भारतीय राजव्यवस्था
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024
- 04 Apr 2025
- 12 min read
प्रिलिम्स के लिये:वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024, लोकसभा, राज्यसभा, वक्फ अधिनियम,1995, मुतवल्ली, परिसीमन अधिनियम, 1963, समता का अधिकार (अनुच्छेद 14), अनुच्छेद 26। मेन्स के लिये :वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और संबंधित चिंताएँ। |
स्रोत: TOI
चर्चा में क्यों?
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित किया गया।
- यह विधेयक वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करता है, जिससे सरकार को वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने और संबंधित विवादों को निपटाने की अनुमति मिलती है।
- विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्ड की कार्यकुशलता में सुधार लाना, वक्फ से संबंधित परिभाषाओं को अद्यतन करना, पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना तथा रिकॉर्ड प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना है।
वक्फ क्या है?
- वक्फ: यह किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिये किये गए दान को संदर्भित करता है, जैसे मस्जिद, स्कूल, अस्पताल या अन्य सार्वजनिक संस्थानों की स्थापना। वक्फ अविभाज्य होता है, अर्थात इसे बेचा, उपहार में, विरासत में या भारग्रस्त नहीं किया जा सकता।
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वक्फ बोर्ड और वक्फ अधिनियम, 1995 क्या है?
पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक कीजिये: वक्फ बोर्ड और वक्फ अधिनियम, 1995
नोट: कुल 8.72 लाख वक्फ संपत्तियाँ हैं, जिनका क्षेत्रफल 38 लाख एकड़ से अधिक है।
भारत में वक्फ कानून का विकास
विधेयक 2024 के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?
- वक्फ से ट्रस्टों का पृथक्करण: किसी भी विधि के तहत मुस्लिमों द्वारा स्थापित ट्रस्ट अब वक्फ नहीं माने जाएंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि व्यक्तियों का अपने ट्रस्टों पर पूर्ण नियंत्रण बना रहेगा।
- वक्फ समर्पण की पात्रता: केवल वे व्यक्ति, जो कम-से-कम पाँच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहे हैं, अपनी संपत्ति वक्फ के रूप में समर्पित कर सकते हैं।
- वक्फ बोर्ड के पास पहले से पंजीकृत संपत्तियाँ तब तक वैसी ही रहेंगी जब तक कि वे विवादित न हों या सरकारी भूमि के रूप में पहचानी न गई हों।
- पारिवारिक वक्फ में महिलाओं के अधिकार: वक्फ समर्पण से पूर्व महिलाओं को अपनी वैधानिक विरासत प्राप्त करनी चाहिये, जिसमें विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के लिये विशेष प्रावधान शामिल हैं।
- मनमाने संपत्ति दावों की समाप्ति: मूल वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 40 को हटा दिया गया है, जिससे वक्फ बोर्डों को मनमाने ढंग से संपत्तियों को वक्फ घोषित करने से रोका जा सके।
- वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 40 वक्फ बोर्ड को यह अधिकार देती है कि वह निर्धारित कर सके कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं।
- वक्फ न्यायाधिकरण: वक्फ न्यायाधिकरण में तीन सदस्य होते हैं—एक ज़िला न्यायाधीश, संयुक्त सचिव स्तर का राज्य सरकार का अधिकारी, तथा मुस्लिम विधि और न्यायशास्त्र का एक विशेषज्ञ।
- पीड़ित पक्ष वक्फ न्यायाधिकरण के आदेश प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर सीधे संबंधित उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
- सरकारी भूमि और वक्फ विवाद: सरकारी संपत्तियों पर किये गए वक्फ दावों की जाँच कलेक्टर से उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा की जाएगी, ताकि किसी भी अनुचित दावे को रोका जा सके।
- वार्षिक अंशदान में कमी: वक्फ बोर्डों के लिये वक्फ संस्थाओं का अनिवार्य अंशदान 7% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे धर्मार्थ उद्देश्यों के लिये अधिक धनराशि उपलब्ध हो सकेगी।
- वार्षिक लेखा परीक्षा सुधार: एक लाख रुपए से अधिक आय वाली वक्फ संस्थाओं के खातों की लेखा परीक्षा राज्य द्वारा नियुक्त लेखा परीक्षकों से कराना अनिवार्य होगा।
- प्रौद्योगिकी और केंद्रीय पोर्टल: वक्फ संपत्ति प्रबंधन को स्वचालित करने के लिये एक केंद्रीकृत पोर्टल स्थापित किया जाएगा, जिससे दक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा।
- मुतवल्लियों (वक्फ के कार्यवाहक) को वक्फ संपत्ति का विवरण केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
- विविध प्रतिनिधित्व: समावेशिता सुनिश्चित करने के लिये वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल किये जाएंगे, तथा मुस्लिम सदस्यों में कम-से-कम दो महिलाएँ अनिवार्य रूप से होंगी।
- वक्फ बोर्ड में शिया, सुन्नी, बोहरा, अगाखानी और अन्य ओबीसी मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा।
- परिसीमन अधिनियम का अनुप्रयोग: अब वक्फ संपत्ति से संबंधित दावों पर परिसीमन अधिनियम, 1963 लागू होगा, जिससे लंबी मुकदमेबाज़ी कम हो जाएगी।
- परिसीमन अधिनियम शीघ्र निपटान सुनिश्चित करने तथा कानूनी कार्यवाही में अनावश्यक देरी को रोकने के लिये मामलों को दायर करने की समय-सीमा निर्धारित करता है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 की आवश्यकता क्या थी?
- वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयता: "एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ" सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियाँ स्थायी बनी रहें, हालाँकि, इसी कारण अक्सर जटिल विवाद उत्पन्न होते हैं।
- उदाहरण: इस सिद्धांत ने विभिन्न विवादों को जन्म दिया है, जैसे बेट द्वारका में द्वीपों पर स्वामित्व के दावे, जहाँ स्वामित्व निर्धारित करने में अदालतों को गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- खराब प्रबंधन: वक्फ अधिनियम, 1995 वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन और भूमि अतिक्रमण को रोकने में विफल रहा है।
- उदाहरण: कर्नाटक में (वर्ष 1975 से 2020 के बीच), 40 वक्फ संपत्तियों को अधिसूचित किया गया, जिनमें कृषि भूमि, सार्वजनिक स्थल, सरकारी भूमि, कब्रिस्तान, झीलें और मंदिर शामिल हैं।
- न्यायिक निगरानी का अभाव: वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ न्यायाधिकरण के निर्णयों के विरुद्ध अपील की अनुमति नहीं है, जिससे न्यायिक समीक्षा सीमित हो जाती है और पारदर्शिता प्रभावित होती है।
- शक्तियों का दुरुपयोग: वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 40 का उपयोग निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के लिये किया गया है, जिससे कई कानूनी विवाद उत्पन्न हुए हैं।
- उदाहरण: केरल में लगभग 600 ईसाई परिवारों ने विरोध प्रदर्शन किया जब वक्फ बोर्ड ने उनकी पैतृक भूमि पर दावा किया, जिससे कानूनी विवाद उत्पन्न हो गया।
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 से संबंधित क्या चिंताएँ हैं?
- सरकारी नियंत्रण में वृद्धि: आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक सरकार को वक्फ संपत्तियों के विनियमन और उनकी स्थिति निर्धारित करने का अधिकार प्रदान करता है, जिससे वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता सीमित हो जाती है।
- अधिनियम की धारा 40 को हटाने से यह अधिकार सरकारी अधिकारियों को मिल जाएगा कि वे निर्धारित कर सकें कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं।
- मुस्लिम प्रतिनिधित्व में कमी: आलोचकों का तर्क है कि वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम अधिकारियों को शामिल करना अनुच्छेद 26 के तहत समुदाय को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का जो अधिकार प्राप्त है, उसका उल्लंघन करता है।
- "मुस्लिम धर्म का पालन करने वाले मुसलमान" की परिभाषा में अस्पष्टता: विधेयक में वक्फ संपत्ति आवंटन के लिये "मुस्लिम धर्म का पालन करने वाले मुसलमान" की स्पष्ट परिभाषा का अभाव है, जिससे धार्मिक विद्वानों की भिन्न-भिन्न व्याख्याओं के कारण कानूनी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- "उपयोगकर्त्ता द्वारा वक्फ" सिद्धांत का निष्कासन: आलोचकों को आशंका है कि "उपयोगकर्त्ता द्वारा वक्फ" सिद्धांत को हटाने से, जो दीर्घकालिक धार्मिक उपयोग के माध्यम से संपत्तियों को मान्यता देता है, कई मौजूदा साइटों को उनकी वक्फ स्थिति खोने का कारण बन सकता है।
निष्कर्ष:
वर्ष 2024 विधेयक का उद्देश्य विधिक और तकनीकी सुधारों के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना, दुरुपयोग को रोकना और विवाद समाधान को सुव्यवस्थित करना है। हालाँकि, सरकारी नियंत्रण, प्रतिनिधित्व और संपत्ति के अधिकारों संबंधी विषयों का सामुदायिक स्वायत्तता के साथ विनियामक निरीक्षण को संतुलित करने के लिये वार्ता के माध्यम से समाधान किया जाना चाहिये। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के नियम अभी जारी किये जाने हैं और उम्मीद है कि इनसे अस्पष्टता और अन्य चिंताओं का समाधान होगा।
दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न: प्रश्न. वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य वक्फ शासन में किस प्रकार सुधार करना है और इसके प्रावधानों के संबंध में क्या चिंताएँ व्यक्त की गई हैं? |
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नमेन्स:प्रश्न. धर्मनिरपेक्षता से आप क्या समझते हैं? धर्मनिरपेक्षता के भारतीय व पश्चिमी मॉडल का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये। (2018) |