भारत में कृषि सब्सिडी को समाप्त करने की बजाय युक्तिसंगत एवं विवेकपूर्ण करना उचित कदम कहा जाएगा। इस संदर्भ में भारत को भविष्य में क्या रणनीति अपनानी चाहिये? स्पष्ट करें।
उत्तर :
भारत में कृषि सब्सिडी कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक न्याय, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण विकास एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने का महत्त्वपूर्ण उपकरण साबित हुई है। अतः इसे समाप्त करने की बजाय इसको युक्तिसंगत एवं विवेकपूर्ण किया जाना चाहिये। इस संदर्भ में निम्नलिखित रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं-
- कृषि सब्सिडी को लक्ष्योन्मुखी बनाया जाना चाहिये ताकि इसका लाभ लक्षित समूह तक पहुँच सके एवं लीकेज कम से कम हो।
- लक्षित समूह को सब्सिडी समयबद्ध तरीके से प्रदान की जानी चाहिये और इस संदर्भ में 'सूर्यास्त प्रावधान' (sunset clause) सरीखा नियम सुनिश्चित किया जाना चाहिये।
- सब्सिडी की ‘राशनिंग’ की जानी चाहिये तथा प्रति किसान प्रदत्त सब्सिडी की अधिकतम मात्रा निर्धारित की जानी चाहिये।
- सब्सिडी को लीकेज से बचाने के लिये 'प्रत्यक्ष लाभ हस्ताक्षरण' (Direct Benefits Transfer- DBT) के माध्यम से सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जानी चाहिये।
- लोगों में सब्सिडी के पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति जागरूकता का विकास करना चाहिये। इन प्रभावों का समय-समय पर मूल्यांकन करना चाहिये एवं इनकी प्रभावी मॉनिटरिंग भी की जानी चाहिये।
- सब्सिडी का निर्धारण इस प्रकार किया जाना चाहिये कि उर्वरकों के संतुलित एवं तार्किक प्रयोग को बढ़ावा मिले।
- कृषि सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करना चाहिये तथा कृषिगत अवसंरचनाओं, जैसे- सिंचाई, बिजली, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, सड़क नेटवर्क आदि के विकास के लिये निवेश करना चाहिये।
- कृषि सब्सिडी राजनीति स्वार्थ सिद्धि से प्रेरित नहीं होनी चाहिये।
इन रणनीतिक कदमों का अनुसरण कर कृषि सब्सिडी के प्रतिकूल प्रभावों की सीमित किया जा सकता है, साथ ही सब्सिडी कृषि एवं ग्रामीण विकास की गति को तीव्र करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।