प्रारंभिक परीक्षा
म्याँमार भूकंप
- 02 Apr 2025
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स्रोत: द हिंदू
म्याँमार के मध्य भाग में 7.7 तीव्रता के साथ एक भीषण भूकंप की घटना हुई, जिससे मुख्य रूप से मंडाले शहर में व्यापक विनाश। यह भूकंपीय घटना हाल के वर्षों में जनित सर्वाधिक भीषण भूकंपों में से एक है।
म्याँमार भूकंप का कारण क्या था?
- स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग: म्याँमार में भूकंप की घटना सागाइंग फॉल्ट के साथ एक प्रकार के फॉल्टिंग के कारण हुई थी, जिसे "स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग" कहते हैं।
- म्याँमार में 1,500 किलोमीटर में विस्तृत सागाइंग फॉल्ट पश्चिम में भारतीय प्लेट और पूर्व में यूरेशियन प्लेट के बीच टेक्टोनिक प्लेट सीमा को चिह्नित करता है। यह विश्व के सर्वाधिक दीर्घ सर्वाधिक सक्रिय नतिलंब सर्पण भ्रंश (Strike-Slip Faults) में से एक है।
- प्लेटों में पारस्परिक क्रिया: यह भूकंप भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच हुए संचलन के कारण हुआ, जिसमें भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के सापेक्ष उत्तर की ओर बढ़ रही थी।
- इस पारस्परिक क्रिया के कारण भ्रंश रेखा (Fault Line), विशेष रूप से सागाइंग फॉल्ट के अनुदिश प्रतिबल एकत्रित होता है। जब एकत्रित प्रतिबल अचानक से विमुक्त होता है, तो भूकंप की घटना होती है।
नोट: संबद्ध क्षेत्र में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' के रूप में अपनी भूमिका की पुष्टि करते हुए म्याँमार में हुई भूकंप की घटना में सहायता करने हेतु भारत ने मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रदान करने के लिये ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया।
- भारतीय नौसेना के जहाज़ों सतपुड़ा, सावित्री, करमुक (स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट) और लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (LCU) 52 (यह दूसरा LCU Mk-IV वर्ग है) को आवश्यक राहत सामग्री के साथ यांगून, म्याँमार के लिये भेजा गया।
भ्रंश क्या है?
- परिभाषा: भ्रंश भू पर्पटी में शैलों के दो खंडों के बीच एक विभंजन अथवा विभंग क्षेत्र होता है, जिसके कारण खंडों में एक दूसरे की सापेक्ष गति में संचलन होता है।
- भूवैज्ञानिक फॉल्ट को उसके ढाल (सतह के संबंध में फॉल्ट का कोण) और फॉल्ट के साथ गति (स्लिप) की दिशा के आधार पर वर्गीकृत करते हैं।
- यह संचलन विवर्तनिक तनाव (Tectonic Stress) के कारण होती है, जो अकस्मात् हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप भूकंप आ सकता है।
- विवर्तनिक तनाव (Tectonic Stress) भ्रंश रेखाओं के साथ बनता है और जब मुक्त होता है, तो ब्लॉकों को स्थानांतरित करता है, जिससे भूकंपीय गतिविधि उत्पन्न होती है।
फॉल्ट के प्रकार:
- नॉर्मल फॉल्ट: नॉर्मल फॉल्ट एक डिप-स्लिप फॉल्ट है, जहाँ फॉल्ट के ऊपर का ब्लॉक नीचे के ब्लॉक के सापेक्ष नीचे की ओर गति करता है।
- रिवर्स फॉल्ट: रिवर्स (थ्रस्ट) फॉल्ट एक डिप-स्लिप फॉल्ट है, जहाँ ऊपरी ब्लॉक ऊपर की ओर गति करता है और निचले ब्लॉक के ऊपर अभिसरित होता है। इस प्रकार की भ्रंशन संपीड़न क्षेत्रों में होती है, जैसे कि जहाँ एक विवर्तनिक प्लेट दूसरी के नीचे क्षेपित हो जाती है, जैसा कि जापान में होता है।
- स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट: यह तब होता है जब ब्लॉक एक दूसरे के ऊपर क्षैतिज रूप से अधिक्षिप्त होते हैं।
- राइट लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट का अर्थ है दोनों तरफ से देखने पर दूर स्थित ब्लॉक का विस्थापन दाईं ओर होता है (उदाहरण के लिये, सैन एंड्रियास फॉल्ट)।
- लेफ्ट-लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट का अर्थ है दोनों तरफ से देखने पर दूर के ब्लॉक का विस्थापन बाईं ओर है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नप्रिलिम्स:प्रश्न: निम्नलिखित पर विचार कीजिये: (2013)
उपर्युक्त में से कौन पृथ्वी की सतह पर गतिशील परिवर्तन लाने के लिये ज़िम्मेदार हैं? (a) केवल 1, 2, 3 और 4 उत्तर: (d) मेन्स:प्रश्न. भारतीय उप-महाद्वीप में भूकंपों की आवृत्ति बढ़ती हुई प्रतीत होती है। फिर भी, इनके प्रभाव के न्यूनीकरण हेतु भारत की तैयारी (तत्परता) में महत्त्वपूर्ण कमियाँ हैं। विभिन्न पहलुओं की चर्चा कीजिये। (2015) प्रश्न. भूकंप संबंधी संकटों के लिये भारत की भेद्यता की विवेचना कीजिये। पिछले तीन दशकों में, भारत के विभिन्न भागों में भूकंप द्वारा उत्पन्न बड़ी आपदाओं के उदाहरण प्रमुख विशेषताओं के साथ दीजिये। (2021) |