बोधगया मंदिर | 05 Apr 2025
चर्चा में क्यों?
बिहार में बोधगया मंदिर अधिनियम (BTA), 1949 को निरस्त करने की मांग को लेकर कई बौद्ध भिक्षु महाबोधि महाविहार (बोधगया मंदिर) में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- मुद्दे के बारे में:
- यह विरोध अखिल भारतीय बौद्ध मंच (AIBF) की अगुवाई में विभिन्न बौद्ध समूहों द्वारा किया जा रहा है।
- उनका विरोध इस एक्ट के तहत बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (BTMC) में हिंदू धर्मावलंबियों को भी सदस्य बनाए जाने के प्रावधान से है।
- बौद्ध भिक्षुओं का कहना है कि मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध समुदाय के हाथों में होना चाहिये।
- बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC)
- बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 के तहत 1953 में बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर के प्रबंधन के लिये BTMC की स्थापना की गई।
- इस समिति में बौद्ध समुदाय के चार और हिंदू समुदाय के चार सदस्य हैं।
- अधिनियम के अनुसार, गया के ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) समिति के पदेन अध्यक्ष हैं।
- बोधगया मंदिर
- बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्थल है।
- यह भगवान बुद्ध के जीवन और विशेष रूप से ज्ञान प्राप्ति से संबंधित है।
- महाबोधि मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद 260 ईसा पूर्व में कराया था।
- यह पूरी तरह से ईंटों से निर्मित सबसे शुरुआती बौद्ध मंदिरों में से एक है।
- इसे वर्ष 2002 से यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।
- चीनी तीर्थयात्री ह्वेन त्सांग ने इस मंदिर का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है।
- वर्तमान मंदिर संरचना का निर्माण गुप्त शासकों द्वारा 5वीं या 6वीं शताब्दी ईस्वी में कराया गया था।