मुख्य परीक्षा
खाद्य एवं कृषि हेतु पादप आनुवंशिक संसाधनों पर FAO की रिपोर्ट
- 01 Apr 2025
- 7 min read
स्रोत: डाउन टू अर्थ
चर्चा में क्यों?
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने रोम, इटली में आयोजित खाद्य एवं कृषि के लिये आनुवंशिक संसाधन आयोग (CGRFA-20 ) के 20वें सत्र के उपरांत खाद्य एवं कृषि हेतु विश्व के पादप आनुवंशिक संसाधनों की स्थिति (SoW3) पर तीसरी रिपोर्ट जारी की है।
- रिपोर्ट के अनुसार यद्यपि विश्व स्तर पर लगभग पौधों की 6,000 प्रजातियों की कृषि की जाती है, तथापि विश्व का 60% फसल उत्पादन केवल 9 फसलों पर केंद्रित है।
- नोट: खाद्य और कृषि के लिये विश्व के पादप आनुवंशिक संसाधनों की स्थिति (SoW-PGRFA) रिपोर्ट, CGRFA के तहत FAO द्वारा प्रकाशित, पादप आनुवंशिक संसाधनों का एक आवधिक वैश्विक मूल्यांकन है, जो उनके संरक्षण, सतत् उपयोग और खाद्य सुरक्षा में भूमिका पर केंद्रित है।
FAO की रिपोर्ट से संबंधित मुख्य तथ्य क्या हैं?
- वैश्विक फसल निर्भरता: वैश्विक फसल उत्पादन का 60% केवल 9 फसलों पर निर्भर है- गन्ना, मक्का, चावल, गेहूँ, आलू, सोयाबीन, तेल ताड़ फल, चीनी चुकंदर, और कसावा।
- पौधों की 6,000 प्रजातियों की कृषि के बावजूद, फसल की विविधता कम हो रही है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिये खतरा उत्पन्न हो रहा है।
- FV/LR के समक्ष खतरा: भारत में, पाँच कृषि पारिस्थितिक क्षेत्रों में 50% से अधिक किसान किस्में और भूमि प्रजातियाँ (FV/LR) खतरे में हैं। वर्ष 2016 सीड हब पहल के अंतर्गत अधिउत्पादक किस्मों (HYV) को बढ़ावा देकर दाल उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है।
- FV/LR वे पारंपरिक फसलें हैं जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल होती हैं, जिससे जैवविविधता, खाद्य सुरक्षा और जलवायु लचीलापन बढ़ता है। वे वाणिज्यिक संकरों की तुलना में कीटों, रोगों और अनावृष्टि के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं, जैसे काला नमक चावल, चपाती गेहूँ और रजनीगंधा कपास।
- वैश्विक स्तर पर, FV/LR विविधता का 6% जोखिम की स्थिति में है जहाँ कुछ क्षेत्रों में नुकसान 18% से अधिक है। दक्षिणी अफ्रीका, कैरिबियन और पश्चिमी एशिया सर्वाधिक प्रभावित हैं।
- संरक्षण परिदृश्य: 42% पादप वर्ग को इन-सीटू संरक्षण के दौरान खतरों का सामना करना पड़ता है, जबकि एक्स-सीटू प्रयासों को कौशल की कमी के साथ-साथ वित्तीय, राजनीतिक और बुनियादी ढाँचे संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- फसल विविधता और जलवायु परिवर्तन:
- चरम मौसमीय घटनाएँ आनुवंशिक विविधता के नुकसान को बढ़ाती हैं, जबकि कई देशों में आपदा प्रभाव आकलन तंत्र का अभाव है।
- आपदा के बाद जर्मप्लाज्म वितरण, अर्थात् कृषि और संरक्षण के लिये पादपों की आनुवंशिक सामग्री की आपूर्ति, स्थानीय मृदा के लिये बीजों की खराब अनुकूलता के कारण चुनौतियों का सामना करती है।
खाद्य और कृषि के लिये आनुवंशिक संसाधनों पर आयोग (CGRFA)
- स्थापना: खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा वर्ष 1983 में खाद्य एवं कृषि के लिये आनुवंशिक संसाधनों (GRFA) से संबंधित मुद्दों के समाधान हेतु स्थापित किया गया।
- उद्देश्य: कृषि में जैविक विविधता के संरक्षण और सतत् उपयोग के लिये समर्पित एकमात्र स्थायी अंतर-सरकारी निकाय के रूप में कार्य करना।
- सदस्यता: 179 देश (जनवरी 2023 तक), जिसमें भारत और यूरोपीय संघ भी शामिल हैं।
- CGRFA की प्रमुख उपलब्धियाँ:
- खाद्य एवं कृषि के लिये पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतर्राष्ट्रीय संधि (ITPGRFA) (2001): फसल विविधता में किसानों के योगदान को मान्यता प्रदान करना तथा प्रजनकों, किसानों और शोधकर्त्ताओं के लिये पौधों की आनुवंशिक सामग्री का आकलन करने हेतु एक वैश्विक ढाँचा स्थापित करना, इसके अपनाने में सहायता करना।
- पशु आनुवंशिक संसाधन (AnGR) और वैश्विक कार्य योजना (GPA): वर्ष 1997 में AnGR पर कार्य शुरू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप स्टेट ऑफ द वर्ल्ड एनिमल जेनेटिक रिसोर्स पर पहली रिपोर्ट तैयार हुई और वर्ष 2007 में GPA को अपनाया गया।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नप्रश्न. पर्माकल्चर कृषि पारंपरिक रासायनिक कृषि से कैसे अलग है? ( 2021)
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये। (a) केवल 1 और 3 उत्तर: (b) प्रश्न. निम्नलिखित कृषि पद्धतियों पर विचार कीजिये: (2012)
वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में, उपर्युक्त में से कौन-सा/से मृदा में कार्बन प्रच्छादन/संग्रहण में सहायक है/है? (a) केवल 1 और 2 उत्तर: (b) |