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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. 21वीं सदी में अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी के भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक आयामों का परीक्षण करके दोनों देशों के बीच संबंधों का विश्लेषण कीजिये। (250 शब्द)

    25 Mar, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • भारत के लिये अफ्रीका के महत्त्व के संदर्भ में जानकारी के साथ उत्तर दीजिये।
    • साझेदारी के भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक आयाम बताइये।
    • भारत-अफ्रीका साझेदारी में प्रमुख बाधाओं को उजागर करते हुए साझेदारी को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाइये।
    • उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय: 

    21वीं सदी में अफ्रीका के साथ भारत का जुड़ाव ऐतिहासिक एकजुटता से पारस्परिक रूप से लाभकारी विकासात्मक एवं रणनीतिक साझेदारी की ओर एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। 

    जैसे-जैसे वैश्विक शक्ति संतुलन विकसित हो रही है, अफ्रीका एक भू-आर्थिक अवसर और भू-राजनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है, जो ऊर्जा सुरक्षा, बहुपक्षीय सुधार एवं दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिये भारत की आकांक्षाओं का केंद्र है।

    मुख्य भाग: 

    भू-आर्थिक आयाम

    • महत्त्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक संसाधन
      • अफ्रीका में वैश्विक महत्त्वपूर्ण खनिज भंडार का 30% हिस्सा मौजूद है, जो भारत के EV लक्ष्यों (वर्ष 2030 तक 30% EV) और स्वच्छ ऊर्जा महत्त्वाकांक्षाओं के लिये महत्त्वपूर्ण है।
      • ज़िम्बाब्वे (लिथियम), दक्षिण अफ्रीका (प्लैटिनम समूह धातु), DRC (कोबाल्ट) प्रमुख हैं।
      • भारत को अपने क्रिटिकल मिनरल्स मिशन को अफ्रीका के 'खदान-से-बंदरगाह-तक' से आगे मूल्य-संवर्द्धित औद्योगिकीकरण के प्रयासों के साथ संरेखित करने की आवश्यकता है।
    • व्यापार और बाज़ार अभिगम 
      • द्विपक्षीय व्यापार 98 बिलियन अमेरिकी डॉलर (वर्ष 2022-23) तक पहुँच गया; खनिज और खनन का हिस्सा 43 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
      • AfCFTA 1.3 बिलियन का एकल बाज़ार खोलता है, जो भारत के निर्यात विविधीकरण का समर्थन करता है।
    • ऊर्जा एवं बुनियादी अवसंरचना
      • अफ्रीका भारत के तेल का 15% आपूर्ति करता है (जैसे: नाइजीरिया, अंगोला)।
      • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के तहत भारत की 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता ऊर्जा पहुँच और भारत की जलवायु कूटनीति को आगे बढ़ाती है।

    भू-राजनीतिक आयाम

    • सामरिक और बहुपक्षीय संरेखण
      • अफ्रीका के 54 देश एक महत्त्वपूर्ण मतदान समूह हैं। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों और अफ्रीकी संघ की G20 सदस्यता (वर्ष 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के तहत प्राप्त) का समर्थन करता है।
        • एक मज़बूत साझेदारी बढ़ते चीनी प्रभाव का मुकाबला करती है और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देती है।
    • समुद्री एवं सुरक्षा सहयोग
      • पूर्वी अफ्रीका हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत के हितों के लिये महत्त्वपूर्ण है।
      • IMT ट्रिलाट (भारत-मोज़ाम्बिक-तंज़ानिया) और सोमालिया के तट पर समुद्री डकैती रोधी गश्त जैसी पहल समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाती हैं।
    • प्रवासी संबंध
      • अफ्रीका में 30 लाख की संख्या में मौजूद भारतीय प्रवासी सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मज़बूत बनाते हैं।
      • इस संबंध को मजबूत करने के लिये प्रवासी भारतीय दिवस जैसी पहलों ने अफ्रीकी भारतीयों पर ध्यान केंद्रित किया।

    साझेदारी में प्रमुख बाधाएँ: 

    चुनौती

    चित्रण

    निवेश में विलंब

    भारत चीन से पीछे है; उदाहरण के लिये, आर्सेलर मित्तल का सेनेगल से बाहर निकलना ($2.2 बिलियन की परियोजना)।

    उत्पाद धारणा

    गुणवत्ता संबंधी मुद्दे (जैसे: वर्ष 2022 गाम्बिया कफ सिरप त्रासदी) विश्वास को प्रभावित करते हैं।

    क्षेत्रीय असंतुलन

    पूर्व/दक्षिण अफ्रीका पर अत्यधिक जोर; पश्चिमी अफ्रीका पर कम ध्यान।

    निष्पादन चुनौतियाँ

    परियोजना में विलंब (जैसे: रिवाटेक्स, केन्या) विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है।

    संसाधन प्रतिद्वंद्विता

    ऊर्जा और खनिज परिसंपत्तियों में चीन (जिबूती उपस्थिति) के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा।

    रणनीतिक तालमेल की ओर कदम: 

    • सामरिक खनिज साझेदारी: भारत-अफ्रीका खनिज विकास कोष द्वारा समर्थित खनन परिसंपत्तियों का सह-विकास।
    • डिजिटल एवं कौशल कूटनीति: ‘अफ्रीका के लिये डिजिटल कौशल’ का शुभारंभ, IIT/IIM परिसरों की स्थापना तथा ITEC कार्यक्रमों का विस्तार।
    • संतुलित क्षेत्रीय पहुँच: लक्षित निवेश मिशनों के साथ पश्चिम और मध्य अफ्रीका में सहभागिता को व्यापक बनाना।
    • कृषि-तकनीक और नवाचार: भारत के e-NAM मॉडल की पुनरावृत्ति, भारत-अफ्रीकी मॉडल फार्म बनाना और कृषि स्टार्टअप को बढ़ावा देना।

    निष्कर्ष: 

    अफ्रीका अब केवल नैतिक एकजुटता का भागीदार नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक प्रभाव और सतत् विकास के लिये भारत की खोज़ में एक रणनीतिक सहयोगी है। भू-आर्थिक रूप से सशक्त और भू-राजनीतिक रूप से संरेखित भारत-अफ्रीका साझेदारी आपसी विकास को सुरक्षित करते हुए एक समावेशी वैश्विक व्यवस्था को आयाम दे सकती है।

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