भारतीय अर्थव्यवस्था
भारतीय रेलवे में सुधार
- 05 Apr 2025
- 12 min read
प्रिलिम्स के लिये:नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), कवच, वंदे भारत ट्रेन, हाइड्रोजन ट्रेन, समर्पित माल ढुलाई गलियारे (DFC), अतिरिक्त बजटीय संसाधन (EBR), मिशन रफ्तार, राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष (RRSK)। मेन्स के लिये:भारत के लिये रेलवे का महत्त्व, भारतीय रेलवे से संबंधित मुद्दे और आगे की राह। |
स्रोत: द हिंदू
चर्चा में क्यों?
रेल मंत्रालय पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में भारतीय रेलवे के कामकाज में विभिन्न चिंताओं पर प्रकाश डाला गया है।
भारतीय रेलवे के बारे में मुख्य तथ्य क्या हैं?
- परिचय: भारत में विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है, जिसकी लंबाई 65,000 किलोमीटर से अधिक है।
- वर्ष 2022 में, भारतीय रेलवे ने 8 बिलियन यात्रियों, 1.4 बिलियन टन माल ढुलाई की, और वर्ष 2050 तक वैश्विक रेल गतिविधि में 40% योगदान देने की उम्मीद है।
- बुनियादी ढाँचे पर व्यय: सरकार ने बुनियादी ढाँचे में 1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापक निवेश लक्ष्य (वर्ष 2019-2023) के हिस्से के रूप में वर्ष 2030 तक 750 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।
- रेलवे क्षेत्र में 100% FDI की अनुमति, वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहन।
- नवोन्मेष: भारत की अपनी ट्रेन कोलिज़न अवॉइडेंस सिस्टम, कवच, को 37,000 किलोमीटर रेलवे लाइनों पर तैनात किया जाएगा।
- 15,000 किलोमीटर पटरियों को स्वचालित सिग्नलिंग क्षेत्रों में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे सुरक्षा और दक्षता बढ़ेगी।
- वंदे भारत ट्रेनों में त्वरित गति, स्वचालित दरवाजे, CCTV, जैव-शौचालय, GPS सूचना प्रणाली और ऑनबोर्ड इन्फोटेनमेंट की सुविधा है।
- वित्तीय प्रदर्शन: वर्ष 2023-24 में, भारतीय रेलवे ने यातायात राजस्व में 32.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर अर्जित किया, जो इसकी कुल आय का 99.8% है, जो मज़बूत दक्षता और सार्वजनिक निर्भरता को दर्शाता है।
- भविष्य की योजनाएँ:
- हाई-स्पीड रेल: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन और अन्य सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें।
- सिग्नलिंग एवं दूरसंचार: लगभग 15,000 किमी को स्वचालित सिग्नलिंग तथा 37,000 किमी को कवच के साथ अपग्रेड करने की योजना है।
- डिजिटलीकरण: रेलवे पूर्वानुमानित रखरखाव, परिसंपत्ति प्रबंधन और GPS सूचना प्रणाली पर ज़ोर देता है।
- अंतरमॉडल परिवहन: सुगम रसद के लिये रेल, सड़क और बंदरगाहों का एकीकरण।
- शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य: भारतीय रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन करना है। शुरुआत में, इसकी योजना हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज कार्यक्रम के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की है।
भारतीय रेलवे का महत्त्व क्या है?
- राष्ट्र की जीवन रेखा: भारतीय रेल भारत के परिवहन का आधार है, जो किफायती, विश्वसनीय यात्रा उपलब्ध कराती है तथा राष्ट्रव्यापी आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देती है।
- औद्योगिक विस्तार: यह कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और कृषि उत्पादों जैसी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को सक्षम बनाता है, जिससे निर्बाध औद्योगिक परिचालन सुनिश्चित होता है।
- समर्पित माल ढुलाई गलियारे (DFC) से लॉजिस्टिक्स लागत कम हो जाती है, जिससे भारतीय विनिर्माण वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्द्धी बन जाता है।
- रोज़गार: 1.2 मिलियन से अधिक कर्मचारियों के साथ, यह विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा नियोक्ता है।
- क्षेत्रीय विकास: रेलवे ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी बाज़ारों से जोड़ने, अविकसित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और नौकरियों तक पहुँच में सुधार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- हरित परिवहन: ऊर्जा-कुशल इंजनों, हरित जैव-शौचालय और विद्युतीकृत मार्गों का उपयोग पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में रणनीतिक रेल संपर्क राष्ट्रीय सुरक्षा और तीव्र गतिशीलता को बढ़ावा देते हैं।
भारतीय रेलवे से जुड़ी चिंताएँ क्या हैं?
- उच्च परिचालन अनुपात: सत्र 2024-2025 के लिये परिचालन अनुपात (ओआर) 98.2 रुपए अनुमानित है, जो 2023-2024 में 98.7 रुपए से थोड़ा बेहतर है, लेकिन वर्ष 2016 में 97.8 रुपये से निम्न है।
- उच्च OR (100 रुपए कमाने के लिये व्यय की गई राशि) के कारण पूंजीगत व्यय के लिये कम संसाधन बचते हैं और रेलवे को बजटीय सहायता एवं अतिरिक्त बजटीय संसाधनों (EBR) पर अधिक निर्भर बनाता है।
- धीमा बुनियादी ढाँचा विकास: DFC (वर्ष 2005 में प्रस्तावित) में से केवल पूर्वी DFC ही पूरी तरह से चालू है और पश्चिमी DFC पूरा होने के करीब है।
- पूर्वी तट, पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण उप-गलियारा DFC अभी योजना चरण में हैं।
- भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं के कारण मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना वर्ष 2023 से 2028 तक विलंबित हो गई है।
- अपर्याप्त सुरक्षा प्रौद्योगिकियाँ: हालाँकि कवच स्वचालित ब्रेकिंग और अलर्ट के माध्यम से टकरावों को रोक सकता है, लेकिन इसका सीमित रोलआउट इसके समग्र प्रभाव को कम कर देता है।
- फरवरी 2024 तक, इसे केवल 1,465 मार्ग किमी. पर स्थापित किया गया था, जो कुल रेलवे नेटवर्क का केवल 2% है।
- धीमी यात्रा: मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें अभी भी मात्र 50-51 किमी. प्रति घंटे की औसत गति से चल रही हैं, जो मिशन रफ्तार के तहत निर्धारित लक्ष्यों से कम है।
- मिशन रफ़्तार (सत्र 2016-17 बजट) का लक्ष्य 5 वर्षों के भीतर मालगाड़ियों की गति को दोगुना करना और यात्री ट्रेनों की गति को 25 किमी प्रति घंटा बढ़ाना है।
रेलवे में सुधार के लिये विभिन्न समितियों ने क्या सिफारिशें की हैं?
- राकेश मोहन समिति (वर्ष 2010): हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर सहित लंबी दूरी और अंतर-शहर परिवहन के विकास पर ज़ोर दिया गया।
- राष्ट्रीय परिवहन अवसंरचना वित्त का गठन, गतिशीलता, संधारणीयता और समावेशन लक्ष्यों के संबंध में तटस्थता सुनिश्चित करना।
- काकोदकर समिति (वर्ष 2012): एक वैधानिक रेलवे सुरक्षा प्राधिकरण के गठन का आह्वान किया गया।
- सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं के लिये 5 वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपए का गैर-समाप्ति योग्य राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष (RRSK) प्रस्तावित किया गया।
- बिबेक देबरॉय समिति (वर्ष 2014): सरकार को प्रतिस्पर्द्धा, दक्षता और मितव्ययिता को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर सूचित निर्णय लेने में मदद करने के लिये एक सलाहकार निकाय के रूप में रेलवे अवसंरचना प्राधिकरण के निर्माण की सिफारिश की गई।
- भारतीय रेलवे पर कार्यकुशलता बढ़ाने और परिचालन भार कम करने के लिये गैर-प्रमुख गतिविधियों (जैसे: स्कूल, अस्पताल) को आउटसोर्स करने का सुझाव दिया गया।
आगे की राह
- माल ढुलाई पोर्टफोलियो का विस्तार: उच्च मूल्य और संवेदनशील वस्तुओं जैसे फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और शीघ्र खराब होने वाले सामान के लिये विशेष माल ढुलाई समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये।
- हाई-स्पीड रेलवे: 160-200 किमी/घंटा की गति के लिये रेलवे के बुनियादी अवसंरचना को उन्नत करने से यात्रा के समय में काफी कमी आ सकती है, जिससे प्रमुख अंतर-शहरी मार्गों पर रेल, हवाई यात्रा का एक सुदृढ़ विकल्प बन सकता है।
- मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स अवसंरचना: एकीकृत मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये, जिसमें उच्च दक्षता के लिये स्वचालन, स्मार्ट इन्वेंट्री सिस्टम और सुचारू इंटरमॉडल स्थानान्तरण की सुविधा हो।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: भारतीय रेलवे को रोलिंग स्टॉक, खानपान और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिये।
- व्यस्त मार्गों पर प्रतिस्पर्द्धी बोली से कार्यकुशलता बढ़ सकती है और सरकार का बोझ कम हो सकता है।
दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. रेलवे समावेशी आर्थिक विकास और क्षेत्रीय विकास के लिये एक इंजन के रूप में कार्य करता है। चर्चा कीजिये। |
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)मेन्स प्रश्न 1. किरायों का विनियमन करने के लिये रेल प्रशुल्क प्राधिकरण की स्थापना आमदनी-बंधे (कैश स्ट्रैप्ड) भारतीय रेलवे को गैर-लाभकारी मार्गों और सेवाओं को चलाने के दायित्व के लिये सहायिकी (सब्सिडी) मांगने पर मज़बूर कर देगी। विद्युत क्षेत्र के अनुभव को सामने रखते हुए, चर्चा कीजिये कि क्या प्रस्तावित सुधार से उपभोक्ताओं, भारतीय रेलवे या कि निजी कंटेनर प्रचालकों को लाभ होने की आशा है? (2014) |