‘वापस बुलाने का अधिकार’ (Right to Recall: RTR) का क्या अर्थ है? भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में इसके महत्त्व का वर्णन करते हुए भारत में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर इसे लागू करने से संबंधित चुनौतियों का उल्लेख करें।
उत्तर :
‘राइट टू रिकॉल’ (RTR) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत निर्वाचित अधिकारियों को उनके सामान्य कार्यकाल की समाप्ति से पहले ही हटाने की शक्ति मतदाताओं को प्राप्त होती है। वर्तमान में भारत में मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान में नगर-निगम स्तर पर ‘राइट टू रिकॉल’ का प्रावधान किया गया है और इसे राज्य एवं केंद्रीय विधायिका के स्तर पर लागू करने की मांग भी उठती रही है।
भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में राइट टू रिकॉल का महत्त्व
- वर्तमान में यदि मतदाता अपने निर्वाचित प्रतिनिधि से असंतुष्ट है तो उसके पास उसे हटाने का कोई उपाय विद्यमान नहीं है। लेकिन ‘राइट टू रिकॉल’ लागू होने से मतदाताओं के पास यह अधिकार आ जाएगा कि वे उस प्रतिनिधि को हटा सकें जो इसकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। इस प्रकार यह प्रक्रिया राजनीतिक व्यवस्था में जवाबदेहिता को बढ़ावा देगी।
- दुष्कर्मों एवं अपराधों में संलग्न तथा अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल रहने वाले जन प्रतिनिधियों को चुनने की तरह उन्हें हटाने का अधिकार भी जनता के पास होने चाहिये।
- यह चुनावी व्यय को कम करेगा क्योंकि उम्मीदवार समय पूर्व ‘वापस बुलाने’ के अधिकार (Right to Recall) के प्रयोग के डर से चुनावी व्यय को कम करेंगे।
भारत में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर RTR के प्रयोग से संबंधित चुनौतियाँ
- यह देश की राजनीतिक व्यवस्था एवं सरकारों को अस्थिर कर देश में अराजकता का वातावरण पैदा कर सकता है क्योंकि जब भी कोई असंतोष उत्पन्न होगा, जनता ‘राइट टू रिकॉल’ का प्रयोग करने लगेगी।
- इसका दुरूपयोग हारे हुए उम्मीदवारों द्वारा एक राजनीतिक हथियार के रूप में जनता को विजयी उम्मीदवार के विरूद्ध भड़काने में किया जा सकता है।
- इसके प्रयोग से बार-बार चुनाव आयोजित करने पड़ेंगे जिससे अनावश्यक व्यय एवं सरकारी मशीनरी का प्रयोग करना पड़ेगा।
- बार-बार चुनावों एवं उम्मीदवारों को ‘वापस बुलाने’ से मतदाताओं की मतदान में रूचि एवं चुनावी भागीदारी में कमी आ सकती है।
यद्यपि, राजनीतिक जवाबदेहिता बढ़ाने के लिये ‘राइट टू रिकॉल’ एक कारगर हथियार है लेकिन इसका प्रयोग विभिन्न वैश्विक उदाहरणों का परीक्षण कर एवं पर्याप्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित कर ही किया जाना चाहिये।