लोकपाल का क्षेत्राधिकार | 26 Feb 2025
स्रोत: द हिंदू
सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने लोकपाल के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उच्च न्यायालय (HC) के न्यायाधीशों को लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत "लोक सेवक" के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिससे वे इसके अधिकार क्षेत्र में आ गए।
- मामले की पृष्ठभूमि: लोकपाल ने दावा किया कि उच्च न्यायालयों का निर्माण ब्रिटिश काल के कानूनों जैसे भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम 1861 के तहत किया गया था, और अनुच्छेद 214 उन्हें स्थापित करने के बजाय केवल मान्यता देता है, जिससे उनके न्यायाधीश इसके अधिकार क्षेत्र के अधीन हो जाते हैं।
- हालाँकि, इसमें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शामिल नहीं किया गया, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना संविधान (अनुच्छेद 124) द्वारा की गई थी, न कि संसद के अधिनियम द्वारा।
- सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि सभी न्यायाधीश, चाहे वे उच्च न्यायालय में हों या सर्वोच्च न्यायालय में, संविधान के तहत नियुक्त किये जाते हैं, जिससे वे लोकपाल की निगरानी से उन्मुक्त हो जाते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति अनुच्छेद 124 के तहत और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति अनुच्छेद 217 के तहत की जाती है।
- लोकपाल का क्षेत्राधिकार: लोकपाल का क्षेत्राधिकार प्रधानमंत्री (राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध आदि के मामलों को छोड़कर), केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों (ग्रुप A-D) पर है।
- इसमें संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित संस्थाओं के अध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी, केंद्र सरकार द्वारा आंशिक/पूर्ण रूप से वित्त पोषित या नियंत्रित संस्थाएँ, या विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत 10 लाख रुपए/वर्ष से अधिक विदेशी दान प्राप्त करने वाले संगठन भी शामिल हैं।
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