Sambhav-2025

दिवस- 7: नवपाषाण क्रांति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिये और इसके परिणामस्वरूप हुए सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का विश्लेषण कीजिये।

09 Dec 2024 | सामान्य अध्ययन पेपर 1 | इतिहास

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोण:

  • नवपाषाण क्रांति को संक्षेप में परिभाषित कीजिये।
  • नवपाषाण क्रांति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिये
  • नवपाषाण क्रांति के परिणामस्वरूप हुए सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों पर चर्चा कीजिये।
  • उचित रूप से निष्कर्ष निकालिये।

परिचय: 

नवपाषाण क्रांति, जो लगभग 10,000 ईसा पूर्व शुरू हुई, ने खानाबदोश शिकार-संग्रह जीवनशैली से स्थायी कृषि समुदायों की ओर संक्रमण को चिह्नित किया। यह क्रांति मानव इतिहास में सबसे महत्त्वपूर्ण मील के पत्थरों में से एक है, जिसने सभ्यता के विकास की नींव रखी। 

मुख्य भाग: 

नवपाषाण क्रांति की मुख्य विशेषताएँ:

  • कृषि का विकास:
    • नवपाषाण क्रांति की सबसे प्रमुख विशेषता शिकार और संग्रहण से कृषि आधारित जीवनशैली की ओर परिवर्तन था। 
    • वर्तमान बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में स्थित मेहरगढ़, प्रारंभिक कृषि प्रथाओं, पशुओं के पालन और स्थायी जीवन के महत्त्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करता है।
    • चिरांद (बिहार) एक नवपाषाणकालीन स्थल है जो चावल की खेती और प्रारंभिक गाँवों की उपस्थिति का साक्ष्य प्रदान करता है।
  • स्थायी बस्तियाँ:
    • कृषि के आगमन से लोगों को एक स्थान पर बसने में मदद मिली, जिससे स्थायी गाँवों और कस्बों की स्थापना हुई।
    • जेरिको का प्राचीन शहर (वर्तमान फिलिस्तीन में) सबसे पुराने ज्ञात लगातार बसे शहरों में से एक है, जहाँ नवपाषाण काल ​​से स्थायी आवास और कृषि के साक्ष्य मिलते हैं।
    • कर्नाटक में स्थित संगनाकल्लू एक महत्त्वपूर्ण नवपाषाण स्थल है, जहाँ कृषि गतिविधियों और प्रारंभिक बस्तियों के साक्ष्य मिलते हैं।
  • मिट्टी के बर्तन और शिल्पकला:
    • मिट्टी के बर्तन नवपाषाण काल के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन गए। इस काल के बर्तन अपने साधारण और हस्तनिर्मित डिज़ाइनों के लिये जाने जाते थे और इन्हें भोजन पकाने, सामग्री भंडारण तथा विभिन्न घरेलू कार्यों में उपयोग किया जाता था।
    • कश्मीर स्थल बुर्जहोम के मिट्टी के बर्तन अपने दैनिक उपयोग और अनुष्ठानिक कार्यों में प्रयोग के लिये उल्लेखनीय हैं। 
  • दफनाने की प्रथाएँ:
    • नवपाषाण काल ​​के दौरान दफनाने की प्रथा भी विकसित हुई, जिसमें पहली बार औपचारिक दफनाने और कब्रों में व्यक्तिगत वस्तुओं को शामिल करने के साक्ष्य मिले हैं, जो मृत्यु के बाद के जीवन एवं अनुष्ठानिक प्रथाओं में विश्वास का संकेत देते हैं।
    • बुर्जहोम में, गड्ढों में पाए गए कंकाल के अवशेष, साथ ही मिट्टी के बर्तन और पत्थर के औजार जैसी कब्र की वस्तुएँ, अनुष्ठानिक दफन की प्रथा एवं मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास का संकेत देती हैं।

सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन:

  • सामाजिक परिवर्तन:
    • स्थायी बस्तियों की स्थापना और अधिशेष खाद्य उत्पादन के कारण जनसंख्या वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप बड़े एवं अधिक संरचित समुदाय अस्तित्व में आए।
    • निजी संपत्ति की अवधारणा तब उभरी, जब व्यक्तियों ने भूमि, पशुधन और फसलों का स्वामित्व प्राप्त करना शुरू कर दिया।
    • इस अवधि में सामाजिक पदानुक्रम का विकास हुआ, जिसमें संपन्न भूस्वामियों और भूमि पर काम करने वालों के बीच अंतर स्पष्ट था, साथ ही श्रम का विशेषीकरण भी देखने को मिला।
  • आर्थिक परिवर्तन:
    • कृषि के विकास से अधिशेष खाद्यान्न उत्पादन संभव हुआ, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच व्यापार संभव हुआ।
    • इस प्रारंभिक व्यापार ने दूर-दराज़ के क्षेत्रों को जोड़ने में मदद की और मिट्टी के बर्तनों, औजारों एवं खाद्य उत्पादों जैसी सामग्रियों के आदान-प्रदान को सुगम बनाया।
    • जैसे-जैसे समाज विकसित हुआ, लोगों ने विशिष्ट कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया, जैसे- मिट्टी के बर्तन बनाना, बुनाई और उपकरण बनाना, जिसके परिणामस्वरूप शिल्प उद्योगों का विकास हुआ एवं आर्थिक विविधीकरण हुआ।
  • सांस्कृतिक परिवर्तन:
    • स्थायी बस्तियों की ओर कदम बढ़ाने से धार्मिक और आध्यात्मिक प्रथाओं के विकास को प्रोत्साहन मिला। 
    • नवपाषाण क्रांति के दौरान कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का विकास हुआ, क्योंकि लोगों ने मिट्टी के बर्तन, गुफा चित्र और मूर्तियाँ बनाईं। ये कलाकृतियाँ अक्सर धार्मिक विश्वासों और प्राकृतिक दुनिया से प्रेरित होती थीं।
    • भीमबेटका (मध्य प्रदेश) में नवपाषाण काल ​​की चित्रकारी में पालतूकरण, कृषि और संरचित सामुदायिक जीवन के विकास के विषयों पर प्रकाश डाला गया है।

निष्कर्ष:

नवपाषाण क्रांति ने जनसंख्या वृद्धि, व्यापार, विशेषज्ञता के विकास और धार्मिक प्रथाओं के उदय सहित कई महत्त्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक परिवर्तन किये। इन परिवर्तनों ने शहरों, जटिल समाजों और सभ्यता के उदय की नींव रखी, जिसने आधुनिक जीवन को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।