राजस्थान
कोर शीत लहर क्षेत्र
- 25 Nov 2024
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चर्चा में क्यों?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (NPCCHH) ने राजस्थान तथा 16 अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिये शीत लहर की स्थिति पर सार्वजनिक सलाह जारी की है।
प्रमुख बिंदु
- शीत लहर ऋतु और मुख्य शीत लहर क्षेत्र:
- शीत लहर 24 घंटे के भीतर तापमान में होने वाली तीव्र गिरावट है, जो कृषि, उद्योग, वाणिज्य और सामाजिक गतिविधियों के लिये पर्याप्त सुरक्षा की आवश्यकता उत्पन्न करती है।
- शीत लहर का मौसम नवंबर से मार्च तक रहता है तथा दिसंबर और जनवरी में सबसे अधिक ठंड पड़ती है।
- प्रभावित क्षेत्र:
- तेलंगाना, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा।
- सुभेद्य समूह:
- परामर्श में निम्नलिखित जनसंख्या को विशेष रूप से जोखिमग्रस्त बताया गया है:
- बेघर व्यक्ति
- बुजुर्ग लोग
- आर्थिक रूप से वंचित व्यक्ति
- गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएँ
- बच्चे
- आउटडोर श्रमिक और किसान
- रात्रि आश्रयों के प्रबंधक
- परामर्श में निम्नलिखित जनसंख्या को विशेष रूप से जोखिमग्रस्त बताया गया है:
- शीत लहर की परिभाषा:
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मानकों के अनुसार :
- मैदानी इलाकों में शीत लहर तब आती है जब न्यूनतम तापमान ≤10°C होता है।
- पहाड़ी क्षेत्रों के लिये इसे न्यूनतम तापमान ≤0°C के रूप में परिभाषित किया गया है।
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मानकों के अनुसार :
- संभावित स्वास्थ्य समस्याएँ:
- हाइपोथर्मिया बहुत कम तापमान के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण होता है।
- फ्रॉस्टबाइट ठंडे तापमान के कारण त्वचा और ऊतकों को होने वाली क्षति है।
- नॉन-फ्रीजिंग कोल्ड इंजरी, इमर्शन फुट जैसी स्थितियाँ हैं, जो लंबे समय तक ठंड और गीली स्थितियों के संपर्क में रहने के कारण उत्पन्न होती हैं।
- गंभीर मामलों में, यदि सावधानी न बरती जाए तो ठंड के कारण मृत्यु भी हो सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग
- IMD की स्थापना वर्ष 1875 में हुई थी।
- यह भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक एजेंसी है।
- यह मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिये ज़िम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।