भारत का नवीनतम कृषि निर्यात डेटा

प्रिलिम्स के लिये:

खाद्य मूल्य सूचकांक, भारत का निर्यात-आयात डेटा और रुझान, सरकारी योजनाएँ 

मेन्स के लिये:

कृषि निर्यात और आयात के पीछे प्रमुख कारक, निर्यात को बढ़ावा देने के लिये सरकारी उपाय, आगे की चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में वाणिज्य विभाग द्वारा जारी अनंतिम आँकड़ों से पता चला है कि 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत के कृषि निर्यात और आयात दोनों ने नई उँचाई हासिल की है।

  • आँकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2022-23 के दौरान कुल कृषि निर्यात 53.15 बिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात 35.69 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो इनके पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को पार कर गया। 
  • परिणामी कृषि व्यापार अधिशेष 17.82 बिलियन अमेरिकी डॉलर से मामूली रूप से घटकर 17.46 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है।

India's-Agricultural

निर्यात में वृद्धि के पीछे मुख्य कारक:

  • वर्ष 2013-14 और 2015-16 के बीच मुख्य रूप से वैश्विक कीमतों में गिरावट के कारण भारत का कृषि निर्यात 43.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर से गिरकर 32.81 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया जैसा कि संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के खाद्य मूल्य सूचकांक (FFPI) में परिलक्षित होता है।
    • हालाँकि आयात में वृद्धि जारी रही जिससे कृषि व्यापार अधिशेष में गिरावट आई।
  • हाल के वर्षों में FFPI में सुधार हुआ है जिसने भारत की कृषि वस्तुओं को विश्व स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्द्धी बना दिया है, इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2020-2023 के दौरान निर्यात में वृद्धि हुई है।

FAO का खाद्य मूल्य सूचकांक:

  • FFPI खाद्य वस्तुओं की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में मासिक परिवर्तन का एक उपाय है। यह अनाज, तिलहन, डेयरी उत्पाद, मांस और चीनी के लिये परिवर्तनों को मापता है।
  • आधार अवधि: 2014-16
  • FFPI तब बढ़ता है जब अंतर्राष्ट्रीय खाद्य कीमतें बढ़ती हैं।

प्रमुख निर्यात योगदानकर्त्ता: 

  • हाल के दिनों में समुद्री उत्पाद, चावल और चीनी भारत के कृषि निर्यात के लिये प्रेरक शक्ति के रूप में शामिल रहे हैं। 
    • समुद्री उत्पाद: समुद्री उत्पाद का निर्यात वर्ष 2013-14 के 5.02 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 8.08 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है।
    • चावल: इस अवधि के दौरान चावल का निर्यात भी 7.79 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 11.14 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है।
      • यह गैर-बासमती चावल द्वारा संचालित है जो कि दोगुने से अधिक हो गया है। दूसरी ओर, प्रीमियम कीमत वाले बासमती चावल में गिरावट देखी गई है।
      • बासमती चावल का निर्यात मुख्य रूप से फारस की खाड़ी के देशों और कुछ हद तक अमेरिका एवं ब्रिटेन को किया जाता है। गैर-बासमती चावल का निर्यात अधिक विविध है।
      • गैर-बासमती चावल के कारण भारत अब थाईलैंड को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है।
    • चीनी: तीसरा सबसे बड़ा कारक चीनी निर्यात में हालिया वृद्धि है, जो वर्ष 2017-18 के 810.90 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2022-23 में 5.77 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है।
      • इस प्रक्रिया में भारत, ब्राज़ील के बाद दुनिया के नंबर 2 निर्यातक के रूप में उभरा है।

निर्यात साधनों में अन्य पिछड़े और घाटे की वस्तुओं का व्यापार: 

  • मसाले: मसाला निर्यात जिसमें वर्ष 2013-2021 के दौरान वृद्धि देखी गई थी, हालाँकि यह तब से स्थिर है।
  • भैंस: भैंस के मांस के निर्यात में भी गिरावट आई है जो वर्ष 2014-15 में 4.78 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अपने चरम निर्यात को दोबारा नहीं प्राप्त कर सका।
  • तेल खली, कच्ची कपास और ग्वार गम: तेल खली, कच्ची कपास और ग्वार गम में कमी उल्लेखनीय रूप से अधिक देखी गई। हालाँकि वर्ष 2022-2023 में तीनों का निर्यात वर्ष 2011-12 के अपने शिखर से बहुत दूर था।
    • आनुवंशिक रूप से संशोधित BT कपास की खेती और उच्च वैश्विक कीमतों ने भारत को प्राकृतिक फाइबर का विश्व का शीर्ष उत्पादक (चीन से आगे) एवं नंबर 2 निर्यातक (अमेरिका के बाद) बनने में सक्षम बनाया है।
      • क्योंकि BT कपास की उपज में सुधार कम हो रहा है और नियामक प्रणाली नई जीन प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर रोक लगाती है, जिससे देश कपास के शुद्ध निर्यातक से आयातक बन गया है।
    • वर्ष 2003-2004 से 2013-2014 तक वैश्विक कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि से ग्वार-गम (शेल तेल और गैस उत्पादन में इस्तेमाल किया जाने वाला गाढ़ा एजेंट) तथा ऑयल मील/तेल खली के निर्यात में लाभ हुआ।
      • हाल के कोविड महामारी के उपरांत की वृद्धि नहीं देखी गई क्योंकि आंशिक रूप से घरेलू फसल की कमी के कारण विशेष रूप से कपास एवं सोयाबीन में निर्यात हेतु पर्याप्त अधिशेष का उत्पादन नहीं हुआ है।

Agri-Export

आयात साधनों में प्रमुख योगदानकर्त्ता:   

  • भारत की आयातित कृषि उपज के साधनों/टोकरी में इसके निर्यात की तुलना में कृषि उत्पादों का प्रभुत्त्व कम है।
    • इन आयातों में सबसे महत्त्वपूर्ण वनस्पति तेल है, जिसका आयात वर्ष 2019-20 और 2022-23 के बीच मूल्य के संदर्भ में दोगुने से भी अधिक हो गया है।
  • आयात भारत की वनस्पति तेल आवश्यकताओं का लगभग 60% को पूरा करता है, जबकि दालों के आयात पर निर्भरता अब मुश्किल से 10% ही है।
    • दालों के आयात का मूल्य भी घटकर आधा हो गया है, यह वर्ष 2016-17 के 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से घटकर 2022-23 में 1.9 अमेरिकी डॉलर हो गया है।
  • मसालों, काजू और कपास का आयात, जिसका भारत पारंपरिक रूप से एक शुद्ध निर्यातक रहा है, में वृद्धि देखी गई है।
    • मसालों के आयात में बढ़ोतरी कीमतों में कम प्रतिस्पर्द्धात्मकता को दर्शाती है, जबकि स्थिर अथवा घरेलू उत्पादन में गिरावट के परिणामस्वरूप कपास का आयात बढ़ा है। 

Agri-Import

व्यापार क्षेत्र में जोखिम:

  • अंतर्राष्ट्रीय कीमतें: अप्रैल 2023 के नवीनतम FFPI आँकड़े मार्च 2022 और वर्ष 2022-23 के औसत से नीचे है। खाद्य कीमतों में कमी से निर्यात आय में कमी आ सकती है, विशेष रूप से उन उत्पादों के लिये जो अधिक मूल्य संवेदनशील हैं।
  • घरेलू मुद्रास्फीति: वर्ष 2024 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले खाद्य उत्पादों में मुद्रास्फीति की संभावना है, जो सामान रूप से निर्यात-आयात व्यापार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
    • घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिये सरकार द्वारा किये गए उपाय जैसे कि गेहूँ और टूटे दाने वाले चावल के निर्यात पर प्रतिबंध तथा सभी नॉन  हुए गैर-बासमती चावल शिपमेंट पर 20% शुल्क लगाने से कृषि व्यापार पर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
    • यदि स्थिति सामान्य नहीं होती है तो निर्यात में और अधिक अंकुश लगाए जाने की उम्मीद है, यदि मानसून के मौसम में असामान्य वर्षा होती है तो आयात में और उदारीकरण होने की संभावना है।

कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिये सरकार द्वारा किये गए उपाय:

  • कृषि निर्यात नीति (2018): इसका उद्देश्य भारत को कृषि क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिये भारतीय कृषि की निर्यात क्षमता का दोहन करना है।
  • 'निर्यात हब के रूप में ज़िला' पहल: इस पहल का लक्ष्य सभी ज़िलों में निर्यात उत्पादों और सेवाओं को चिह्नित करना और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिये एक प्रणाली की स्थापना करना है। इसका उद्देश्य विदेशी निर्यात बाज़ारों तक पहुँचने में लघु व्यवसायों, किसानों और MSME की सहायता करना है।
  • निर्दिष्ट कृषि उत्पादों के लिये परिवहन और विपणन सहायता: यह कृषि उत्पादों के निर्यात के लिये माल ढुलाई के नुकसान को कम करने हेतु  केंद्रीय क्षेत्र की एक योजना है।
  • निर्यात हेतु व्यापार अवसंरचना योजना (TIES): इसका उद्देश्य निर्यात अवसंरचना में अंतर को कम करके देश की निर्यात प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि करना है। 
  • मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव्स (MAI) योजना: इस योजना का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों के लिये बाज़ार विकास गतिविधियों का समर्थन करके भारत के निर्यात को बढ़ावा देना है। यह योजना निर्यात प्रोत्साहन गतिविधियों हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • APEDA की निर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ:  APEDA ने कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये वित्तीय सहायता, बाज़ार पहुँच आदि जैसी कई योजनाएँ शुरू की हैं।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. भारत में निम्नलिखित में से किसे कृषि में सार्वजनिक निवेश माना जा सकता है? (2020)

  1. सभी फसलों की कृषि उपज के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करना
  2. प्राथमिक कृषि साख समितियों का कंप्यूटरीकरण
  3. सामाजिक पूंजी विकास
  4. किसानों को मुफ्त बिजली की आपूर्ति
  5. बैंकिंग प्रणाली द्वारा कृषि ऋण की माफी
  6. सरकारों द्वारा कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की स्थापना

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये: 

(a) केवल 1, 2 और 5 
(b) केवल 1, 3, 4 और 5 
(c) केवल 2, 3 और 6 
(d) 1, 2, 3, 4, 5 और 6 

उत्तर: c 


प्रश्न. 'राष्ट्रीय कृषि बाज़ार' योजना को लागू करने के क्या लाभ/फायदे हैं? (2017)

  1. यह कृषि वस्तुओं के लिये एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है।
  2. यह किसानों को उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुरूप कीमतों के साथ राष्ट्रव्यापी बाज़ार तक पहुँच प्रदान करती है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: c 


मेन्स:  

प्रश्न. भारत में कृषि उत्पादों के परिवहन और विपणन में मुख्य बाधाएँ क्या हैं? (2020) 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस