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मध्य प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 05 Apr 2025
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वित्त आयोग के अनुदान

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पाँच राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, नागालैंड और पंजाब) में ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs)/पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान वितरित किया है।

मुख्य बिंदु

  • अनुदान के बारे में:
    • ये अनुदान प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में प्रदान किये जाते हैं और इन्हें पंचायती राज मंत्रालय तथा जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल और स्वच्छता विभाग) की सिफारिशों के आधार पर वित्त मंत्रालय द्वारा ज़ारी किया जाता है।
    • पहली किस्त के रूप में मध्य प्रदेश को 651.7794 करोड़ रुपए का असंबद्ध अनुदान आवंटित किया गया है।
  • अनुदान का उपयोग:
    • अप्रतिबंधित अनुदान: ये अनुदान स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (RLB/PRI) को संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के तहत स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये सक्षम बनाते हैं, सिवाय वेतन और स्थापना लागत के।
    • बंधे हुए अनुदान: इन निधियों का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिये अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिये:

पंचायती राज संस्थान

  • 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थानों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और एक समान संरचना (PRI के तीन स्तर), चुनाव, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिलाओं के लिये सीटों का आरक्षण व निधि के अंतरण एवं PRI के कार्य और पदाधिकारी की एक प्रणाली स्थापित की गई।
    • पंचायतें तीन स्तरों पर कार्य करती हैं: ग्राम सभा (गाँव अथवा छोटे गाँवों का समूह), पंचायत समितियाँ (ब्लॉक परिषद) और ज़िला परिषद (ज़िला स्तर पर)।
    • भारत के संविधान का अनुच्छेद 243G राज्य विधानसभाओं को पंचायतों को स्व-सरकारी संस्थानों के रूप में कार्य करने का अधिकार और शक्तियाँ प्रदान करने की शक्ति प्रदान करता है।
    • पंचायतों के वित्तीय सशक्तीकरण के लिये भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243H, अनुच्छेद 280(3)(bb) और अनुच्छेद 243-I निम्नलिखित प्रावधान करता है:
  • अनुच्छेद 243H राज्य विधानमंडलों को करों, शुल्कों, टोल और शुल्क लगाने, एकत्र करने के लिये पंचायतों को अधिकृत करने की शक्ति प्रदान करता है। यह उन्हें शर्तों व सीमाओं के अधीन, इन करों, शुल्कों, टोलों और शुल्कों को पंचायतों को सौंपने की भी अनुमति भी प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 280(3) (bb) के अनुसार यह केंद्रीय वित्त आयोग का कर्तव्य है कि वह राज्य में पंचायतों के संसाधनों की पूर्ति के लिये राज्य की समेकित निधि को बढ़ाने के लिये राज्य के वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर आवश्यक उपायों के बारे में राष्ट्रपति से सिफारिश करे।
    • राज्य और पंचायतों के बीच करों, कर्त्तव्यों, टोल तथा शुल्क के वितरण का मार्गदर्शन करने वाले सिद्धांत, जिसमें उनके संबंधित हिस्सेदारी व पंचायतों के विभिन्न स्तरों के बीच आवंटन शामिल हैं।
    • पंचायतों की वित्तीय स्थिति में सुधार के उपाय।
    • राज्यपाल द्वारा संदर्भित कोई अन्य वित्त संबंधी मामले।
    • अनुच्छेद 243-I के अनुसार राज्यपाल प्रत्येक पाँच वर्ष में राज्य वित्त आयोग के गठन का आदेश देता है। इन आयोगों का कार्य पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने तथा राज्यपाल को निम्नलिखित विषयों के संबंध में सलाह देना है:
  • पंचायती राज मंत्रालय पंचायती राज और पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित सभी मामलों की देखरेख करता है। इसकी स्थापना मई 2004 में की गई थी।


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