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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. "भावनात्मक बुद्धिमत्ता नैतिक और सहानुभूतिपूर्ण लोक सेवा की आधारशिला है।" उपयुक्त उदाहरणों के साथ इस कथन की पुष्टि कीजिये। (150 शब्द)

    27 Mar, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भावनात्मक बुद्धिमत्ता को परिभाषित करते हुए उत्तर दीजिये।
    • नैतिक और सहानुभूतिपूर्ण लोक सेवा की आधारशिला के रूप में भावनात्मक बुद्धिमत्ता के पक्ष में तर्क दीजिये।
    • उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EI) से तात्पर्य स्वयं की और दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने, प्रबंधित करने और प्रभावित करने की क्षमता से है। लोक सेवा में, जहाँ निर्णय लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं और इसमें विश्वास, न्याय एवं कल्याण शामिल होता है, भावनात्मक बुद्धिमत्ता न केवल वांछनीय बल्कि आवश्यक हो जाती है।

    मुख्य भाग:

    नैतिक और सहानुभूतिपूर्ण लोक सेवा की आधारशिला के रूप में भावनात्मक बुद्धिमत्ता:

    • शासन में सहानुभूति और करुणा को सक्षम बनाती है: उच्च भावनात्मक बुद्धिमत्ता वाला एक लोक सेवक नागरिकों के संघर्षों के प्रति सहानुभूति रख सकता है और विशेष रूप से कमज़ोर लोगों के प्रति करुणा के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है।
      • दाहरण: कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, प्रकाश राजपुरोहित (दिल्ली) जैसे कई IAS अधिकारियों ने भोजन वितरण का आयोजन किया और प्रवासी श्रमिकों के लिये आश्रय सुनिश्चित किया, जिससे सहानुभूति एवं सक्रिय प्रशासन का प्रदर्शन हुआ।
    • दबाव में नैतिक निर्णय लेने में सहायता: EI लोक सेवकों को उच्च तनाव की स्थितियों के दौरान भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को तर्कसंगत नैतिकता के साथ संतुलित करने में सहायता करता है।
      • इससे यह सुनिश्चित होता है कि निर्णय न केवल कानूनी रूप से सही हों, बल्कि नैतिक रूप से भी उचित हों।
      • उदाहरण: सांप्रदायिक तनाव से निपटने वाले ज़िला मजिस्ट्रेट को शांत रहना चाहिये, व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से ऊपर उठना चाहिये और शांति बनाए रखने के लिये निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिये।
    • प्रभावी संघर्ष समाधान में सहायता: लोक सेवक प्रायः परस्पर विरोधी हितों के बीच मध्यस्थता करते हैं जैसे: किसान बनाम उद्योग, प्रदर्शनकारी बनाम पुलिस, आदि
      • भावनात्मक बुद्धिमत्ता समस्या को सुनने, तनाव कम करने और उचित समाधान तक पहुँचने में मदद करती है।
    • नागरिकों के बीच विश्वास और विश्वसनीयता का निर्माण: भावनात्मक रूप से बुद्धिमान अधिकारी विनम्रता एवं सम्मान के साथ संवाद करते हैं, जिससे नागरिकों को लगता है कि उनकी बात सुनी जा रही है और उन्हें महत्त्व दिया जा रहा है। इससे संस्थागत विश्वास का निर्माण होता है।
      • उदाहरण: ‘मिरेकल मैन’ के नाम से विख्यात IAS अधिकारी आर्मस्ट्रांग पाम ने मणिपुर के सुदूर क्षेत्र में 100 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने के लिये फेसबुक के माध्यम से जन समर्थन जुटाकर असाधारण भावनात्मक बुद्धिमत्ता एवं सहानुभूति का परिचय दिया।
    • बर्नआउट को रोकता है और नैतिक दृढ़ता बढ़ाता है: लोक सेवा की मांगपूर्ण प्रकृति भावनात्मक श्रम का कारण बन सकती है। EI अधिकारियों को तनाव का प्रबंधन करने, ईमानदारी बनाए रखने और नैतिक समझौता रोकने में मदद करता है।
      • उदाहरण: पुलिस या लोक प्रशासन में नैतिक चूक प्रायः लंबे समय तक तनाव और निराशावाद से उत्पन्न होती है।
    • LBSNAA और SVPNPA की तरह EI में अधिकारियों को प्रशिक्षण देने से भावनात्मक दृढ़ता विकसित करने में मदद मिलती है।
    • टीमवर्क और संगठनात्मक नैतिकता को सुदृढ़ करता है: भावनात्मक रूप से बुद्धिमान अभिकर्त्ता सार्वजनिक संस्थाओं में समावेशिता, सक्रिय सुनवाई और प्रेरणा को बढ़ावा देते हैं जिससे एक नैतिक और जवाबदेह संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
      • उदाहरण: केरल बाढ़ (वर्ष 2018) के दौरान, आपदा प्रबंधन टीमों में भावनात्मक रूप से जागरूक नेतृत्व ने समन्वय, स्वयंसेवकों का मनोबल और प्रभावित आबादी के प्रति संवेदनशीलता सुनिश्चित की।

    निष्कर्ष

    भावनात्मक बुद्धिमत्ता कोई सॉफ्ट स्किल नहीं है, बल्कि यह सरकारी कर्मचारियों के लिये एक मुख्य योग्यता है। यह नियम-आधारित शासन और मानव-केंद्रित प्रशासन के बीच के अंतराल को समाप्त करता है, यह सुनिश्चित करता है कि निर्णय न केवल कानून के अनुसार सही हों, बल्कि भावना के अनुसार भी सही हों।

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