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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 26 Jun, 2021
  • 7 min read
विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 26 जून, 2021

कर्णम मल्लेश्वरी

हाल ही में दिल्ली सरकार ने ओलंपिक पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी को ‘दिल्ली खेल विश्वविद्यालय’ का पहला कुलपति नियुक्त किया है। कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भारोत्तोलक हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में सिडनी ओलंपिक में 'स्नैच' और 'क्लीन एंड जर्क' श्रेणियों में 110 किलोग्राम और 130 किलोग्राम भार उठाकर इतिहास रच दिया था। दिल्ली विधानसभा ने वर्ष 2019 में ‘दिल्ली खेल विश्वविद्यालय’ (DSU) स्थापित करने के लिये एक विधेयक पारित किया था, जो क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी समेत विभिन्न खेलों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान करेगा। ‘दिल्ली खेल विश्वविद्यालय’ से छात्रों को प्राप्त होने वाली डिग्री मुख्यधारा के पाठ्यक्रमों से प्राप्त होने वाली डिग्री के समान होगी। ‘दिल्ली खेल विश्वविद्यालय’ की स्थापना का उद्देश्य ऐसे एथलीट बनाना और प्रशिक्षित करना है जो खेल के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर देश को गौरवान्वित कर सकें। यह विश्वविद्यालय अत्याधुनिक खेल सुविधाएँ प्रदान कर लोगों की एथलेटिक प्रतिभा का निर्माण करने में मदद करता है। इस खेल विश्विद्यालय का लक्ष्य विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिये एथलीटों को तैयार करने हेतु आवश्यक खेल सुविधाएँ प्रदान करना और संसाधनों की कमी से जूझ रहे एथलीटों को इसके दायरे में लाना है। विदित हो कि दिल्ली का उपराज्यपाल इस विश्वविद्यालय का चांसलर होगा। 

सुचेता कृपलानी

उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने विख्‍यात स्‍वतंत्रता सेनानी और भारत की पहली महिला मुख्‍यमंत्री सुचेता कृपलानी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून, 1908 को हरियाणा के अंबाला में एक बंगाली परिवार में हुआ था। इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् सुचेता कृपलानी ने ‘बनारस हिंदू विश्वविद्यालय’ में व्याख्याता के रूप में काम करना शुरू किया। अरुणा आसफ अली और उषा मेहता जैसी समकालीन महिलाओं की तरह सुचेता कृपलानी भी भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुईं। सुचेता कृपलानी ने भारत के विभाजन के दौरान हुए दंगों में महात्मा गांधी के साथ मिलकर काम किया। सुचेता कृपलानी उन महिलाओं में से एक थीं, जिन्हें भारतीय संविधान समिति में शामिल किया गया था। भारत की स्वतंत्रता के बाद सुचेता कृपलानी उत्तर भारत की राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल हो गईं। वर्ष 1952 में उन्हें लोकसभा के सदस्य के रूप में चुना गया और वर्ष 1962 में वह कानपुर से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में चुनी गईं। 1963 में वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और इसी के साथ उन्होंने देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। वर्ष 1971 में वह सेवानिवृत्त हुईं और वर्ष 1974 में उनकी मृत्यु हो गई।

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना

पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ को मंज़ूरी दे दी है। ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ की मदद से उच्च अध्ययन करने के लिये 10 लाख रुपए तक का सॉफ्ट लोन प्राप्त किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल में कम-से-कम 10 वर्ष बिताने वाला कोई भी छात्र इस योजना का लाभ उठा सकता है। यह ऋण भारत या विदेश में स्नातक, स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट और पोस्ट-डॉक्टरेट अध्ययन के लिये उपलब्ध होगा।  कोई भी एक व्यक्ति 40 वर्ष की आयु तक योजना के लिये पात्र होगा। योजना के तहत लाभ प्राप्त करने वाले छात्र को नौकरी मिलने के बाद ऋण चुकाने के लिये पंद्रह वर्ष का समय दिया जाएगा। योजना के तहत 10वीं या उससे अधिक की कक्षा के विद्यार्थी ऋण प्राप्त करने के लिये पात्र हैं। ज्ञात हो कि वर्तमान में राज्य में दसवीं कक्षा में लगभग 12 लाख छात्र और बारहवीं कक्षा में 9 लाख से अधिक छात्र हैं, जो इस योजना का लाभ प्राप्त करने में सक्षम होंगे। इस नई योजना से छात्रों के अभिभावकों को भी काफी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिये विभिन्न अनौपचारिक स्रोतों से ऋण नहीं लेना पड़ेगा। 

ओपन सोसाइटी पुरस्कार

हाल ही में केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा को सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी (CEU) के प्रतिष्ठित ‘ओपन सोसाइटी पुरस्कार’ (2021) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार, जो कि सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी का सर्वोच्च सम्मान है, महामारी के दौरान उनके दृढ़ नेतृत्त्व और आम लोगों की जीवन रक्षा के लिये उनके द्वारा किये गए समुदाय-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यों को मान्यता प्रदान करता है। सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी द्वारा 'ओपन सोसाइटी पुरस्कार’ प्रतिवर्ष ऐसे व्यक्ति या संगठन को प्रदान किया जाता है, जिसकी उपलब्धियों ने समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। ‘सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी’ की स्थापना वर्ष 1991 में हंगरी के राजनीतिक कार्यकर्त्ता जॉर्ज सोरोस द्वारा की गई थी।


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