अधिकतम अंक प्राप्त करने के क्रम में UPPCS मुख्य परीक्षा के उत्तरों को किस प्रकार लिखें?
- 03 Apr, 2025

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) परीक्षा का मुख्य चरण निर्णायक है क्योंकि इस चरण में न केवल आपके ज्ञान का मूल्यांकन होता है बल्कि यह भी मूल्यांकन किया जाता है कि आप अपने उत्तरों को कितने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्द्धा के आलोक में आपका उत्तर-लेखन कौशल, सफलता और असफलता के बीच निर्णायक कारक हो सकता है।
इस ब्लॉग में हम उच्च स्कोरिंग वाले उत्तर लिखने के क्रम में उचित रणनीतियों को व्यापक रूप से कवर करेंगे, जिसमें मॉडल उत्तर के साथ ऐसी गलतियों पर प्रकाश डाला जाना शामिल है जिनसे बचा जा सकता है।
UPPCS मुख्य परीक्षा में उत्तर लेखन की कला
उत्तर लिखने की कला इस बात में निहित है कि आप किस तरह से उसको संरचित करते हैं, प्रस्तुत करते हैं और प्रश्न की मांग के अनुरूप प्रासंगिक बनाने की कोशिश करते हैं। UPPCS मुख्य परीक्षा में असली चुनौती अपने ज्ञान को बेहतर रूप से संरचित करने तथा उच्च-प्रभावी उत्तरों में बदलने में निहित है। मेन्स परीक्षा एक ऐसा चरण है जिसमें प्रस्तुतीकरण का तरीका ही आपको अलग बनाता है।
यह इस बात पर निर्भर नहीं होता कि आप कितना जानते हैं बल्कि यह इस बात पर निर्भर होता है कि आप उसे कितने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रासंगिकता से कोई समझौता नहीं होना चाहिये
- परीक्षक प्रतिदिन सैकड़ों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते हैं। यदि आपका उत्तर प्रश्न की मूल मांग से अलग है तो आपको उसका लाभ नहीं मिल पाएगा। उत्तर की प्रासंगिकता का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है।
- उदाहरण: यदि किसी प्रश्न में "वर्ष 1857 के विद्रोह के कारणों" के बारे में पूछा गया है तो आपके उत्तर में उसके राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारणों को वर्गीकृत किया जाना चाहिए तथा ऐसा नहीं की रानी लक्ष्मीबाई की विस्तृत जीवनी के बारे में लिखा जाए।
प्रस्तुतीकरण एक गेम चेंजर है
- बेहतर प्रस्तुतीकरण न होने से मूल्यांकनकर्त्ताओं की प्रतिक्रिया नकारात्मक रहती है। आपके विचार बेहतर प्रस्तुतीकरण के साथ प्रदर्शित होने चाहिए- उत्तर परिचय से शुरू होकर, उसके बाद संदर्भ, मुख्य भाग एवं स्पष्ट निष्कर्ष के रूप में विभाजित होना चाहिये।
- एक आकर्षक उत्तर पुस्तिका परीक्षक को प्रभावित कर सकती है। स्पष्ट रेखांकित शीर्षक, बुलेट पॉइंट तथा आरेख मूल्यांकन को आसान बनाते हैं।
तथ्य आधार हैं
- अस्पष्ट कथन (जो डेटा और तथ्यों पर आधारित नहीं होते हैं) आपके उत्तर के प्रभाव को कमज़ोर कर सकते हैं। परीक्षक, सटीकता और विशिष्टता की सराहना करते हैं। प्रासंगिक डेटा, सरकारी रिपोर्ट और वास्तविक जीवन के उदाहरणों को शामिल करने से आपके तर्क मज़बूत होते हैं।
- उदाहरण के लिये:
- कमज़ोर कथन: “यूपी में बहुत किसान हैं।”
- मज़बूत कथन: "15.9 मिलियन परिचालन जोतों (कृषि जनगणना 2015-16) के साथ, उत्तर प्रदेश में भारत के कृषि कार्यबल का 18% हिस्सा है।"
अंतर क्या है? दूसरा कथन विश्वसनीयता एवं स्पष्टता को दर्शाता है, जिससे यह अधिक स्कोरिंग बन जाता है।
UPPCS मुख्य परीक्षा में सफलता का ब्लूप्रिंट
परिचय: उत्तर के प्रस्तुतीकरण के साथ प्रासंगिकता का निर्धारण (10–15%)
- आपका परिचय पूरे उत्तर के लिये आधार होता है। "गांधी एक महान नेता थे" जैसे सामान्य कथनों से बचना चाहिये। इसके बजाय, संदर्भ-संचालित एवं थीसिस-आधारित दृष्टिकोण का उपयोग करके प्रत्यक्ष रूप से प्रश्न के अनुसार कथन संरचना पर ध्यान देना चाहिये।
- उदाहरण: “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी की भूमिका।”
- अप्रभावी परिचय: “गाँधी जी एक महान नेता थे जिन्होंने स्वतंत्रता के लिये संघर्ष किया।” (बहुत अस्पष्ट)
- प्रभावी परिचय: “महात्मा गांधी के सत्याग्रह सिद्धांत (वर्ष 1920-1940) से भारत का स्वतंत्रता संग्राम एक अखिल भारतीय जन आंदोलन में परिवर्तित हुआ जिससे किसान, कुलीन और महिलाएँ अहिंसक प्रतिरोध हेतु एकजुट हुए।”
- प्रो टिप: उत्तर की शुरुआत किसी तथ्य, उद्धरण या परिभाषा से कीजिये। उदाहरण: "असहयोग आंदोलन अन्याय के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन था जिसे "महात्मा गांधी ने वर्ष 1920 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत के पहले राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन के रूप में शुरू किया।
मुख्य भाग: स्पष्टता और गहराई के साथ विषय-वस्तु को प्रस्तुत करना (70–80%)
- उत्तर का मुख्य भाग आपके उत्तर का विश्लेषणात्मक केंद्र बनता है यह वह भाग है जहाँ आपकी जानकारी, अभिव्यक्ति और विषय पर समझ का सबसे गहन मूल्यांकन किया जाता है।
A. विश्लेषणात्मक प्रश्न (जैसे, “उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार का मूल्यांकन कीजिये”)
- PESTEL फ्रेमवर्क अपनाना चाहिये (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, पर्यावरणीय और विधिक पहलू):
- राजनीतिक: जमींदारी प्रभुत्व में कमी।
- आर्थिक: कृषि उत्पादकता में वृद्धि।
- सामाजिक: ग्रामीण असमानता में कमी।
- तकनीकी: आधुनिक तरीकों की कमी के कारण सीमित प्रभाव।
- पर्यावरण: हरित क्रांति के बाद उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग।
- विधिक: भूमि सुधार अधिनियमों के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ।
प्रो टिप: यूपी सरकार की रिपोर्ट से संबंधित आधिकारिक डेटा का उपयोग करना चाहिये। उदाहरण: "यूपी के भूमि सीलिंग अधिनियम (1960) के तहत 8.2 लाख हेक्टेयर भूमि का पुनर्वितरण किया गया, जिससे 12 लाख SC/ST परिवारों को लाभ हुआ (यूपी राजस्व विभाग, 2020)।"
B. वर्णनात्मक प्रश्न (जैसे, “1857 के विद्रोह के कारणों की व्याख्या कीजिये”)
इसमें TEC फ्रेमवर्क को अपनाना चाहिये (विषयगत, उदाहरण, परिणाम):
- राजनीतिक कारक: विलय की नीतियाँ (व्यपगत का सिद्धांत → सतारा, झाँसी)।
- आर्थिक शोषण: उच्च भूमि राजस्व (रैयतवाड़ी क्षेत्रों में 50% कर)
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सामाजिक-धार्मिक शिकायतें: इसाई धर्म में परिवर्तन का भय (सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम, 1856)।
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प्रो टिप: अतिरिक्त अंक अर्जित करने के लिये विद्रोह केंद्रों (दिल्ली, लखनऊ, कानपुर) का मानचित्र बनाना चाहिये
C. समसामयिक प्रश्न (जैसे, “उत्तर प्रदेश में शहरीकरण की चुनौतियाँ”)
- दृष्टिकोण: मुद्दों को प्रासंगिक योजनाओं, केस अध्ययनों और सतत् विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ना चाहिये।
- मुद्दा: जल की कमी → जल जीवन मिशन (लक्ष्य: वर्ष 2024 तक शहरी उत्तर प्रदेश में 100% पाइपलाइन से जल उपलब्ध कराना)।
- केस स्टडी: कानपुर का गंभीर वायु प्रदूषण (सर्दियों में AQI 400+) बनाम वाराणसी की स्मार्ट सिटी प्रगति।
- वैश्विक संपर्क: SDG 11 - धारणीय शहर और समुदाय।
- प्रो टिप्स: उत्तर को बेहतर रूप से प्रस्तुत करने के लिये फ्लोचार्ट का उपयोग करना चाहिये।
- उदाहरण: तीव्र शहरीकरण → अपशिष्ट संकट → स्वच्छ भारत मिशन → विकेंद्रीकृत कम्पोस्टिंग।
- अपने उत्तर में निरंतरता बनाए रखने के लिये निष्कर्ष में तार्किक संयोजकों का प्रयोग करना चाहिये।
निष्कर्ष: (उत्तर का 10-15%)
- निष्कर्ष में समालोचनात्मक दृष्टिकोण प्रतिबिंबित होना चाहिए, न कि केवल उत्तर का सारांश।
- प्रभावी निष्कर्ष शैलियाँ:
- SWOT विश्लेषण: "गांधी के तरीकों से जन भागीदारी सुनिश्चित हुई (मज़बूती) लेकिन ब्रिटिश नैतिकता पर उनकी निर्भरता से उग्र संघर्ष में देरी (कमज़ोरी) हुई। फिर भी, वे वैश्विक अहिंसक आंदोलनों के लिये एक खाका बने हुए हैं (अवसर)।"
- भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण: "शहरीकरण से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने के क्रम में यूपी को अपने 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण के साथ किफायती आवास (मुख्यमंत्री आवास योजना) और हरित बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता देनी चाहिए।"
प्रो टिप: प्रभावी उद्धरण के साथ उत्तर को समाप्त करना चाहिये। निष्कर्ष का संकेत देने के लिये "निष्कर्षतः" या " स्थायी प्रगति सुनिश्चित करने के क्रम में..." जैसे वाक्यांशों का उपयोग करना चाहिये।
UPPCS मुख्य परीक्षा के उत्तर के लिये आवश्यक जानकारी
शब्द सीमा: मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता पर ध्यान
UPPCS मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पेपर में 20 प्रश्न होते हैं जो 2 खंडों में विभाजित होते हैं तथा जिन्हें 3 घंटे की समयावधि में पूरा करना होता है।
- खंड A: 10 लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक 8 अंक, शब्द सीमा 125 अंक), प्रत्येक प्रश्न के लिये लगभग 6-8 मिनट का समय लगता है।
- खंड B: 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक 12 अंक, शब्द सीमा 200 अंक), प्रत्येक प्रश्न के लिये लगभग 9-11 मिनट का समय लगता है।
- शब्द सीमा का पूरी तरह से पालन करना चाहिये। ओवरराइटिंग से समय की बर्बादी होती है और परीक्षक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जबकि अंडरराइटिंग, अधूरे ज्ञान का संकेतक है।
शीर्षक और उपशीर्षक: आपके उत्तर का रोडमैप
- शीर्षक, नीरसता को तोड़ते हैं जिससे परीक्षकों को मुख्य बिंदुओं को शीघ्रता से ढूँढने में मदद मिलती है।
क्या करना चाहिये:
- शीर्षकों को बोल्ड या रेखांकित करना चाहिये (जैसे, 1857 के विद्रोह के आर्थिक कारण)।
- पदानुक्रम का पालन करना चाहिये:
- मुख्य शीर्षक (जैसे, सामाजिक प्रभाव)
- उपशीर्षक (जैसे, जाति-आधारित भेदभाव)
- शीर्षक संक्षिप्त होना चाहिये (3-5 शब्द)।
क्या नहीं करना चाहिये:
- सजावटी फॉन्ट या अत्यधिक हाइलाइटिंग से बचें।
- शीर्षक कभी भी लाल/हरे रंग से न लिखें (नीले/काले रंग का ही प्रयोग करें)।
- उदाहरण प्रश्न: “भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभावों की चर्चा कीजिये।”
- शीर्षक:
- सकारात्मक प्रभाव
- वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच
- प्रौद्योगिकी का प्रसार
- नकारात्मक प्रभाव
- किसानों का ऋण संकट
- जलवायु संबंधी चुनौतियाँ
- सकारात्मक प्रभाव
आरेख/डायग्राम:
- यदि दृश्य सामग्री का उपयोग समझदारी से किया जाए तो इससे 10-15% अतिरिक्त अंक प्राप्त किये जा सकते हैं ।
आरेखों का उपयोग कब करना चाहिये:
- भूगोल: मानचित्र (जैसे, उत्तर प्रदेश की नदी प्रणालियाँ), जलवायु ग्राफ।
- विज्ञान और तकनीक: फ्लोचार्ट (जैसे, ब्लॉकचेन वर्कफ्लो), आरेख (जैसे, सौर पैनल तंत्र)।
- अर्थशास्त्र: पाई चार्ट (जैसे, उत्तर प्रदेश की GDP संरचना), बार ग्राफ (जैसे, साक्षरता दर की प्रवृत्ति)।
- प्रो टिप्स: आरेखों को स्पष्ट और लेबलयुक्त रखना चाहिये (उदाहरण के लिये, “आरेख: उत्तर प्रदेश की प्रमुख फसलें”)।
- स्याही के धब्बे से बचने के लिये मानचित्रों/ग्राफों के लिये पेंसिल का उपयोग करना चाहिये।
- 12 अंकों वाले उत्तरों में 1-2 प्रासंगिक आरेख शामिल करने चाहिये।
UPPCS मुख्य परीक्षा के लिये दैनिक उत्तर लेखन अभ्यास
- UPPCS मुख्य परीक्षा में सफलता पाना केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप क्या पढ़ते हैं बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार अभ्यास करते हैं। यहाँ आपके उत्तर लेखन को औसत से असाधारण में बदलने के लिये एक समुचित योजना दी गई है।
दैनिक अभ्यास: निरंतरता से कौशल में निखार आता है
- स्थिरता बनाए रखने, अभिव्यक्ति में सुधार लाने तथा मुख्य परीक्षा में प्रदर्शन बेहतर करने के लिये प्रतिदिन 2-3 उत्तर (सामान्य अध्ययन, निबंध, वैकल्पिक) लिखने चाहिए।
इसे किस प्रकार करना चाहिये:
- PYQ पर ध्यान देना चाहिये: UPPCS मुख्य परीक्षा के विगत प्रश्नपत्रों (2015-2023) से उत्तर की शुरुआत करनी चाहिये।
- विषयगत क्लस्टर: समान विषयों को समूहबद्ध करना चाहिये (उदाहरण के लिये, यूपी में कृषि या नैतिकता संबंधी केस स्टडीज़)।
- समयबद्ध उत्तर लेखन: स्टॉपवॉच का उपयोग करना चाहिये (उदाहरण के लिये, 12 अंक वाले प्रश्न के लिये 12 मिनट)।
- अपनी प्रगति का आकलन: कमज़ोर क्षेत्रों की पहचान करने के लिये एक ट्रैकर बनाए रखना चाहिये, जैसे कि नीचे दिया गया है:
सप्ताह |
कवर किये गए विषय |
प्रति उत्तर औसत समय |
सामान्य गलतियाँ |
1. |
कृषि, नैतिकता |
10 मिनट (12 अंक) |
अतिलेखन, अप्रभावी निष्कर्ष |
2. |
शासन, अर्थव्यवस्था |
7 मिनट (8 अंक) |
उदाहरणों का अभाव, अप्रभावी परिचय |
सहकर्मी समीक्षा: अपने कमज़ोर पहलुओं का पता लगाना
सहकर्मी समीक्षा से गलतियों की पहचान करने और उत्तर लेखन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। एक अध्ययन समूह (ऑनलाइन/ऑफ़लाइन) में शामिल होना तथा स्पष्टता, संरचना और सटीकता पर आधारित प्रतिक्रिया के साथ साप्ताहिक रूप से कम से कम दो उत्तरों का आदान-प्रदान करना, लेखन कौशल को निखार सकता है। प्रत्येक मानदंड के लिये एक सरल रेटिंग (1-5) का उपयोग करने से सुधार सुनिश्चित हो सकता है। परस्पर विरोधी प्रतिक्रिया पर बहस करने से विश्लेषणात्मक कौशल में और भी निखार आता है।
इसके अतिरिक्त, दृष्टि आईएएस की दैनिक मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन पहल के तहत UPPCS/UPSC पर आधारित मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का अध्ययन होता है, जिससे छात्रों को अपने उत्तरों की तुलना और मूल्यांकन करने का प्रभावी अवसर मिलता है।
समय प्रबंधन:
मुख्य परीक्षा के उत्तर लिखने के लिये प्रभावी समय प्रबंधन आवश्यक है। प्रश्नों के प्रकार के आधार पर समय का सही तरीके से आवंटन करना चाहिये: 8 अंकों वाले लघु उत्तरों के लिये 7-8 मिनट और 12 अंकों वाले दीर्घ उत्तरों के लिये 10-12 मिनट।
समय बचाने के लिये, सामान्य विषयों के लिये परिचय और निष्कर्ष टेम्पलेट को पहले से तैयार कर लेना चाहिये। संक्षिप्त कथनों का उपयोग (जैसे, ब्रिटिश राज के लिये BR, नई आर्थिक नीति के लिये NEP) करने के साथ प्रत्यक्ष रूप से पूछे गए प्रश्नों के लिये बुलेट पॉइंट का उपयोग करना चाहिये। नियमित समयबद्ध अभ्यास से गति और सटीकता सुनिश्चित होती है, जिससे आपको पेपर को कुशलतापूर्वक पूरा करने में मदद मिलती है।
मॉडल उत्तरों को रिवाइज़ करना: सर्वश्रेष्ठ से सीखना
टॉपर्स की कॉपियों का अध्ययन करने से उत्तर संरचना, कीवर्ड उपयोग और आरेख का विश्लेषण करके उत्तर लेखन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इससे पता चलता है कि शीर्षक, डेटा और उदाहरण को किस प्रकार एकीकृत किया गया है एवं जनसांख्यिकीय लाभांश या सहकारी संघवाद जैसे शब्दों के उपयोग पर ध्यान देना चाहिये।
उच्च स्कोरिंग रणनीतियों को समझने के लिये दृष्टि IAS के UPPCS-विशिष्ट मॉडल उत्तरों का उपयोग करना चाहिये। इसकी एक प्रभावी तकनीक यह है कि टॉपर के उत्तर को अपने शब्दों में फिर से लिखना- इससे दृष्टिकोण को प्रभावी बनाने के साथ अवधारण एवं अभिव्यक्ति में सुधार होता है।
एडिटोरियल का अध्ययन: अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता को प्रभावी बनाना
द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस को नियमित रूप से पढ़ने से स्थिर विषयों को समसामयिक मुद्दों (जैसे, जातिगत भेदभाव → हाथरस मामला) से जोड़ने में मदद मिलती है और इसके पक्ष बनाम विपक्ष या नैतिकता बनाम व्यावहारिक जैसे तर्कों को समझने में मदद मिलती है।
जैसे किसानों के विरोध प्रदर्शन पर संपादकीय पढ़ने के बाद यूपी में कृषि विपणन की चुनौतियों पर 12 अंकों का उत्तर लिखना चाहिये जिसमें MSP, APMC सुधार और ग्रामीण क्षेत्र में ऋण तक पहुँच जैसे प्रमुख शब्द शामिल हों। इससे मुख्य परीक्षा के उत्तरों में विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
UPPCS मुख्य परीक्षा के उत्तर लेखन में कुछ सामान्य गलतियों से बचना
- प्रश्न की मांग को अनदेखा करना: सामान्य उत्तरों से बचना चाहिये- उत्तर प्रदेश में मनरेगा के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर यूपी-विशिष्ट डेटा तथा सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये। प्रस्तुतीकरण बेहतर करने के लिये कीवर्ड (जैसे, विश्लेषण, सामाजिक-आर्थिक, यूपी ) को रेखांकित करना चाहिये।
- अप्रासंगिक तथ्यों से बचना: अप्रासंगिक डेटा से उत्तर अप्रभावी हो जाते हैं। अनावश्यक विवरण से समय बर्बाद होने के साथ उत्तर की प्रासंगिकता कम हो जाती है। सुनिश्चित करना चाहिये कि प्रत्येक तथ्य प्रत्यक्ष रूप से प्रश्न के उत्तर से संबंधित हो।
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अनुचित समय प्रबंधन: एक उत्तर पर अधिक समय व्यतीत करने से पेपर अधूरा रह जाता है। 12 अंकों के लिये 10 मिनट तक ही सीमित रहें, स्टॉपवॉच का उपयोग करें एवं पहले पूरी तरह से ज्ञात प्रश्नों को हल करें।
यूपी-विशिष्ट उदाहरणों की उपेक्षा करना: सामान्य उत्तर से स्कोर कम हो जाता है। यूपी में शहरीकरण से संबंधित प्रश्न के लिये, मुंबई की मलिन बस्तियों का उल्लेख अप्रासंगिक है; इसके बजाय, कानपुर के AQI 400+ या वाराणसी के जल निकासी मुद्दों पर प्रकाश डालना प्रासंगिक है। UPPCS में स्थानीय संदर्भ को ध्यान में रखते हुए प्रभावी उत्तर के लिये यूपी की प्रमुख योजनाओं, जनसांख्यिकी तथा रिपोर्ट (जैसे, यूपी आर्थिक सर्वेक्षण ) को शामिल करना चाहिये।
निष्कर्ष
UPPCS मुख्य परीक्षा के उत्तर लेखन में दक्षता हासिल करने के लिये निरंतर अभ्यास के साथ समालोचनात्मक विश्लेषण की आवश्यकता होती है। इस लेख में दी गई जानकारियों का पालन करके आप न केवल परीक्षा में समय प्रबंधन कर सकेंगे बल्कि प्रभावी उत्तर भी लिख सकेंगे। UPPCS परीक्षा में सफलता केवल प्रतिभाशाली लोगों के लिये आरक्षित नहीं है - इसे उन उम्मीदवारों द्वारा अर्जित किया जाता है जो निरंतरता को अपनाते हैं, गलतियों से सीखते हैं और जिज्ञासु बने रहते हैं।