भारतीय इतिहास
गांधी जयंती
- 04 Oct 2021
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प्रिलिम्स के लिये:महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, गांधी शांति पुरस्कार, प्रवासी भारतीय दिवस, रॉलेट एक्ट, पूना समझौता मेन्स के लिये:भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी का योगदान |
चर्चा में क्यों?
2 अक्तूबर, 2021 को महात्मा गांधी की 152वीं जयंती मनाई गई।
- महात्मा गांधी के साथ-साथ इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी श्रद्धांजलि दी गई।
प्रमुख बिंदु
- जन्म: महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्तूबर, 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ था।
- संक्षिप्त परिचय: वे एक प्रसिद्ध वकील, राजनेता, सामाजिक कार्यकर्त्ता और लेखक थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- सत्याग्रह: दक्षिण अफ्रीका (1893-1915) में उन्होंने जन आंदोलन की एक नई पद्धति यानी ‘सत्याग्रह’ की स्थापना की और इसके साथ नस्लवादी शासन का सफलतापूर्वक मुकाबला किया।
- ‘सत्याग्रह’ के विचार के तहत ‘सत्य की शक्ति’ और ‘अहिंसा के साथ सत्य की खोज’ की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- विश्व भर में गांधी जयंती के अवसर पर 02 अक्तूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ का आयोजन किया जाता है।
- अहिंसा और अन्य गांधीवादी तरीकों के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन लाने के लिये प्रतिवर्ष ‘गांधी शांति पुरस्कार’ प्रदान किया जाता है।
- भारत वापसी: वे 9 जनवरी, 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।
- भारत के विकास में प्रवासी भारतीय समुदाय के योगदान को चिह्नित करने हेतु प्रतिवर्ष 09 जनवरी को ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ का आयोजन किया जाता है।
- भारत में सत्याग्रह आंदोलन: महात्मा गांधी का मानना था कि अहिंसा का धर्म सभी भारतीयों को एकजुट कर सकता है।
- वर्ष 1917 में उन्होंने किसानों को नील की खेती की दमनकारी प्रणाली के खिलाफ संघर्ष करने के लिये प्रेरित करने हेतु बिहार के चंपारण की यात्रा की थी।
- वर्ष 1917 में उन्होंने गुजरात के खेड़ा ज़िले के किसानों का समर्थन करने हेतु एक सत्याग्रह का आयोजन किया। फसल खराब होने और प्लेग की महामारी से प्रभावित खेड़ा के किसान राजस्व का भुगतान नहीं कर सके और राजस्व वसूली में कुछ छूट देने की मांग कर रहे थे।
- वर्ष 1918 में कपास मिल श्रमिकों के बीच सत्याग्रह आंदोलन हेतु वे अहमदाबाद गए।
- वर्ष 1919 में उन्होंने ‘प्रस्तावित रॉलेट एक्ट’ (1919) के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह शुरू करने का फैसला किया।
- इस अधिनियम के तहत सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को दबाने के लिये उच्च शक्तियाँ और दो वर्ष तक बिना किसी मुकदमे के राजनीतिक कैदियों को हिरासत में रखने की अनुमति दी गई थी।
- 13 अप्रैल, 1919 को कुख्यात जलियांवाला बाग की घटना हुई। हिंसा को फैलते देख महात्मा गांधी ने आंदोलन (18 अप्रैल, 1919) को बंद कर दिया।
- असहयोग आंदोलन (1920-22): सितंबर 1920 में काॅन्ग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में उन्होंने अन्य नेताओं को खिलाफत और स्वराज के समर्थन में एक असहयोग आंदोलन शुरू करने की आवश्यकता के बारे में आश्वस्त किया।
- दिसंबर 1920 में नागपुर में काॅन्ग्रेस के अधिवेशन में असहयोग कार्यक्रम को अंगीकार किया गया।
- फरवरी 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला किया।
- नमक मार्च: वर्ष 1930 में गांधीजी ने घोषणा की कि वे नमक कानून को तोड़ने के लिये एक मार्च का नेतृत्व करेंगे।
- उन्होंने साबरमती आश्रम से गुजरात के तटीय शहर दांडी तक मार्च किया, जहाँ उन्होंने समुद्र के किनारे पाए जाने वाले प्राकृतिक नमक को इकट्ठा करके और नमक पैदा करने के लिये समुद्र के पानी को उबालकर सरकारी कानून तोड़ा।
- यह घटना सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत को चिह्नित करती है।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन:
- वर्ष 1931 में गांधीजी ने एक संघर्ष विराम (गांधी-इरविन संधि) को स्वीकार कर लिया और सविनय अवज्ञा को समाप्त कर दिया तथा भारतीय राष्ट्रीय काॅन्ग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में लंदन में दूसरे ‘गोलमेज सम्मेलन’ में हिस्सा लेने के लिये सहमत हो गए।
- लंदन से लौटने के बाद महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को फिर से शुरू कर दिया। एक वर्ष से अधिक समय तक यह आंदोलन जारी रहा, किंतु वर्ष 1934 तक इसने अपनी शक्ति खो दी।
- भारत छोड़ो आंदोलन:
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के प्रकोप के साथ भारत में राष्ट्रवादी संघर्ष अपने अंतिम महत्त्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गया।
- ‘क्रिप्स’ मिशन (मार्च 1942) की विफलता, भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित करने संबंधी ब्रिटिश अनिच्छा और उच्च ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा हिंदू एवं मुसलमानों के बीच कलह को बढ़ावा देने वाली रूढ़िवादी एवं सांप्रदायिक ताकतों को दिये गए प्रोत्साहन ने गांधीजी को वर्ष 1942 में तत्काल ब्रिटिश वापसी की मांग करने के लिये प्रोत्साहित किया, जिसे बाद में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के रूप में जाना गया।
- सामाजिक कार्य:
- उन्होंने तथाकथित अछूतों के उत्थान के लिये भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया और अछूतों को एक नया नाम दिया- 'हरिजन', जिसका अर्थ है ‘ईश्वर की संतान’।
- सितंबर 1932 में ‘बी.आर. अंबेडकर’ ने महात्मा गांधी के साथ ‘पूना समझौते’ पर बातचीत की।
- आत्मनिर्भरता का उनका प्रतीक- चरखा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक लोकप्रिय चिह्न बन गया।
- उन्होंने लोगों को शांत करने और हिंदू-मुस्लिम दंगों को रोकने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि देश के विभाजन से पहले तथा उसके दौरान दोनों समुदायों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।
- वर्ष 1942 में उन्होंने महाराष्ट्र के वर्द्धा में ‘हिंदुस्तानी प्रचार सभा’ की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य हिंदी और उर्दू के बीच एक संपर्क भाषा हिंदुस्तानी को बढ़ावा देना था।
- उन्होंने तथाकथित अछूतों के उत्थान के लिये भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया और अछूतों को एक नया नाम दिया- 'हरिजन', जिसका अर्थ है ‘ईश्वर की संतान’।
- पुस्तकें: हिंद स्वराज, सत्य के साथ मेरे प्रयोग (आत्मकथा)।
- मृत्यु: 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
- 30 जनवरी को देश भर में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस