प्रश्न :
आप सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारी हैं। हाल ही में सोशल मीडिया को विनियमित करने के लिये एक बड़ी नीति बनाई गई है, और आपने इसके प्रारूपण एवं कार्यान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक शाम, घर लौटते समय, आपको अपनी बेटी के कॉलेज काउंसलर का फोन आता है, जो आपसे अगली सुबह मिलने का अनुरोध करता है।
जब आप कॉलेज जाते हैं, तो काउंसलर आपको बताता है कि आपकी बेटी में तनाव के लक्षण दिख रहे हैं, वह कक्षा में कम भाग ले रही है और उसकी अनुपस्थिति बढ़ रही है। अपनी बेटी से निजी तौर पर बात करने पर आपको पता चलता है कि वह एक लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उत्पीड़न (बुलीइंग) का शिकार हो रही है। उस पर उसके रूप-रंग और "उस अधिकारी की बेटी जो लोगों की पसंदीदा चीजों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं" जैसे तानों को लेकर मीम, वीडियो एवं पोस्ट बनाए जा रहे हैं।
वह बताती है कि उसके सहपाठी न केवल स्कूल में, बल्कि ऑनलाइन भी उसका मजाक उड़ा रहे हैं और उसके पिता की भूमिका के कारण उसे दोषी ठहरा रहे हैं, जिससे उसके माता-पिता के फैसलों के प्रति असंतोष झलकता है। वह आपसे अनुरोध करती है कि इस मामले में कोई आधिकारिक या सार्वजनिक कदम न उठाया जाए, क्योंकि उसे डर है कि इससे उसका अपमान और बढ़ जाएगा। आपके सहकर्मी आपको अपने मंत्रालय के प्रेस विंग के माध्यम से औपचारिक स्पष्टीकरण जारी करने या तथ्यों को प्रस्तुत करने और अपने परिवार का बचाव करने के लिये एक व्यक्तिगत वीडियो जारी करने की सलाह देते हैं। हालाँकि, वरिष्ठ लोक सेवक आपको इसे व्यक्तिगत या भावनात्मक बनाने के खिलाफ चेतावनी देते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यह एक गलत उदहारण पेश कर सकता है और संस्थागत प्रोटोकॉल को कमज़ोर कर सकता है।
प्रश्न
1. मामले में शामिल नैतिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये और चर्चा कीजिये।
2. इस स्थिति में आप क्या कदम उठाएँगे और क्यों? नैतिक सिद्धांतों का उपयोग करके अपने उत्तर की पुष्टि कीजिये।
3. यह सुनिश्चित करने के लिये क्या नियामक कार्यढाँचा होना चाहिये कि सोशल मीडिया स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिये एक स्थान बना रहे तथा नागरिकों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार, गलत सूचना और डिजिटल हेरफेर से सुरक्षित रखा जा सके?
28 Mar, 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़
उत्तर :
परिचय:
यह मामला एक नैतिक दुविधा प्रस्तुत करता है, जहाँ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में एक वरिष्ठ अधिकारी, जो सोशल मीडिया विनियमन नीति के प्रारूप को तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, को एक व्यक्तिगत संकट का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उनकी बेटी ऑनलाइन उत्पीड़न (बुलीइंग) का शिकार हो जाती है और यह उनके पेशेवर कार्य से जुड़ा होता है।
- अब, उन्हें अपनी बेटी की भावनात्मक-मानसिक स्वास्थ्य और गोपनीयता की रक्षा करनी है, लेकिन साथ ही उन्हें संस्थागत ईमानदारी बनाए रखते हुए सार्वजनिक आलोचनाओं (public criticism) का जिम्मेदारी से प्रत्युत्तर भी देना है।
मुख्य भाग:
(a) मामले में शामिल नैतिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये और चर्चा कीजिये।
- निजता और गरिमा का उल्लंघन
- वरिष्ठ सरकारी अधिकारी (नीति-निर्माता) की बेटी होने के कारण उसकी पहचान का जानबूझकर गलत और नकारात्मक तरीके से इस्तेमाल किया गया है, उसे बदनाम और उसका सार्वजनिक उपहास किया जा रहा है।
- यह उनकी निजता, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है तथा संभवतः भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
- साइबर बुलीइंग और जवाबदेही का अभाव
- यह घटना ऑनलाइन बुलीइंग के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, विशेष रूप से कमज़ोर व्यक्तियों के खिलाफ तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर गुमनामी से उत्पन्न विषाक्तता को उजागर करती है।
- इससे उस नीति की प्रभावशीलता और निष्पक्षता पर सवाल उठता है जिसे तैयार करने में अधिकारी ने मदद की थी।
- संस्थागत अखंडता बनाम भावनात्मक प्रतिक्रिया
- सार्वजनिक खंडन को व्यक्तिगत बचाव के लिये सरकारी कार्यप्रणाली का दुरुपयोग तथा लोक प्रशासन की तटस्थता का उल्लंघन माना जा सकता है।
- दूसरी ओर, चुप्पी असंवेदनशीलता का संकेत दे सकती है और धमकाने वालों को बढ़ावा दे सकती है।
- मिसाल और सार्वजनिक धारणा
- व्यक्तिगत प्रतिक्रिया एक मिसाल कायम कर सकती है, जहाँ नीति-निर्माता शासन को व्यक्तिगत बनाना शुरू कर सकते हैं, जिससे दीर्घकालिक प्रशासनिक विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
- हालाँकि, प्रतिक्रिया में विफलता प्रशासनिक अभिजात्यवाद या उदासीनता के रूप में दिखाई दे सकती है, विशेष रूप से उन नागरिकों के लिये जो इसी तरह के ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।
(b) इस स्थिति में आप क्या कदम उठाएँगे और क्यों? नैतिक सिद्धांतों का उपयोग करके अपने उत्तर की पुष्टि कीजिये।
चरण 1: बेटी की निजता, भावनात्मक और मानसिक भलाई का ध्यान रखना
- उसकी मानसिक भलाई सुनिश्चित करना तत्काल प्राथमिकता होगी। जिसमें मुझे:
- भावनात्मक समर्थन को सुदृढ़ करने के लिये उसके साथ गुणवत्तापूर्ण समय व्यतीत करना चाहिये और उसे यह आश्वासन देना चाहिये कि मैं हर हाल में उसके साथ हूँ।
- परिवार या सहकर्मी जैसे विश्वसनीय और पृथक माध्यमों से पेशेवर परामर्श की व्यवस्था करनी चाहिये।
- नैतिक सिद्धांत: एक कमज़ोर व्यक्ति के प्रति करुणा, देखभाल नैतिकता और सहानुभूति महत्त्वपूर्ण होगी।
चरण 2: उसकी स्वायत्तता और सहमति का सम्मान करना
- चूँकि उसने (बेटी) स्पष्ट रूप से गोपनीयता की इच्छा व्यक्त की है, इसलिये मैं किसी भी व्यक्तिगत मीडिया बयान या उच्च-स्तरीय सार्वजनिक प्रतिक्रिया से बचूंगा, जिससे उनकी स्थिति खराब हो सकती है। चूँकि उसने स्पष्ट रूप से गोपनीयता की इच्छा जताई है, इसलिए मुझे ऐसे किसी भी व्यक्तिगत मीडिया बयान देने या हाई-प्रोफाइल सार्वजनिक प्रतिक्रिया से बचना चाहिये, जो उसकी स्थिति को और खराब कर सकती है।"
- नैतिक सिद्धांत: स्वायत्तता और व्यक्तिगत गरिमा के प्रति सम्मान। नेक इरादों के बावजूद, उसकी इच्छा के विरुद्ध कार्य करने से लाभ की बजाय हानि हो सकती है।
चरण 3: बिना निजीकरण के संस्थागत प्रतिक्रिया
- अपनी बेटी या व्यक्तिगत जीवन का संदर्भ दिये बिना, मुझे एक तटस्थ विभागीय समीक्षा शुरू करने की आवश्यकता है ताकि यह आकलन किया जा सके कि क्या वर्तमान सोशल मीडिया नीतियाँ साइबर बुलीइंग और लक्षित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को बेहतर ढंग से हल करती हैं।
- यदि कोई कमी पाई जाती है, तो इसके लिये संशोधन की सिफारिश की जानी चाहिये और संस्थागत माध्यमों से शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करने की जानी चाहिये।
- नैतिक सिद्धांत: निष्पक्षता, व्यावसायिक दायित्व, सार्वजनिक हित के प्रति संवेदनशीलता।
चरण 4: शैक्षणिक संस्थान से निजी तौर पर संपर्क करना
- मुझे कॉलेज प्राधिकारियों से यह अनुरोध करना चाहिये कि वे:
- कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को ऑनलाइन व्यवहार, बदमाशी और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में संवेदनशील बनाएँ।
- परिसर में सोशल मीडिया से संबंधित मुद्दों पर अधिक सक्रियता से निगरानी रखें।
- नैतिक सिद्धांत: नेतृत्व, निवारक नैतिकता और सामुदायिक कल्याण के प्रति जिम्मेदारी।
(c) यह सुनिश्चित करने के लिये क्या नियामक कार्यढाँचा होना चाहिये कि सोशल मीडिया स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिये एक स्थान बना रहे तथा नागरिकों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार, गलत सूचना और डिजिटल हेरफेर से सुरक्षित रखा जा सके?
- त्रि-स्तरीय शिकायत निवारण संरचना
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 से प्रेरित, लेकिन अधिक प्रभावी एवं उपयोगकर्त्ता के अनुकूल:
- टियर 1: प्लेटफॉर्म-स्तरीय शिकायत अधिकारी— सभी प्लेटफॉर्मों के लिये दुर्व्यवहार, उत्पीड़न, गलत सूचना आदि हेतु 72 घंटे की प्रतिक्रिया समय के साथ लोक शिकायत अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य है।
- टियर 2: स्व-नियामक निकाय— स्वतंत्र उद्योग-नेतृत्व वाली संस्थाएँ शिकायतों की निगरानी करेंगी और प्रसारण कंटेंट शिकायत परिषदों के समान प्लेटफॉर्म अनुपालन सुनिश्चित करेंगी।
- टियर 3: सरकारी निरीक्षण तंत्र— एक डिजिटल संचार प्राधिकरण या नोडल मंत्रालय निकाय जो अनसुलझे शिकायतों का निवारण करेगा, आपत्तिजनक सामग्री हटाने (takedown orders) के आदेशों को लागू करेगा और सलाहकारी दिशानिर्देश जारी करेगा।
- अनिवार्य ऑनलाइन सुरक्षा मानक
- सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिये न्यूनतम सुरक्षा और नैतिक मानकों को लागू करने हेतु कानूनी आदेश लागू किये जाने चाहिये, जिसमें शामिल हैं:
- सत्यापित रिपोर्टिंग उपकरण: हेट स्पीच, डीप फेक, साइबर बुलीइंग पर कार्रवाई के लिये रियल-टाइम रिपोर्टिंग ऑप्शन— विशेष रूप से नाबालिगों या कमज़ोर समूहों को लक्षित करने के लिये।
- युवाओं के लिये डिफॉल्ट सिक्योरिटी सेटिंग्स: आपत्तिजनक कंटेंट को स्वचालित रूप से फिल्टर करना, 18 वर्ष से कम आयु के यूज़र्स के लिये निजी प्रोफाइल डिफॉल्ट तथा आयु-उपयुक्त कंटेंट मॉडरेशन।
- जियो-टैगिंग ट्रांसपैरेंसी: यूज़र्स को सूचित किया जाना चाहिये कि क्या उन्हें लक्षित करने वाले कंटेंट को उनके क्षेत्र या देश के बाहर प्रचारित किया जा रहा है, ताकि विदेशी प्रचार (foreign propaganda) या भ्रामक जानकारी (misinformation) से मुकाबला किया जा सके।
- एल्गोरिदम ट्रांसपैरेंसी और जवाबदेही
- एल्गोरिदम कंटेंट को सकारात्मक और विषाक्त दोनों रूप से बढ़ावा देते हैं। इसलिये:
- ऑडिट योग्य पारदर्शिता रिपोर्ट: प्लेटफॉर्मों को समय-समय पर पारदर्शिता रिपोर्ट प्रकाशित करनी चाहिये, जिसमें टेकडाउन आँकड़े, आपत्तिजनक कंटेंट के रुझान और कंटेंट मॉडरेशन की सफलता दर शामिल हैं।
- एथिकल AI गवर्नेंस: कंटेंट रेकमेंडेशन या मॉडरेशन के लिये प्रयोग किये जाने वाले एल्गोरिदम को एक स्वतंत्र प्राधिकरण (EU में GDPR की तर्ज पर) द्वारा ऑडिट योग्य बनाया जाना चाहिये।
- पूर्वाग्रह पहचान प्रोटोकॉल: प्लेटफॉर्मों को एल्गोरिदम संबंधी पूर्वाग्रहों का पता लगाना और उनका खुलासा करना चाहिये जो नकारात्मक पूर्वाग्रहों को बल दे सकते हैं या ध्रुवीकरण संबंधी आख्यानों को बढ़ा सकते हैं।
- डिजिटल सभ्यता और नैतिकता शिक्षा
- कार्यढाँचे का एक सक्रिय, निवारक स्तंभ:
- स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल एथिक्स पाठ्यक्रम: जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार, सहानुभूति और तथ्य-जाँच की शिक्षा अनिवार्य है।
- जन जागरूकता अभियान: स्वच्छ भारत के व्यवहार परिवर्तन दृष्टिकोण के समान, “टाइप करने से पहले सोचें” या “जिम्मेदार नेटिजनशिप” जैसे राष्ट्रीय अभियानों को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।
- गेमिफाइड रिपोर्टिंग प्रोत्साहन: उन नैतिक उपयोगकर्त्ताओं को पुरस्कृत किया जाना चाहिये जो लगातार दुर्व्यवहार या गलत सूचना की रिपोर्ट करते हैं, उन्हें बैज, डिजिटल साक्षरता टोकन या सिविक पॉइंट्स (नागरिक अंक) प्रदान किये जाने चाहिये।
- मनोवैज्ञानिक और पीड़ित सहायता तंत्र
- ऑनलाइन दुर्व्यवहार के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का अभिनिर्धारण:
- साइबर बुलीइंग के पीड़ितों, विशेषकर किशोरों और महिलाओं के लिये समर्पित हेल्पलाइन होने चाहिये।
- गुमनाम परामर्श, आघात सहायता और सहकर्मी समूह प्रदान करने के लिये मानसिक स्वास्थ्य स्टार्टअप एवं गैर सरकारी संगठनों के साथ सहयोग किया जाना चाहिये।
- कानूनी सहायता पीड़ितों को साइबर अपराध इकाइयों तक पहुँचने और बिना किसी डर या कलंक के शिकायत दर्ज करने में सहायता प्रदान की जानी चाहिये।
- सीमा पार सहयोग और डेटा स्थानीयकरण
- वैश्विक तकनीकी अग्रणियों और सीमा पार ट्रॉलिंग से निपटने के लिये:
- अंतर्राष्ट्रीय रूपरेखा: दक्षिण एशिया डिजिटल सुरक्षा चार्टर या वैश्विक डिजिटल नैतिकता समझौतों में भागीदारी के लिये प्रयास किये जाने चाहिये।
- डेटा स्थानीयकरण कानून: यह सुनिश्चित करना कि प्लेटफॉर्म गोपनीयता से समझौता किये बिना, जाँच में सहायता के लिये यूज़र्स डेटा को भारतीय सर्वर पर संग्रहीत किया जाना चाहिये।
निष्कर्ष:
इस दुविधा से निपटने के लिये, व्यक्तिगत संवेदनशीलता और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना होगा। संस्थागत प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए शांतिपूर्वक प्रणालीगत खामियों को दूर करना दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित करता है। भावनात्मक बुद्धिमत्ता, विवेक और नैतिक नेतृत्व महत्त्वपूर्ण हैं। इस घटना को सभी नागरिकों के लिये डिजिटल सुरक्षा कार्यढाँचे को सुदृढ़ करने के लिये उत्प्रेरक के रूप में काम करना चाहिये।