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चंद्रयान-3 चैस्ट

  • 05 Apr 2025
  • 2 min read

स्रोत: द हिंदू

भारत के चंद्रयान-3 मिशन का चैस्ट (चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरीमेंट) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उपसतह तापमान को सफलतापूर्वक मापने वाला पहला उपकरण बन गया। 

  • अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 की सफल चंद्र लैंडिंग के बाद विक्रम लैंडर द्वारा चैस्ट को तैनात किया गया था। 
    • चैस्ट जाँच में 10 तापमान सेंसर लगे हैं जो इसकी सुई के साथ 1 सेमी की दूरी पर स्थित हैं तथा  इसमें हथौड़ा चलाने की बजाय घूर्णन आधारित तैनाती तंत्र है।
    • यान सफलतापूर्वक चंद्र सतह में 10 सेमी तक उतरा और सितंबर 2023 तक तापीय डाटा एकत्र किया। 
    • आंकड़ों से पता चला कि दक्षिणी ध्रुव के पास पहले से अनुमानित मात्रा से अधिक जल बर्फ की उपस्थिति है, जो भविष्य के चंद्र मिशनों के लिये एक महत्त्वपूर्ण खोज है।
    • चेस्ट की सफलता का श्रेय इसके घूर्णनशील जाँच तंत्र को दिया गया, जो पहले के मिशनों में प्रयुक्त हैमरिंग तकनीक की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हुआ।
  • पिछले मिशन: ESA का फिले लैंडर (2014) धूमकेतु 67P पर असुविधाजनक लैंडिंग के कारण MUPUS (सतह और उपसतह विज्ञान के लिये बहुउद्देशीय सेंसर) थर्मल जाँच को तैनात नहीं कर सका।
    • मंगल ग्रह पर नासा का इनसाइट (2018) भी हीट फ्लो और फिज़िकल प्रॉपर्टीज पैकेज (HP3) उपकरण के साथ यांत्रिक समस्याओं के कारण उपसतह डाटा एकत्र करने में विफल रहा।

और पढ़ें: चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा

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