काम करने का इच्छुक भी होता है और सक्रिय रूप से रोज़गार की तलाश में होता है।
  • बेरोज़़गारी का मापन:
    • बेरोज़़गारी दर = [बेरोज़गार श्रमिकों की संख्या/कुल श्रम बल] x 100
    • यहाँ, 'कुल श्रम शक्ति' में नियोजित व्यक्तियों के साथ-साथ बेरोज़गार भी शामिल हैं। जो लोग न तो नियोजित हैं और न ही बेरोज़गार हैं, उदाहरण के लिये– छात्र, उन्हें श्रम शक्ति का हिस्सा नहीं माना जाता है।
      • देश में बेरोज़गारी की गणना आमतौर पर सूत्र का उपयोग करके की जाती है:
  • बेरोज़़गारी के प्रकार:
    • संरचनात्मक बेरोज़गारी: कार्यबल के पास मौजूद कौशल एवं उपलब्ध पदों की आवश्यकताओं के बीच के अंतराल में निहित बेरोज़गारी का यह रूप श्रम बाज़ार के प्रणालीगत मुद्दों पर प्रकाश डालता है।
    • चक्रीय बेरोज़गारी: यह व्यापार चक्र का परिणाम है, जहाँ मंदी के दौरान बेरोज़गारी बढ़ती है और आर्थिक विकास के साथ घटती है, जो व्यापक आर्थिक स्थितियों के लिये नौकरी की उपलब्धता की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
    • घर्षणात्मक बेरोज़गारी/संक्रमणकालीन बेरोज़गारी: इसे संक्रमणकालीन बेरोज़गारी भी कहा जाता है, जो नौकरियों के बीच प्राकृतिक संक्रमण से उत्पन्न होती है, यह प्रकार उस अस्थायी अवधि को दर्शाता है जो व्यक्ति नए रोज़गार के अवसरों की तलाश में व्यतीत होते हैं।
    • अल्परोज़गार: अल्परोज़़गारी, हालाँकि पूर्ण बेरोज़़गारी नहीं है, यह अवधारणा उन पदों पर कार्यरत व्यक्तियों से संबंधित है जो अपने कौशल का कम उपयोग करते हैं या अपर्याप्त कार्य घंटे प्रदान करते हैं, जिससे आर्थिक अक्षमता की भावना उत्पन्न होती है।
    • छिपी हुई बेरोज़गारी: ऐसे व्यक्तियों को संदर्भित करता है जो निराशा अथवा अन्य कारकों के कारण सक्रिय रूप से रोज़गार की तलाश नहीं कर रहे हैं, लेकिन स्थिति में सुधार होने पर संभावित रूप से नौकरी बाज़ार में प्रवेश कर सकते हैं।
    • प्रच्छन्न बेरोज़गारी: यह इसलिये उत्पन्न होती है क्योंकि कारखाने में अथवा भूमि पर आवश्यकता से अधिक मज़दूर काम करते हैं। अतः श्रम की प्रति इकाई उत्पादकता कम होगी।