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राष्ट्रीय होम्योपैथिक सम्मेलन ‘होम्योकॉन 2023’ का शुभारंभ
चर्चा में क्यों?
14 मई, 2023 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के देहरादून स्थित दून विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय होम्योपैथिक सम्मेलन ‘होम्योकॉन 2023’ का शुभारंभ किया।
प्रमुख बिंदु
- इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने होम्योपैथिक पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लॉच किया तथा होम्योपैथी के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित भी किया।
- गौरतलब है कि भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में पृथक् से आयुष मंत्रालय का गठन किया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा होम्योपैथी को विश्व की दूसरी सबसे बड़ी प्रचलित चिकित्सा पद्धति माना गया है।
- मुख्यमंत्री ने होम्योपैथी के जन्मदाता सैमुअल क्रिश्चियन हैनिमैन का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने होम्योपैथी के रूप में एक ऐसी उपचार पद्धति विकसित की, जो अत्यंत कारगर होने के साथ-साथ किफायती भी है।
- उत्तराखंड राज्य सरकार देवभूमि को एक महत्त्वपूर्ण आयुष प्रदेश के रूप में स्थापित करने हेतु कृत-संकल्पित है। उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य में आयुष और विशेष रूप से किफायती और कारगर होने के कारण होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की महत्ता और बढ़ जाती है।
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एकल महिलाओं को स्वरोज़गार के लिये परियोजना लागत पर 75% सब्सिडी देगी राज्य सरकार
चर्चा में क्यों?
15 मई, 2023 को उत्तराखंड की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने मीडिया को बताया कि उत्तराखंड में एकल महिलाओं को स्वरोज़गार के लिये राज्य सरकार परियोजना लागत पर 75 प्रतिशत सब्सिडी देगी।
प्रमुख बिंदु
- विभागीय मंत्री ने बताया कि 50 हज़ार से दो लाख रुपए तक की परियोजना पर यह सब्सिडी मिलेगी, जबकि, 25 प्रतिशत धनराशि बिना गारंटर के ऋण के रूप में दी जाएगी।
- विभागीय मंत्री ने बताया कि एकल महिलाओं के स्वरोज़गार के लिये निदेशालय स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह न्याय, वित्त और कार्मिक विभाग की मंजूरी के बाद अगली कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
- विभागीय मंत्री ने कहा कि पहले साल में 500 महिलाओं को इस योजना से लाभान्वित किया जाएगा। राज्य में करीब डेढ़ लाख एकल महिलाएँ हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी कल्याण कोष से कार्यकर्त्ताओं को मिलने वाली 30 हज़ार रुपए की धनराशि को बढ़ाकर 50 हज़ार रुपए किया जाएगा। दोनों प्रस्तावों को अगली कैबिनेट में लाया जाएगा।
- मंत्री ने बताया कि राज्य में चार लाख एकल महिलाएँ हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर एकल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये ‘एकल महिला स्वरोज़गार’ के नाम से जो योजना शुरू की जानी है, उस दायरे में करीब डेढ़ लाख महिलाएँ आएंगी।
- ये महिलाएँ पशुपालन, ब्यूटी पार्लर, चाय की दुकान आदि कोई भी स्वरोज़गार से जुड़ा काम कर सकेंगी।
- योजना का लाभ पाने के लिये महिला की उम्र 22 से 45 वर्ष और सालाना आय 72 हज़ार रुपए से कम होनी चाहिये।
- एकल महिलाओं में विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता, अविवाहित महिलाओं के साथ ही किन्नर भी इस योजना के लिये पात्र होंगे।
- मंत्री ने बैठक में महालक्ष्मी किट का दायरा बढ़ाते हुए बालक के जन्म पर भी किट दिये जाने के लिये प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये।
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पूरे राज्य का जीआईए मैप किया जाएगा तैयार
चर्चा में क्यों?
14 मई, 2023 को उत्तराखंड राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव, चंद्रेश यादव ने मीडिया को बताया कि पहली बार आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए प्रदेश की संपूर्ण भूमि का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद पूरे प्रदेश का जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) से नक्शा तैयार किया जाएगा।
प्रमुख बिंदु
- राज्य सरकार की ओर से इसके लिये 150 करोड़ रुपए के बजट की व्यवस्था की गई है। उत्तराखंड राजस्व परिषद को इस काम के लिये नोडल एजेंसी बनाया गया है।
- उत्तराखंड राजस्व परिषद डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के तहत राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि का सर्वेक्षण करेगी। इसके साथ ही सभी सरकारी विभागों की भूमि का ब्योरा भी जुटाया जाएगा।
- डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम के तहत प्रदेश की संपूर्ण भूमि के सर्वेक्षण का काम करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य सचिव की ओर से आदेश निर्गत होने के बाद आरएफटी टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- सर्वे का काम एरियल लिडार (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) तकनीक से किया जाएगा। यह सर्वे की एरियल मैपिंग तकनीक है, जो धरती की सतह से कैलिब्रेटेड लेजर रिटर्न का उपयोग करती है और ऑन-बोर्ड पोजिशनल और आईएमयू सेंसर से लैस जीपीएस-निगरानी वाले विमान के माध्यम से पूरी की जाती है।
- विदित है कि प्रदेश का अधिकांश भूभाग (नौ ज़िले) पर्वतीय होने के कारण तमाम जमीनें गोल खातों के विवाद में उलझी हैं। सरकार कई विकास योजनाओं को भूमि की अनुपलब्धता के कारण शुरू नहीं कर पा रही है। वहीं, कई विभागों के पास अपनी ही उपलब्ध भूमि का रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
- इन सब समस्याओं से पार पाने के लिये सरकार ने अब संपूर्ण भूमि का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके लिये मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु की अध्यक्षता में शासी निकाय का गठन किया गया है, जिसमें सभी विभागों के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव व विभागाध्यक्षों को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
- प्रदेश में संपूर्ण भूमि का सर्वे होने और जीआईएस मैप तैयार हो जाने के बाद भूमि विवाद से संबंधी मसलों को हल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही प्लानिंग के स्तर पर सरकार को निर्णय लेने में आसानी होगी। हर भूमि का भू आधार नंबर (यूएलआईपीएन) तैयार होगा।
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