- फ़िल्टर करें :
- सैद्धांतिक प्रश्न
- केस स्टडीज़
-
प्रश्न :
प्रश्न. लोक सेवा के अंतर्गत वित्तीय संयम प्रशासनिक ईमानदारी में किस प्रकार योगदान देता है? उदाहरणों के साथ चर्चा कीजिये। (150 शब्द)
27 Mar, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्नउत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- वित्तीय संयम के संदर्भ में संक्षिप्त जानकारी के साथ उत्तर दीजिये।
- वित्तीय संयम शासन में किस प्रकार ईमानदारी में योगदान देता है, बताइये।
- उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
वित्तीय संयम, जिसे लोक सेवा के नैतिक एवं कुशल प्रबंधन के रूप में परिभाषित किया जाता है, शासन में ईमानदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये मौलिक घटक है। जब सार्वजनिक धन का जिम्मेदारी से उपयोग किया जाता है, तो यह संस्थानों में विश्वास को दृढ़ करता है और ईमानदारी को बनाए रखता है, जो लोक प्रशासन में ईमानदारी, पारदर्शिता और ईमानदार आचरण को दर्शाता है।
मुख्य भाग:
शासन में ईमानदारी के लिये वित्तीय संयम का योगदान:
- सरकारी व्यय में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है: वित्तीय संयम के लिये खुले बजट, उचित लेखा-जोखा और व्यय का स्पष्ट खुलासा आवश्यक है। यह पारदर्शिता धन के मनमाने उपयोग को हतोत्साहित करती है और नैतिक आचरण को बढ़ावा देती है।
- उदाहरण: सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) मनरेगा और PMAY जैसी योजनाओं में धन वितरण की रियल टाइम ट्रैकिंग को सक्षम बनाती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है तथा हेरफेर की गुंजाइश कम हो जाती है।
- जवाबदेही तंत्र को मज़बूत बनाता है: विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन में नियमित अंकेक्षण, प्रदर्शन समीक्षा और जिम्मेदारी की स्पष्ट रेखाएँ शामिल हैं। जब लोक सेवा अधिकारियों को पता होता है कि व्यय पर बारीकी से नज़र रखी जाती है, तो उनके नैतिक रूप से कार्य करने की संभावना अधिक होती है।
- उदाहरण: CAG की ऑडिट रिपोर्टों में बार-बार वित्तीय अनियमितताओं (जैसे: कोयला ब्लॉक आवंटन और 2G स्पेक्ट्रम मामलों में) को उजागर किया गया है, संस्थाओं को जवाबदेह ठहराया गया है और ईमानदारी को दृढ़ किया गया है।
- भ्रष्टाचार और लीकेज को कम करता है: जब वित्तीय मानदंडों और उचित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है, तो इससे विवेक सुनिश्चित होता है तथा अस्पष्टता (जो प्रायः भ्रष्टाचार को जन्म देती है) कम हो जाती है। विवेकशीलता खामियों को दूर करने में मदद करती है।
- उदाहरण: प्रत्यक्ष हस्तांतरित लाभ (DBT) प्रणाली ने सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के खातों में स्थानांतरित करके LPG सब्सिडी (पहल) जैसी योजनाओं में लीकेज को बहुत हद तक कम कर दिया है, जिससे स्वच्छ शासन में योगदान मिला है।
- नैतिक निर्णय लेने को बढ़ावा देता है: वित्तीय संयम के लिये लागत-लाभ विश्लेषण और जिम्मेदार प्राथमिकता की आवश्यकता होती है। यह निर्णयकर्ताओं को राजनीतिक लाभ के बजाय जन कल्याण का आकलन करने में मदद करता है
- उदाहरण: FRBM अधिनियम सरकारों को राजकोषीय घाटे को सीमित करने और व्यय की सावधानीपूर्वक योजना बनाने के लिये बाध्य करता है, जिससे व्यर्थ के लोकलुभावन व्यय को रोका जा सके, जो अल्पकालिक राजनीतिक लक्ष्यों की पूर्ति तो कर सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक सार्वजनिक हित को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
- जनता का विश्वास और वैधता बढ़ती है: जब नागरिक देखते हैं कि उनके करों का बुद्धिमत्तापूर्वक और बिना किसी अपव्यय के उपयोग किया जा रहा है, तो इससे लोक प्रशासनिक संस्थाओं में विश्वास बढ़ता है। यह नैतिक वैधता ईमानदारी का एक प्रमुख स्तंभ है।
- उदाहरण: PM-KUSUM जैसी योजनाओं की सफलता, जहाँ सौर पंप सब्सिडी को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाता है और उसकी निगरानी की जाती है, ने ग्रामीण शासन प्रणालियों में किसानों के बीच विश्वास बढ़ाया है।
- संस्थागत अखंडता को बढ़ावा देता है: वित्तीय अनुशासन को महत्त्व देने वाला पारिस्थितिकी तंत्र संस्थानों के भीतर नैतिक संस्कृति को भी मज़बूत करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अखंडता व्यक्तित्व पर निर्भर नहीं करती है बल्कि सिस्टम द्वारा संचालित है।
- उदाहरण: सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) की शुरूआत से विभागों में खरीद प्रक्रिया मानकीकृत हो गई है, जिससे पक्षपात और अनैतिक प्रथाओं में कमी आई है।
निष्कर्ष:
वित्तीय संयम केवल राजकोषीय या आर्थिक चिंता नहीं है; बल्कि यह बहुत नैतिक है। यह लोक प्रशासन को ईमानदारी, दक्षता और जवाबदेही के सिद्धांतों के साथ जोड़ता है, जिससे शासन में ईमानदारी को दृढ़ता मिलती है। भारत जैसे लोकतंत्र में, जहाँ संसाधनों की कमी वास्तविक है और अपेक्षाएँ बहुत अधिक हैं, वित्तीय अनुशासन राज्य का नैतिक कर्त्तव्य बन जाता है।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
Print