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संसद टीवी संवाद

भारतीय अर्थव्यवस्था

पर्सपेक्टिव: भारत के विद्युत क्षेत्र में ट्रांसमिशन की भूमिका

  • 04 Apr 2025
  • 14 min read

प्रिलिम्स के लिये:

नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य, विद्युत संयंत्र, भारत की आर्थिक संवृद्धि, कोयला, गैस, परमाणुएक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति" प्रणाली, कंपनी अधिनियम, 1956, भूमि अधिग्रहण, विद्युत ऊर्जा संघ (EPA), टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्द्धी बोली (TBCB)

मेन्स के लिये:

भारत के विद्युत क्षेत्र से संबंधित ट्रांसमिशन चुनौतियाँ एवं दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने के उपाय।

चर्चा में क्यों?

भारत विश्व के सबसे बड़े सिंक्रोनाइज्ड विद्युत ग्रिडों वाले देशों में से एक है, जिसकी ट्रांसमिशन लाइनें 4 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक विस्तारित हैं। 

  • जैसे-जैसे देश वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, विद्युत पारेषण नेटवर्क का आधुनिकीकरण एवं विस्तार एक प्राथमिकता बनी हुई है। 
  • एकीकृत स्मार्ट ग्रिड में परिवर्तन से दक्षता तथा विश्वसनीयता बढ़ने के साथ राष्ट्रीय ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को समर्थन मिलेगा।

विद्युत ट्रांसमिशन के मूल सिद्धांत क्या हैं? 

  • परिचय: 
    • विद्युत आपूर्ति प्रणाली में तीन मुख्य घटक होते हैं: उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण। 
    • विद्युत संयंत्रों और छोटे नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों में विद्युत का उत्पादन होता है। इसके बाद सुनिश्चित किया जाता है कि घरों, उद्योगों एवं व्यवसायों को विद्युत की आपूर्ति कुशलतापूर्वक हो।
    • भारत की आर्थिक संवृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में ट्रांसमिशन की प्रमुख भूमिका है। 
    • उन्नत ट्रांसमिशन नेटवर्क से ऊर्जा की बर्बादी तथा लागत में कमी आने के साथ ग्रिड की समग्र स्थिरता में सुधार होता है।   

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  • भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य 
    • भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। हालाँकि, इस क्षमता को राष्ट्रीय ग्रिड में एकीकृत करने के लिये अत्यधिक कुशल ट्रांसमिशन नेटवर्क की आवश्यकता है। 
    • उत्पादन केंद्रों से उपभोग केंद्रों तक विद्युत का निर्बाध ट्रांसमिशन सुनिश्चित करने के क्रम में ट्रांसमिशन संबंधी बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण महत्त्वपूर्ण है। 
  • स्मार्ट ग्रिड एवं प्रौद्योगिकी का एकीकरण: 
    • भारत, कार्यकुशलता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिये स्मार्ट ग्रिड को अपना रहा है। 
      • स्मार्ट ग्रिड स्वचालन, संचार और IT प्रणालियों वाला एक विद्युत ग्रिड है, जिसके द्वारा उत्पादन से उपभोग तक विद्युत ट्रांसमिशन की निगरानी हो सकती है और वास्तविक समय में उत्पादन के अनुरूप विद्युत प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है या लोड को कम किया जा सकता है। 
    • उन्नत प्रौद्योगिकियाँ जैसे 765 केवी एसी ट्रांसमिशन लाइनें और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) लाइनें अधिशेष एवं घाटे वाले क्षेत्रों के बीच निर्बाध विद्युत ट्रांसमिशन को सक्षम कर रही हैं, अकुशलता को कम कर रही हैं और अधिक स्थिर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। 

भारत के पाॅवर ग्रिड का एकीकरण:

  • भारत ने 1960 के दशक में क्षेत्रीय स्तर पर ग्रिड प्रबंधन का कार्यान्वयन शुरू किया।
  • राज्य ग्रिडों को आपस में जोड़कर पाँच क्षेत्रीय ग्रिड बनाए गए, जिससे उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी ग्रिड को कवर किया जाना शामिल है।
  • एकीकरण की प्रक्रिया वर्ष 1991 में शुरू हुई और वर्ष 1989 में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन का गठन हुआ। 
  • जनवरी 2019 में लेह-लद्दाख को ग्रिड में एकीकृत करने के साथ यह कार्य पूरा हुआ, जिसका समापन " एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति" प्रणाली में हुआ। 
  • इस एकीकरण से राज्यों में विद्युत की उपलब्धता और स्थिरता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड): 

  • पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड), भारत सरकार का अनुसूची 'A' का सार्वजनिक क्षेत्र का 'महारत्न' उद्यम है, जिसे कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत 23 अक्टूबर 1989 को निगमित किया गया था। 
  • पावरग्रिड एक सूचीबद्ध कंपनी है, जिसमें 51.34% हिस्सेदारी भारत सरकार की है तथा शेष हिस्सेदारी संस्थागत निवेशकों और लोगों की है।

ट्रांसमिशन क्षेत्र से संबंधित क्या चुनौतियाँ हैं?

  • मार्गाधिकार (RoW) संबंधी मुद्दे: 
    • भूमि अधिग्रहण और मार्गाधिकार अनुमोदन (भूमि के एक विशिष्ट क्षेत्र पर ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण, रखरखाव और संचालन के लिये दिया गया विधिक अधिकार) की प्रक्रिया धीमी बनी हुई है, जिसके कारण ट्रांसमिशन परियोजनाओं में देरी हो रही है।
    • इसके अतिरिक्त, निजी क्षेत्र के भागीदारों को वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के क्रम में स्पष्ट लागत पास-थ्रू तंत्र की आवश्यकता है।
      • लागत पास-थ्रू, जिसे मूल्य संचरण या केवल पास-थ्रू भी कहा जाता है, वह प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यवसाय अपनी इनपुट लागतों में परिवर्तन के लिये अपने आउटपुट मूल्यों को समायोजित करता है। 
  • आपूर्ति शृंखला संबंधी बाधाएँ: 
    • परियोजना बोलियों की बढ़ती संख्या के कारण आवश्यक ट्रांसमिशन उपकरणों की कमी हो गई है। 
    • इसके अलावा, कुछ देशों से उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध के कारण इनकी उपलब्धता सीमित हो गई है, जिससे अतिरिक्त चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं। 
  • बुनियादी ढाँचे संबंधी कमियाँ: 
    • भारत के ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा भाग पुराना हो चुका है और इसे अपग्रेड करने की आवश्यकता है। इससे विद्युत वितरण की समग्र विश्वसनीयता और दक्षता प्रभावित होती है।
    • देश के कई भागों (विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में) में पारेषण नेटवर्क या तो अपर्याप्त हैं या उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण विद्युत की हानि होती है और उपभोक्ताओं तक इसकी पहुँच सीमित होती है।  
  • ट्रांसमिशन में विद्युत की क्षति: 
    • ट्रांसमिशन लाइनों के अंतर्निहित प्रतिरोध के कारण ऊर्जा की बर्बादी होती है।
    • विद्युत चोरी एक अन्य चिंता का विषय है (विशेष रूप से शहरी मलिन बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में), जिससे वित्तीय घाटे और ग्रिड अस्थिरता को बढ़ावा मिलता है।

आगे की राह

  • मार्गाधिकार का समाधान: 
    • भूमि अधिग्रहण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिये सरकार ने मुआवजे की राशि को बाज़ार दर के आधार पर 15% से बढ़ाकर 30% कर दिया है।
    • वर्ष 2024 में प्रस्तुत किये गए संशोधित मुआवज़ा दिशानिर्देशों के तहत टावर बेस क्षेत्र और कॉरिडोर मुआवजे को दोगुना कर दिया गया है।    
  • आपूर्ति शृंखला में सुधार: 
    • उपकरणों की कमी और आयात प्रतिबंधों (जो ट्रांसमिशन परियोजनाओं में बाधाक हैं) से निपटने के प्रयास किये जा रहे हैं। 
      • नवीकरणीय ऊर्जा पहलों को समर्थन देने के क्रम में ट्रांसफार्मरों के निर्माण हेतु आवश्यक CRGO स्टील जैसी महत्त्वपूर्ण सामग्रियों की आपूर्ति शृंखला में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 
  • बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण और उन्नयन: 
    • विश्वसनीयता, दक्षता में सुधार लाने तथा विद्युत हानि को कम करने के लिये उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ पुराने ट्रांसमिशन बुनियादी ढाँचे को उन्नत करने में निवेश करना चाहिये।
    • ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार: समान विद्युत पहुँच सुनिश्चित करने और वितरण चुनौतियों को न्यूनतम करने के लिये (विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में), ट्रांसमिशन नेटवर्क को मज़बूत और विस्तारित करना चाहिये। 
  • निजी क्षेत्र का निवेश और विस्तार योजनाएँ: 
    • अगले 7-8 वर्षों में ट्रांसमिशन क्षेत्र में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश अपेक्षित है। वर्ष 2032 तक ट्रांसमिशन नेटवर्क को 4.9 लाख सर्किट किलोमीटर से बढ़ाकर 6.5 लाख सर्किट किलोमीटर करने की योजना है।
    • निजी ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता (TSP) वर्तमान में अंतर्राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली (ISTS) नेटवर्क के 15% का प्रबंधन करते हैं। यह आँकड़ा आने वाले वर्षों में 50% तक बढ़ने का अनुमान है। 
    • मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्य पहले से ही अपनी ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिये बोली प्रक्रिया लागू कर रहे हैं, जो बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में सक्रिय दृष्टिकोण का परिचायक है। 

निष्कर्ष

भारत का विद्युत पारेषण क्षेत्र, महत्त्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करने के क्रम में एक परिवर्तनकारी विस्तार से गुजर रहा है। प्रतिस्पर्द्धी बोली, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा AI-संचालित समाधान द्वारा पारेषण नेटवर्क को अधिक कुशल, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जा सकता है। नीतिगत चुनौतियों का समाधान करने एवं हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने से भारत धारणीय और मज़बूत विद्युत बुनियादी ढाँचे को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है जिससे इसके आर्थिक विकास के साथ ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा मिलेगा।

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत  वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2015)

  1. यह एक पब्लिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है।
  2.  यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: C


प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा सरकार की एक योजना 'उदय'(UDAY) का उद्देश्य है? (2016)

(a) ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के क्षेत्र में स्टार्टअप उद्यमियों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
(b) वर्ष 2018 तक देश के हर घर में विद्युत पहुँचाना।
(c) कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों को समय के साथ प्राकृतिक गैस, परमाणु, सौर, पवन और ज्वारीय विद्युत संयंत्रों से बदलना।
(d) विद्युत वितरण कंपनियों के बदलाव और पुनरुद्धार के लिये वित्त प्रदान करना।

उत्तर: (d)

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